1991 से ज्ञानवापी-केस लड़ने वाले हरिहर बोले:ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलना हिंदुओं की बड़ी जीत, हमारी 31 साल की लड़ाई सफल हुई

वाराणसी5 महीने पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद में साढ़े 12 फीट के शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है। बातों का बाजार गर्म है कि अयोध्या की तरह अब इस जगह पर भी बाबा विश्वनाथ का नया मंदिर बनाया जाएगा। विवादित क्षेत्र में शिवलिंग मिलने के बाद 1991 से मस्जिद गिराने की लड़ाई लड़ रहे हरिहर पांडे ने सर्वे के नतीजों को हिंदुओं की बड़ी जीत करार दिया है।

उन्होंने कहा, "सर्वे में हमारे मंदिर होने के इतने साक्ष्य मिले हैं कि वकील इसकी रिपोर्ट बनाते-बनाते थक जाएंगे। इस केस को दोबारा जीवित करने वाली 5 महिलाओं को पार्टी दूंगा।"

शृंगार गौरी केस की याचिका दाखिल करने वाली राखी, लक्ष्मी, सीता, मंजू और रेखा भी ज्ञानवापी परिसर में पूजा की मांग कर रही हैं। यानी जिस याचिका के बाद ज्ञानवापी में सर्वे हुआ, उसकी असल शुरुआत 1991 में हरिहर पांडे ने की थी। आज हम उनके घर पहुंचे और 1991 से लेकर अब तक की पूरी कहानी जानी। चलिए बारी-बारी उनकी बातों पर चलते हैं...

1991 में ज्ञानवापी परिसर से मस्जिद को हटाने के लिए 3 लोगों ने सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया था। इनमें हरिहर पांडे, सोमनाथ व्यास और संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे रामरंग शर्मा शामिल थे। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ साल बाद पंडित सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा की मौत हो गई। अब हरिहर पांडे ही इस मामले के इकलौते पक्षकार बचे हैं।

नंदी का दर्शन करने से मुसलमानों ने रोका तो मस्जिद गिराने की कसम खाई

हरिहर पांडे 1991 के काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद केस से जुड़े एकमात्र जीवित पक्षकार हैं।
हरिहर पांडे 1991 के काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद केस से जुड़े एकमात्र जीवित पक्षकार हैं।

हरिहर पांडे कहते हैं, ''साल 1991 की बात है। जब हम बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर के बाहर विशालकाय नंदी के दर्शन के लिए जाने लगे, तो मस्जिद की तरफ कुछ मुसलमानों ने हमें रोक लिया। हम भी पीछे नहीं हटे, हमने कहा हम तो जाएंगे। उसी वक्त पंडित रामरंग शर्मा और सोमनाथ व्यास भी वहां आ गए, लेकिन उन लोगों ने हमें दर्शन नहीं करने दिया।''

1993 में छिपकर मस्जिद के अंदर गया, तो नीचे की तरफ 6 तहखाने देखे
हरिहर पांडे ने कहा, '' मैं साल 1993 में छिपकर मस्जिद के भीतर घुस गया था। वहां नीचे की तरफ भगवान सदाशिव का विशाल शिवलिंग है। इसके अलावा देवी-देवताओं की विखंडित मूर्तियां भी हैं। यहां तक कि मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की दीवारों पर देवों के कई चित्र भी बने थे, जिन्हें प्लास्टर और POP की मदद से ढक दिया गया है। यही वजह है कि सर्वे के पहले दिन जब एडवोकेट कमिश्नर ने मस्जिद की दीवारों को उंगली से खरोचा तो मुस्लिम पक्ष भड़कने लगा था।"

"ज्ञानवापी में हमारा कूप (कुआं) मौजूद है। वही कूप, जिसे भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल से बनाया था। परिसर के नीचे भगवान गणेश, हनुमान, अष्ट भैरव और नंदी की मूर्तियां हैं। अदालत में ये सभी बातें लोगों के सामने आ जाएंगी।"

काशी विश्वनाथ मंदिर का यह फोटो 1890 का है। इसके आगे की तरफ ज्ञानवापी का कूप दिखाई दे रहा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का यह फोटो 1890 का है। इसके आगे की तरफ ज्ञानवापी का कूप दिखाई दे रहा है।

महिलाएं शृंगार गौरी के दर्शन के लिए गईं, तो उन्हें पीछे ढकेला गया
हरिहर पांडे बताते हैं, "महिलाएं जब किसी खास पर्व पर मस्जिद की तरफ बने मां शृंगार गौरी मंदिर में दर्शन करने जाती थी, तो ये बात मुसलमानों को अच्छी नहीं लगती थी। कई बार तो ऐसी घटनाएं हुईं कि जब महिलाएं शृंगार गौरी के दर्शन करने मस्जिद परिसर में गईं, तो उनकी गर्दन पकड़कर धकेल दिया गया।

इसके विरोध में कई बार आवाज उठाई गई और साल 2021 में 5 महिलाओं ने मां शृंगार गौरी की नियमित पूजा के लिए याचिका दायर की। सर्वे के नतीजे आने पर मैं इन महिलाओं को धन्यवाद देता हूं। ये उनकी जीत है, मैं उन्हें पार्टी दूंगा।"

मां शृंगार गौरी केस की याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं का कहना है कि 1992 तक मां शृंगार गौरी की नियमित पूजा होती थी।
मां शृंगार गौरी केस की याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं का कहना है कि 1992 तक मां शृंगार गौरी की नियमित पूजा होती थी।

मस्जिद में नीचे हैं 6 से 7 तहखाने
हरिहर पांडे ने कहा, ''कहीं भी मस्जिदों में तहखाने बनाए जाने का जिक्र नहीं मिलता है। जबकि मंदिरों में स्टोररूम और पूजा के सामान रखने के लिए अलग से जगह बनाई जाती रही है। जब मुगल शासकों ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण किया तो उन्होंने यहां के तहखानों को लूटा। इन तहखानों में मंदिर में चढ़ने वाला दान और कीमती शृंगार की सामग्री रखी जाती थी। जितना मुझे पता है मस्जिद में कुल 6 से 7 तहखाने हो सकते हैं।"

1993: ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे हुआ, साढ़े 12022: दावा।

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