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ज्ञानवापी-सर्वे मामले में सुनवाई खत्म:पैरोकार डॉ. सोहनलाल आर्य बोले- आज फिर बहस होगी, अदालत के आदेश के बाद स्पष्ट होगा कि आगे क्या होना है

वाराणसी2 महीने पहले

वाराणसी में मां शृंगार गौरी से जुड़े ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से संबंधित मुकदमे में पहले दिन की सुनवाई खत्म हो गई है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे हैं। वहीं, एडवोकेट कमिश्नर को बदलने वाली मांग पर सुनवाई कल यानी 10 मई को होगी। अब तक हुए सर्वे की रिपोर्ट भी मंगलवार को अदालत में रखी जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में गहमा-गहमी भी रही।

केस दाखिल करने वाली महिलाओं के पैरोकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा कि अदालत में वादी, प्रतिवादी और एडवोकेट कमिश्नर ने अपना-अपना पक्ष रखा। लंबी बहस हुई है। कल फिर बहस होगी, तब जाकर अदालत के आदेश के बाद स्पष्ट होगा कि इस मसले में आगे क्या होना है।

वादी पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि हमारी ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया है
वादी पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि हमारी ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया है

वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि हमारी ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया है। हमारे विपक्षी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा कि एडवोकेट कमिश्नर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए उनके स्थान पर किसी अन्य को कमिश्नर नियुक्त किया जाए।

हमने अपना लिखित स्टेटमेंट अदालत को दे दिया है। दोनों ही मसलों पर कल सुनवाई के दौरान बहस होने के बाद अदालत का फैसला आएगा। जब तक इस बिंदु का निस्तारण नहीं हो जाता है तब तक एडवोकेट कमिश्नर भी अपनी रिपोर्ट नहीं पेश करेंगे। कारण कि, अभी सर्वे नहीं पूरा हुआ है।

दरअसल, सर्वे के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र पर आपत्ति जताते हुए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने 7 मई को अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। कमेटी का कहना है कि एडवोकेट कमिश्नर सर्वे का काम निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह पार्टी की तरह काम कर रहे हैं। इसलिए अदालत कोई और कमिश्नर नियुक्त करे।

मसाजिद कमेटी के इस प्रार्थना-पत्र पर अदालत ने वादी और एडवोकेट कमिश्नर को उनका पक्ष दाखिल करने के लिए कहा है। इसके बाद इस संबंध में अदालत अपना निर्णय सुनाएगी।

अधिवक्ता शिवम गौड़ ने कहा कि आज अदालत में होने वाली सुनवाई में ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर जाकर सर्वे की मांग की जाएगी।
अधिवक्ता शिवम गौड़ ने कहा कि आज अदालत में होने वाली सुनवाई में ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर जाकर सर्वे की मांग की जाएगी।

जितेंद्र बिसेन खुद को अलग-थलग होता देख बयानों से पलटे
मां श्रृंगार गौरी प्रकरण की वादिनी राखी सिंह भी अन्य चार महिलाओं की तरह अब अपना केस वापस नहीं लेंगी। यह बात उनके अधिवक्ता शिवम गौड़ ने दीवानी कचहरी में सोमवार दोपहर स्पष्ट किया है। जितेंद्र सिंह बिसेन खुद को अलग-थलग होता देख 24 घंटे बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। रविवार के अपने मैसेज और फोन पर हुई बातचीत पर सोमवार को बिसेन ने यू-टर्न लिया।

वाराणसी में कहा कि मीडिया ने मेरे मैसेज का गलत अर्थ निकाला है। हालांकि वह चौबीस घंटे तक मोबाइल बंद कर चुप क्यों रहे, इस पर वह कोई सटीक जवाब नहीं दे पाए। बिसेन का फोन पर दिया गया यह बयान सामने आने के बाद लोग उनकी तलाश करते रहे, लेकिन उनका पता नहीं चल सका।

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अगस्त 2021 में इन महिलाओं ने मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी।
अगस्त 2021 में इन महिलाओं ने मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी।

7 मई को रुक गया था सर्वे

कोर्ट के आदेश पर नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में 6 मई की दोपहर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे शुरू किया था। पहले ही दिन सर्वे को लेकर हंगामा और नारेबाजी हुई थी। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि एडवोकेट कमिश्नर निष्पक्ष तरीके से नहीं बल्कि पार्टी बनाकर सर्वे करा रहे हैं।

7 मई की दोपहर सर्वे का काम फिर शुरू हुआ। वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि तकरीबन 500 से ज्यादा मुस्लिम मस्जिद में मौजूद थे और उन्हें सर्वे के लिए वहां अंदर नहीं जाने दिया गया। इस वजह से वह सर्वे छोड़ कर जा रहे हैं और अब अपना पक्ष 9 मई को अदालत में रखेंगे।

यह फोटो सर्वे के पहले दिन यानी 7 मई की है। उस दिन सर्वे को लेकर हंगामा हुआ, पुलिस ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया था।
यह फोटो सर्वे के पहले दिन यानी 7 मई की है। उस दिन सर्वे को लेकर हंगामा हुआ, पुलिस ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया था।

अगस्त-2021 में दाखिल किया गया था केस

विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन के नेतृत्व में राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में अगस्त-2021 में मुकदमा दाखिल किया था। अदालत से मांग की थी कि मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मिले। इसके साथ ही ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के सुरक्षा की मांग भी अदालत से की गई थी।

इस मुकदमे में प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार जरिए मुख्य सचिव सिविल, DM वाराणसी, पुलिस कमिश्नर वाराणसी, अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के मुख्य प्रबंधक और बाबा विश्वनाथ ट्रस्ट के सचिव को बनाया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर 10 मई को रिपोर्ट तलब की है।

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