ज्ञानवापी सर्वे पर काशीवासियों की राय:किसी ने कहा- यह बाबा की भक्ति तो कोई बोला- इलेक्शन का एजेंडा; दोपहर की नमाज हुई अदा

वाराणसी3 दिन पहले
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बाहर का यह दृश्य आज ज्ञानवापी सर्वे के बाद का है।

वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में शनिवार को पहले दिन का सर्वे पूरा होने के बाद मस्जिद में रुटीन नमाज दोपहर 1 बजे अदा की गई। कम संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। हमने वाराणसी की जनता से ज्ञानवापी सर्वे पर सवाल पूछा तो कई दिलचस्प जवाब मिले।

किसी को यह काम बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ की भक्ति लगी, तो किसी ने इसे भावना भड़काने वाला बताया। वहीं, किसी ने कहा कि उन्हें इससे न तो कोई आपत्ति है न ही कोई रुचि।

वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में शनिवार को पहले दिन का सर्वे पूरा हो चुका है। आज 50% हिस्से का सर्वे हुआ है।
वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में शनिवार को पहले दिन का सर्वे पूरा हो चुका है। आज 50% हिस्से का सर्वे हुआ है।

मोहम्मद शमीम बोले- काशी में नहीं देखा ऐसा माहौल
मशहूर शायर नजीर बनारसी के बेटे मोहम्मद शमीम ने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा के मुरीद वे भी हैं। मगर इस तरह से हिंदू-मुस्लिम टकराव जैसा माहौल, उन्होंने काशी में कभी भी नहीं देखा।

मशहूर शायर नजीर बनारसी के बेटे मोहम्मद शमीम ने कहा कि यह कार्रवाई भावनाएं भड़काने और इलेक्शन का एजेंडा है।
मशहूर शायर नजीर बनारसी के बेटे मोहम्मद शमीम ने कहा कि यह कार्रवाई भावनाएं भड़काने और इलेक्शन का एजेंडा है।

ऐसा लग रहा है कि यह धर्म नहीं, बल्कि चुनाव की तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह सत्ता की हनक है। भावनाएं भड़काने की कोशिश और इलेक्शन का एजेंडा है। उन्होंने अपने वालिद नजीर बनारसी का एक शेर सुनाते करते हुए कहा, 'दुनिया से निराली है 'नजीर' अपनी कहानी अंगारों से बच निकला हूं, फूलों से जला हूं।'

स्थानीय दुकानदार विजय कुमार धानुका ने कहा कि बाबा विश्वनाथ को अपना पुराना घर मिलना ही चाहिए।
स्थानीय दुकानदार विजय कुमार धानुका ने कहा कि बाबा विश्वनाथ को अपना पुराना घर मिलना ही चाहिए।

विजय कुमार ने बताई 50 साल पुरानी बात
स्थानीय दुकानदार विजय कुमार धानुका ने बताया कि वह विश्वनाथ गली में ही पैदा हुए। 50 साल पहले तक वो मस्जिद के फर्श और कुंड के पास बैठकर चिंता से मुक्त समय बिताते थे। मगर, आज मन चिंतित है। हम चाहते हैं कि बाबा को अपना पुराना घर मिलना ही चाहिए।

जो हो रहा है वह बिल्कुल सही है। यह पहले ही हो जाना था। उन्होंने बताया कि बचपन में मस्जिद परिसर में खूब खेला है। उस समय कोई रोक-टोक नहीं होती थी। हम तहखानों तक भी चले जाते थे, हालांकि बंद होने की वजह से अंदर क्या है कभी देखा नहीं।

सर्वे पूरा होने के बाद चौक मार्ग पर आते-जाते श्रद्धालु और आमजन।
सर्वे पूरा होने के बाद चौक मार्ग पर आते-जाते श्रद्धालु और आमजन।

बाबरी ढांचा गिरने के बाद बढ़ा विवाद
एक स्थानीय निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि तथाकथित मस्जिद के अंडरग्राउंड वाली जगह पूरा ही तहखाना है। 1975 से 88 तक बचपन में खेल-खेल में वे तहखानों तक पहुंच जाते थे। पुलिस का एक भी सिपाही नहीं होता था। कहा कि बाबरी ढांचा ढहाने के बाद देशभर में विवाद बढ़ा और सबसे पहले ज्ञानवापी मस्जिद की सुरक्षा बढ़ाते हुए आवाजाही बंद कर दी गई।

नौकरी के बजाय मंदिर-मस्जिद
आज सर्वे के पहले दिन चौक से मैदागिन तक हर-हर महादेव और जय श्री राम के नारे गूंजे। वहीं मुस्लिम समाज के लोगों में एक असंतोष की भावना थी। उन्हें यह काम राजनीति से प्रेरित लग रहा था। समाज के लोगों ने कहा कि गड़े मुर्दे उखाड़कर मुद्दा बनाया जा रहा और बेरोजगार लोग नौकरी के बजाय मंदिर-मस्जिद के मामले में व्यस्त हो रहे हैं। हालांकि, जब उन्हें बताया गया कि यह मामला तो कोर्ट ने उठाया है, इसके बाद उन्होंने काेई जवाब नहीं दिया।

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