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ब्लैक फंगस पर BHU का दावा:85 मरीजों की जांच में सभी म्युकोर माइकोसिस से पीड़ित मिले; इसका शुगर रोगियों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों पर खतरा

वाराणसी23 दिन पहले
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वैज्ञानिकों ने 117 मरीजों में से 85 सैंपल की जांच की। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सभी मरीज म्युकोर माइकोसिस से पीड़ित हैं। यह कवकों का समूह है। इसका खतरा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर पड़ता है।  - Dainik Bhaskar
वैज्ञानिकों ने 117 मरीजों में से 85 सैंपल की जांच की। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सभी मरीज म्युकोर माइकोसिस से पीड़ित हैं। यह कवकों का समूह है। इसका खतरा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर पड़ता है। 

कोरोना संकट के बीच देश में ब्लैक फंगस लोगों की जान ले रहा है। अभी तक आम भाषा में ब्लैक, वाइट और येलो फंगस जैसी बीमारियों के नाम सामने आए हैं। लेकिन इस बीच वाराणसी में BHU के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के वैज्ञानिकों ने एक सिरे से खारिज कर दिया है कि इन तीनों श्रेणियों के एक भी मरीज वाराणसी समेत पूर्वांचल में नहीं मिले हैं। यह दावा 117 मरीजों में से 85 सैंपल की जांच से किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सभी मरीज म्युकोर माइकोसिस से पीड़ित हैं। यह कवकों का समूह है। इसका खतरा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर पड़ता है।

इसमें भी खास बात यह है कि यह बीमारी शुगर के मरीजों पर ज्यादा घातक है। BHU में आए म्यूकोर माइकोसिस के मरीजों में भी ज्यादातर शुगर से पीड़ित हैं। ऐसे में शुगर का लेवल मेनटेन रखने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मिलैनिन पिगमेंट के कारण बदलता है रंग

BHU के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि म्यूकोर माइकोसिस फंगस ब्लैक, वाइट या यलो फंगस भले ही कहा जा रहा है, लेकिन यह रंगहीन यानी पारदर्शी होता है। यह बेहद ही गलत धारणा है कि ब्लैक से ज्यादा जानलेवा वाइट और उससे भी खतरनाक येलो फंगस है। यह धारणा इंसानों में डर पैदा करने के साथ ही विज्ञान के सिद्धांत को भी प्रभावित कर रही है। माइक्रोबायोलॉजी इस तरह से फंगस की रंग व्यवस्था को खारिज करता है। केवल ब्लैक फंगस ही सच है जो कि अभी किसी इंसान को हुआ ही नहीं है। यह अपने मिलैनिन पिगमेंट (वर्णक) के कारण ही काला होता है, जबकि वर्तमान का ब्लैक फंगस सामान्य तौर पर चल गया चलन है।

डॉक्टर दीपक कुमार।
डॉक्टर दीपक कुमार।

फंगस कितना खतरनाक, यह रोगी का रंग नहीं हमारी इम्युनिटी तय करती है

डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि मिलेनाईज फंगस या डिमिटेशियस अल्टरनेरिया, बाइपोलेरिस, फियार्ड फंगाई आदि ये सब ब्लैक फंगस की श्रेणी में आते हैं। वर्तमान में तो हाईलाइन फंगस है जो कि रक्त के कण के साथ मिल जा रहा है तो कभी काला और जब नहीं मिल रहा है तो सफेद दिखाई दे रहा है। वहीं, फंगस कितना खतरनाक होगा यह उसका कलर नहीं बल्कि हमारी इम्युनिटी तय करती है। उन्होंने बताया कि वाइट या येलो फंगस का उल्लेख नामेनक्लेचर में नहीं है। फंगस को हमेशा वैज्ञानिक नाम से ही संबोधित करना चाहिए। इसे म्यूकोर माइकोसिस ही कहें। आम आदमी से लेकर डॉक्टर तक गलत तरीके से हाईलाइन फंगस को ब्लैक फंगस के नाम से पुकार रहे हैं।

म्यूकर माइकोसिस की शेल वॉल किसी कलर की नहीं दिखती

माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रो. रागिनी तिलक ने कहा कि ब्लैक फंगस ग्रुप ऑफ फंगस होता है। ब्लैक फंगस की शेल वॉल में मिलैनिन पिगमेंट होता है। यह मैलेनिन शेल वॉल को डार्क ब्राउन या डार्क ब्लैक कलर का दिखाता है। वहीं म्यूकोर माइकोसिस की जब हम माइक्रोस्कोप से स्टडी करते हैं तो फंगस की शेल वॉल किसी कलर की नहीं दिखती है। इसलिए म्यूकोर माइकोसिस को ब्लैक फंगस कहना पूरी तरह से गलत है। हमने अब तक बीएचयू में आए मरीजों में से 85 का सैंपल लेकर टेस्ट लिया। इनमें से एक भी मरीज ब्लैक फंगस से पीड़ित नहीं मिला।

प्रोफेसर रागिनी तिलक।
प्रोफेसर रागिनी तिलक।

म्यूकर माइकोसिस एक जैसे लक्षणों वाले कवकों का समूह है

प्रो. रागिनी तिलक ने बताया कि म्यूकोर माइकोसिस और ब्लैक फंगस अलग-अलग हैं। म्यूकोर माइकोसिस ब्लैक फंगस से बहुत ज्यादा खतरनाक है। यह टिशू में बहुत तेजी से फैलता है और आंख, जबड़ा, गले के साथ ही ब्रेन जैसे शरीर के प्रमुख अंगों को तेजी से खराब करता चला जाता है। म्यूकोर माइकोसिस से बुरी तरह प्रभावित अंग को शरीर से अलग भी करना पड़ता है। इससे व्यक्ति मनोवैज्ञानिक तौर पर भी टूट जाता है और उसका आत्मविश्वास वापस नहीं आ पाता है।

म्यूकोर माइकोसिस की शुरुआती दौर में ही जांच जरूरी है। साधारण शब्दों में कहें तो यह एक जैसे लक्षणों वाले कवकों का एक समूह है। ऐसे कवक हमें घर में रोटी, प्याज, ब्रेड या फ्रिज में दिखाई दे जाते हैं। वहीं, ब्लैक फंगस शरीर में धीरे-धीरे फैलता है और उसका असर कम होता है। म्यूकर माइकोसिस की अहम वजह व्यक्ति का डायबिटीज से पीड़ित होना या इम्युनिटी का कमजोर होना है। बीएचयू में आए म्यूकर माइकोसिस के मरीजों में भी ज्यादातर डायबिटीज से पीड़ित हैं।

अगर घर में कोई डायबिटीज से पीड़ित तो यह सावधानी बरतें

  • फ्रिज के रबर को और उसे अंदर से अच्छे से साफ रखें।
  • फ्रिज में खाद्य सामग्री ढंक कर ही रखे।
  • फ्रिज में रखी हुई ब्रेड इस्तेमाल न करें।
  • एसी का इस्तेमाल कम से कम करें।
  • डायबिटीज पीड़ित अपने शुगर लेवल को चेक करते रहें।
  • साफ मास्क का ही इस्तेमाल करें।
  • कूलर, एसी, आरओ की टोंटी सहित नमी वाले सभी स्थानों की नियमित सफाई करें।
  • हमेशा गर्म और ताजा भोजन ही खाएं।
  • इम्युनिटी को मजबूत रखें और नियमित व्यायाम करें।