10 मिनट की बारिश के बाद बढ़ गई गर्मी:वाराणसी का अधिकतम तापमान पहुंचा 40.5°C पर; शहर का AQI 51 अंक पर

वाराणसी5 दिन पहले
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बुधवार की बारिश के बाद से वाराणसी के तापमान में 2°C की बढ़ोतरी देखी जा रही है।  - Dainik Bhaskar
बुधवार की बारिश के बाद से वाराणसी के तापमान में 2°C की बढ़ोतरी देखी जा रही है। 

वाराणसी में कल शाम 10 मिनट की बारिश के बाद आज गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। जिले का अधिकतम तापमान 40.5°C दर्ज किया गया। वहीं आज तड़के सुबह वाराणसी का न्यूनतम तापमान 26.5°C तक गया था। यह भी सामान्य तापमान से 2°C ज्यादा ही था। बुधवार की बारिश के बाद से वाराणसी के तापमान में 2°C की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

हवा की स्पीड भी कम होकर 6 किलोमीटर/ घंटे पर आ गई है। वहीं मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अब वाराणसी में बारिश के भी कोई आसार दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। मौसम विज्ञान विभाग ने भी अब बारिश की भविष्यवाणी के आंकड़ों को वेबसाइट से हटा दिया है। बता दें कि बीते कई दिनों से मौसम विज्ञान विभाग अलर्ट जारी कर संकेत दे रहा था कि वाराणसी में सप्ताह भर बादल घिरे रहेंगे और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

वाराणसी के वातावरण में बढ़ती हुई नमी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। इस समय 65% से ज्यादा ह्यूमिडिटी होने की वजह से लोग पसीने से तर-बरत होते जा रहे हैं। दोपहर की धूप के साथ हवा की नमी भाप की तरह से तन-बदन को जला रही है। पूरे दिन शहर की सड़कों और बिल्डिंग से तेज आंच निकल रही है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि माैसम सुहाना होने में अभी कुछ वक्त लगेगा। फिलहाल, तापमान बढ़ने की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

वाराणसी​​​​​​ में AQI 51 अंक पर
वाराणसी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) आज 51 अंक पर है। बुधवार को भी यह इतना ही था, जबकि मंगलवार को यह 63 अंक पर था। शहर की हवा 'अच्छी' कटेगरी से एक अंक दूर 'संतोषजनक' की कटेगरी में है। आज वाराणसी का सबसे कम प्रदूषित इलाका रहा BHU, जहां का AQI 45 अंक दर्ज किया गया। वहीं, इसके बाद अर्दली बाजार में 55 अंक और भेलूपुर में 54 अंक तक गया। वहीं मलदहिया के आंकड़े आज नहीं मिले हैं।

गंगा का जलस्तर 58.62 मीटर
बीते तीन दिनों से गंगा का जलस्तर 58.62 मीटर पर आ गया है। गंगाजल दिनों दिन सूखती जा रहीं हैं। रामनगर से लेकर संत रविदास घाट तक रेत के बड़े-बड़े टीले दिखाई पड़ने लगे हैं। वहीं किनारों पर काफी बड़े एरिया में रेत का अंबार लग गया है।