यहीं PM ने डुबकी लगाई थी, वहीं आज गंगा बेहाल:ललिता घाट पर लगा कूड़े का अंबार, नगवां में सीधा मिल रहा है पानी में सीवेज

वाराणसी4 महीने पहलेलेखक: हिमांशु अस्थाना

वाराणसी में गंगा मैली हो चुकी हैं, बहुत पहले से। आज के लिए यह कोई नई बात नहीं कही जा रही है। मगर, गंगा की स्वच्छता पर काम करने वाली मशीनरी स्मार्ट सिटी, नमामि गंगे, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शिथिलता भी किसी को रास नहीं आ रही है। मंगलवार को आई गंगा की रिपोर्ट के अनुसार, अपस्ट्रीम और ललिता घाट पर DO (पानी में घुलनशील ऑक्सीजन) 10 से ऊपर है।

यह डाटा बताता है कि पानी बिल्कुल साफ है। मगर, ग्राउंड पर हकीकत भयावह है। गंदगी की बड़ी वजह है घाट के रेनोवेशन से निकले गारबेज का गंगा में मिलना, मसान के माला-फूल व प्लास्टिक और तीसरा डीजल इंजन की नावें।

सबसे पहले वाराणसी के उस घाट की बात करेंगे, जहां पर हाल ही में PM नरेंद्र मोदी ने स्नान किया था। उस रोज की निर्मल गंगा आज फिर से पूरी तरह मैली हो चुकी है। इस घाट के पास नगवां में नाले का पानी गिर रहा है। 13 दिसंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण के पहले PM मोदी ने ललिता घाट पर डुबकियां लगाईं थी। धाम के पीछे स्थित इस घाट के आसपास फिर से गंदगी और कूड़े-कचरे का अंबार लग चुका है।

रविदास घाट पर देखें गंगा-सीवेज का मैला संगम:वाराणसी में नगवां ट्रीटमेंट प्लांट से अभी भी शहर का मल-मूत्र गंगा में हो रहा विसर्जित

वाराणसी के ललिता घाट पर गंगा के पानी में जमा काई।
वाराणसी के ललिता घाट पर गंगा के पानी में जमा काई।

आनन-फानन में तैयार कराए गए VVIP घाट पर भी फूल-माला का कचरा पानी में बह रहा है। हालांकि यहां पर घाटों के रिनोवेशन का काम चल रहा है और बगल में मणिकर्णिका घाट भी स्थित है, जिसकी वजह से काफी कूड़ा-करकट ललिता घाट पर इकट्ठा हो रहा है। मसान के पास जलती लाशों के पास से माला-फूल, कफन और अन्य सामग्रियां भी ललिता घाट पर उतराती रहती है। वहीं, इन घाटों की भोगौलिक स्थिति ऐसी है कि पानी मणिकर्णिका घाट से लड़कर वापस ललिता घाट पर आ जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ललिता घाट पर बने इसी VVIP घाट पर स्नान किया था। आज रेनोवेशन के कारण इसकी हालत दयनीय हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ललिता घाट पर बने इसी VVIP घाट पर स्नान किया था। आज रेनोवेशन के कारण इसकी हालत दयनीय हो गई है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को जारी किया नोटिस
वाराणसी के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया ललिता घाट पर गंगा के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 10 से ऊपर है। अर्थात पानी में कोई केमिकल या जैविक प्रदूषण की समस्या नहीं है। यह निर्माण काम चलने की वजह से गंदगी हुई है।

वाराणसी के ललिता घाट पर गंगा के पानी में कूड़ा-करकट साफ दिखाई दे रहा है।
वाराणसी के ललिता घाट पर गंगा के पानी में कूड़ा-करकट साफ दिखाई दे रहा है।

कालिका सिंह ने कहा कि जिम्मेदारों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि दैनिक भास्कर की खबर को संज्ञान में लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को नोटिस जारी किया है।- 'बायोरेमेडेशन करके ही गंगा में छोड़ा जाए। यानी कि गंदे जल को सीधे न प्रवाहित करे। नाले के पानी का उपचार करने के बाद ही गंगा में छोड़े।

जो भी नियम-कानून कानून का उल्लंघन करेगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अस्सी के पास नगवां पंपिंग प्लांट से सीधे करीब 50 MLD दूषित मलजल गंगा में प्रवाहित हो रहा है। उसको रोकने का कोई उपाय सरकार के पास नहीं है। यहां पर अस्सी नाले से 100MLD तक सीवेज जल आता है, जिसमें से 50MLD रमना STP में भेज दिया जाता है'। इसी पर दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।

वाराणसी के ललिता घाट से गंदगी को निकालता नगर निगम का सफाई कर्मचारी।
वाराणसी के ललिता घाट से गंदगी को निकालता नगर निगम का सफाई कर्मचारी।

CNG बोट न होने से गंगा में मिल रहा जहरीला धुआं
डीजल बोट से निकला जहरीला धुआं गंगा के पानी को खराब बना रहा है।

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पास धुआं छोड़ती नांव, जो पानी को बना रहा खतरनाक।
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पास धुआं छोड़ती नांव, जो पानी को बना रहा खतरनाक।

अस्सी से लेकर राजघाट तक नांव से निकलता धुआं आम बात हो चुकी है। स्मार्ट सिटी की ओर से गंगा में CNG बोट चलाने का फैसला पिछले साल ही ले लिया गया था। मगर, अब तक गंगा के पानी में यह प्लान पूरी तरह से नहीं उतर पाया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि CNG की नाव चल रही है, मगर अभी काफी नाव में तकनीकी कारणों के चलते CNG इंजन इंस्टॉल नहीं हो सका है।

ललिता घाट के सामने पानी में जमा ईंट-पत्थर
ललिता घाट के सामने पानी में जमा ईंट-पत्थर