वाराणसी का शिवपुर दिल्ली-NCR की तरह प्रदूषित:दिवाली के बाद 8 गुना खराब रही काशी की हवा; रविंद्रपुरी सबसे साफ- देखें शहर के 10 स्थानों का हाल

वाराणसी21 दिन पहले
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वाराणसी के 10 स्थानों के हवा का हाल कुछ इस प्रकार से रहा। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के 10 स्थानों के हवा का हाल कुछ इस प्रकार से रहा।

इस दिवाली वाराणसी के शिवपुर (798 यूनिट प्रति घनमीटर) इलाके का हाल दिल्ली-NCR की तरह से रहा। यह क्षेत्र दिवाली के बाद भयानक धुंध में डूब गया। इसके बाद सोनारपुरा, पांडेयपुर और मैदागिन शहर के सबसे प्रदूषित इलाके रहे।

पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था क्लाइमेट एजेंडा ने दिवाली के बाद वाराणसी में प्रदूषण के स्तर की जांच की तो उसमें इस तरह की जानकारी सामने आई।

कोविड रोगियों पर पड़ेगा खतरनाक असर

इस रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी की हवा दिवाली के बाद भारत सरकार के मानक से 8 गुना तक प्रदूषित हो चुकी है। कोविड से उबरने वाले लोगों के फेफड़ों पर इसका काफी घातक असर पड़ने वाला है।

PM10 और PM2.5 कणों की 7-8 गुना रही हवा में मौजूदगी

संस्था की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि शहर में 10 जगहों पर हवा की क्वालिटी की मॉनिटरिंग हुई। इसमें वाराणसी के मुख्य प्रदूषक तत्वों में PM10 और PM2.5 कणों की हवा में 7-8 गुना मौजूदगी पाई गई। उन्हाेंने कहा कि इस तरह के आंकड़े और प्रशासनिक सुस्ती यह सिद्ध करते हैं कि जिला प्रशासन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे गंभीर समस्या नहीं मानता है। वेस्ट मैनेजमेंट में कमी की वजह से आम आदमी खुले में कचरा जलाने को मजबूर हैं। नियमों के कडाई से पालन के अभाव में आम जनता प्रदूषित आबोहवा में सांस लेने को मजबूर है।

दिवाली की रात 2 बजे से सुबह 8 बजे तक चेक की गई हवा

हवा में प्रदूषण के आंकड़ों को दिवाली की रात 2 बजे से सुबह 8 बजे के बीच जुटाया गया है। एयर क्वालिटी चेक करने वाली मशानों को शहर के 10 स्थानों पर इंस्टाल कर दिया गया था। वाराणसी में प्रदूषकों की जो भारी मात्रा दर्ज की गई है वह भारत सरकार के अनुमन्य स्तर की तुलना में 8 गुना अधिक है। इस सर्वे में वाराणसी का रविंद्रपुरी पहला और लंका दूसरा सबसे साफ इलाका रहा। एकता शेखर कहती हैं कि पटाखों से शहर वासियों के प्यार ने बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया। कोविड और COPD रोग का दंश झेल चुके लोगों का फेफड़ा पहले ही कमजोर हो चुका है।

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