BHU की लॉ फैकल्टी में सुप्रीम कोर्ट के जज बोले:इलाहाबाद हाईकोर्ट में 4 लाख और यूपी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 82 लाख से ज्यादा मुकदमे पेंडिंग

वाराणसी15 दिन पहले
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BHU में शताब्दी समारोह पर सुप्रीम कोर्ट के जज डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा-  लॉ का सच्चा गुण यही है कि आप सभी पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल भी मौजूद थे। - Dainik Bhaskar
BHU में शताब्दी समारोह पर सुप्रीम कोर्ट के जज डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा- लॉ का सच्चा गुण यही है कि आप सभी पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल भी मौजूद थे।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में फैकल्टी ऑफ लॉ के शताब्दी समारोह पर सुप्रीम कोर्ट के जज डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत में करोड़ों केसेज न्यायालयों में पेंडिंग है। इसमें 4 लाख 65 हजार 496 क्रिमिनल मुकदमे बीते 10-20 साल से इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही अटकी पड़ी है। वहीं यूपी के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 82 लाख 41 हजार 560 मुकदमे अधर में हैं। इसमें से 30% पिछले साल ही दायर किए गए थे। इस दौरान इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल भी समारोह में मौजूद थे।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत में इन मुकदमों के निपटारे के लिए देश में लॉ अवेयरनेस और प्रतिनिधित्व की कमी है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम केवल शक्ति प्राप्त करना नहीं, बल्कि लोगों के प्रति जिम्मेदार भी होना चाहिए। कार्यक्रम में आए युवा अधिवक्ताओं को समझाते हुए कहा कि लॉ का सच्चा गुण यही है कि वह सभी पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे।

BHU के महामना सभागार में बनारस लॉ जर्नल 2021 और महामना छात्र लॉ जर्नल लांच किया गया।
BHU के महामना सभागार में बनारस लॉ जर्नल 2021 और महामना छात्र लॉ जर्नल लांच किया गया।

BHU के महामना सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि BHU भारत में सबसे पहले मुफ्त लीगल सहायता केंद्र शुरू करने वाले 6 विश्वविद्यालयों में से एक है। उन्होंने कहा कि लॉ फैकल्टी का शताब्दी वर्ष यह बताता है कि हम अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों पर गर्व करके केवल बैठे नहीं। बल्कि, हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है यह भी सोचें। लॉ के अंदर समाज को बदलने की शक्ति होती है। इतिहास में विधि का प्रयोग लोगों का शोषण करने के लिए हुआ, मगर आज यह सोशल चेंज का मीडियम बन गया है।

हर लॉ पढ़ने वाला एक गांव गोद ले-चीफ जस्टिस
आज कार्यक्रम में आज बनारस लॉ जर्नल 2021 और महामना छात्र लॉ जर्नल लांच किया गया। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि भारत में तीन साल का LLB कोर्स BHU की ही देन है। 1965 में बनारस लॉ जर्नल का प्रकाशन हुआ और उस समय देश के किसी दूसरी लॉ फैकल्टी में जर्नल पब्लिश नहीं होता। उन्होंने कहा कि हर लॉ ग्रेजुएट्स को 40 घंटे की मध्यस्थता की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। लॉ फैकल्टी के 2 या 2 से अधिक छात्रों के समूह द्वारा एक-एक गांव गोद लेकर उसे वादमुक्त बनाना चाहिए। एक सफल अधिवक्ता की कुंजी उसकी मेहनत ही है। यूपी विधि आयोग के अध्यक्ष और BHU के पूर्व छात्र जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट कर्नल बालासुब्रह्मण्यम, कर्नल इन्द्रसेन, फैकल्टी प्रमुख प्रोफेसर अली मेंहदी समेत इस शताब्दी समारोह पर कई विश्वविद्यालयाें के कुलपति और पूर्व छात्र जुटे।

इस तरह शुरू हुआ पहली बार LLB का कोर्स
प्रोफेसर आरके मिश्र ने LLB कोर्स की शुरूआत के बारे में बताया कि न्यायाधीश पीएन भगवती, न्यायाधीश सिन्हा और आनंद की समिति ने मिलकर इस पर काम किया था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस कोर्स को पूरे देश में लागू करने के लिए प्रपोजल दिया।
फिर पूरे देश में LLB का कोर्स शुरू हुआ।

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