ज्ञानवापी मामले में कल भी जारी रहेगी सुनवाई:हिंदू पक्ष की मांग- आदिविश्वेश्वर मंदिर परिसर का हिस्सा है ज्ञानवापी, सभी मुकदमों को कोर्ट एक साथ सुने

वाराणसी5 महीने पहले

वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में अब 11 मई को फिर से अदालत में सुनवाई होगी। मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच डेढ़ घंटे तक बहस हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने एडवोकेट कमिश्नर के बदले जाने और ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर दलील पेश की। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने तैयारी के साथ कुछ अन्य तथ्य प्रस्तुत करने के लिए बुधवार तक का समय मांगा। इस पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय कर दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर वह स्वयं मौके पर जाएंगे।

अन्य वादियों की ओर से एडवोकेट रमेश उपाध्याय ने मांग की कि ज्ञानवापी से संबंधित अन्य मुकदमों की सुनवाई भी इसी मुकदमे के साथ हो।
अन्य वादियों की ओर से एडवोकेट रमेश उपाध्याय ने मांग की कि ज्ञानवापी से संबंधित अन्य मुकदमों की सुनवाई भी इसी मुकदमे के साथ हो।

आपत्ति देने के लिए कल का समय मांगा
वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिवादियों की ओर से प्रार्थना पत्र के माध्यम से एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की मांग की गई है। वादी पक्ष की ओर से प्रार्थना पत्र के माध्यम से ज्ञानवापी परिसर में बैरिकेडिंग के अंदर और तहखाने के अंदर सर्वे करने की मांग की गई है। कोर्ट से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी आपत्ति देने के लिए कल का समय मांगा है। वादी पक्ष की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से एडवोकेट कमिश्नर को मौका मुआयना करने देने की अपील की गई है।

6 जुलाई 2022 को ही सुनने का आदेश दिया साध्वी पूर्णाम्बा और साध्वी शारदाम्बा ने सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कहा, 'हमारा केस और वर्तमान में चल रहा वाद एक ही प्रकरण है। हमारी मांग है कि हमारे वाद और वर्तमान में चल रहे वाद पर एक साथ सुनवाई की जाए।' दोनों साध्वियों के वाद पर कोर्ट ने पहले से ही 6 जुलाई 2022 की डेट सुनवाई के लिए तय किया है। आज भी कोर्ट ने दोनों साध्वियों के वाद को 6 जुलाई 2022 को ही सुनने का आदेश दिया है।

दोनों साध्वियों के अनुसार, वर्तमान में चल रहे वाद से मिलते जुलते और भी वाद कोर्ट में विचारधीन हैं, जिनकी सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए। इसमें वाद रंजना अग्निहोत्री बनाम उत्तर प्रदेश सरकार भी शामिल है।

एडवोकेट रमेश उपाध्याय ने कहा कि इसी प्रकार से अन्य और मुकदमे भी दाखिल हैं, जो ज्ञानवापी मस्जिद से ही संबंधित हैं। सभी वादियों ने कहा है कि ज्ञानवापी आदिविश्वेश्वर के मंदिर परिसर का हिस्सा है। पूर्व में यहां नंदी भगवान थे और यहां पूजा-पाठ होता था।

हमारी मांग है कि हमें पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। इसलिए साध्वी पूर्णाम्बा और साध्वी शारदाम्बा ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सभी मुकदमों की सुनवाई एक साथ करने की मांग की है। ताकि, जो भी फैसला हो, वह सभी के लिए एक साथ हो। इससे वादियों के साथ ही अदालत के समय की भी बचत होगी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान रखा था पक्ष
इससे पहले सोमवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान वादी-प्रतिवादी पक्ष और एडवोकेट कमिश्नर ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थी। वादी पक्ष का कहना था कि एडवोकेट कमिश्नर अपना काम सही से कर रहे हैं और सर्वे का काम बाधित करने के लिए प्रतिवादी झूठे आरोप लगा रहे हैं। ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी और सत्यापन की अनुमति दी जाए। वादी पक्ष की दलीलों पर आज प्रतिवादी पक्ष फिर अपनी दलीलें पेश करेगा। उसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

मां शृंगार गौरी प्रकरण को लेकर मुकदमा दर्ज करने वाली महिलाओं ने कहा है कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
मां शृंगार गौरी प्रकरण को लेकर मुकदमा दर्ज करने वाली महिलाओं ने कहा है कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

पांचों महिलाएं बोलीं- केस नहीं लेंगे वापस
ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने रविवार को घोषणा की थी कि वह सोमवार को अदालत में केस वापस लेंगे। केस दर्ज करने वाली पांचों महिलाओं ने जब इससे इनकार कर दिया तो खुद को अलग-थलग पड़ता देख सोमवार को जितेंद्र सिंह बिसेन ने यू-टर्न ले लिया।

कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया। वह आदि विश्वेश्वर से संबंधित एक अन्य मुकदमे को वापस लेने आए हैं। इसके साथ ही देश विरोधी शक्तियों को हावी होते देख उन्होंने अपने संगठन की प्रदेश, मंडल, जिला और वार्ड स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया है।

जितेंद्र सिंह बिसेन ने बताया कि उनका संगठन नए सिरे से काशी विश्वनाथ की लड़ाई लड़ेगा।
जितेंद्र सिंह बिसेन ने बताया कि उनका संगठन नए सिरे से काशी विश्वनाथ की लड़ाई लड़ेगा।

6 मई को शुरू हुआ था सर्वे
अदालत के आदेश पर नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में 6 मई की दोपहर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे शुरू किया था। पहले ही दिन सर्वे को लेकर हंगामा और नारेबाजी हुई थी। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि एडवोकेट कमिश्नर वादी पक्ष की तरह पार्टी बनकर सर्वे कर रहे हैं। 7 मई की दोपहर सर्वे का काम फिर शुरू हुआ। वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि तकरीबन 500 से ज्यादा मुस्लिम मस्जिद में मौजूद थे और उन्हें सर्वे के लिए वहां अंदर नहीं जाने दिया गया। इस वजह से वह सर्वे छोड़ कर जा रहे हैं और अब अपना पक्ष 9 मई को अदालत में रखेंगे।

अलग-थलग पड़ने के बाद जितेंद्र बिसेन का यू-टर्न: 24 घंटे तक साधे रहे चुप्पी, फोन स्विच-ऑफ रखा, अब ज्ञानवापी मामले में केस वापस लेने से पीछे हटे

अगस्त-2021 में दाखिल किया गया था केस
राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में अगस्त 2021 में एक मुकदमा दाखिल किया था। अदालत से मांग की थी कि मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मिले। इसके साथ ही ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के सुरक्षा की मांग भी अदालत से की गई थी। इस मुकदमे में प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार जरिए मुख्य सचिव सिविल, डीएम वाराणसी, पुलिस कमिश्नर वाराणसी, अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के मुख्य प्रबंधक और बाबा विश्वनाथ ट्रस्ट के सचिव को बनाया गया था।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर 10 मई को रिपोर्ट तलब की थी। फिलहाल सर्वे का काम पूरा नहीं हो पाया है, इस वजह से आज अदालत में रिपोर्ट का पेश हो पाना नामुमकिन प्रतीत हो रहा है।

ज्ञानवापी-सर्वे मामले में सुनवाई खत्म: पैरोकार डॉ. सोहनलाल आर्य बोले- आज फिर बहस होगी, अदालत के आदेश के बाद स्पष्ट होगा कि आगे क्या होना है

खबरें और भी हैं...