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  • Vedic Science Should Be Included In Primary Education, Only Then Scientific Understanding Will Increase, Said Varanasi based BHU Professors; In The Czech Republic And Russia, Vedas Mean Irrefutable Truth.

वैदिक विज्ञान केंद्र के तीसरे स्थापना दिवस पर जुटे विद्वान:BHU के प्रोफेसरों ने कहा- चेक गणराज्य और रूस में वेद का अर्थ होता है 'अकाट्य सत्य'

वाराणसी4 महीने पहले
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वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैदिक विज्ञान केंद्र का तीसरा स्थापना दिवस मनाया गया। - Dainik Bhaskar
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैदिक विज्ञान केंद्र का तीसरा स्थापना दिवस मनाया गया।

वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैदिक विज्ञान केंद्र का तीसरा स्थापना दिवस शनिवार को मनाया गया। षोडशोपचार पूजन और गणपति सहस्त्र नाम के साथ गणेशार्चन हुई। इस दौरान BHU के प्रोफेसरों ने बताया कि चेक गणराज्य और रूस में वेद का अर्थ होता है 'अकाट्य सत्य'।

इसके बाद देश भर के वैदिक विद्वानों की एक संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें वेद और आधुनिक जीवन के संबंधों पर चर्चा की गई। वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने AICTE को भेजे गए शोध प्रस्तावों के बारे में जानकारियां दी।

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि वेद के वैज्ञानिकता समझने के लिए प्राथमिक शिक्षा से ही वैदिक विज्ञान की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने वैदिक विज्ञान केंद्र द्वारा भविष्य में संचालित किए जाने वाले पाठ्यक्रमों वैदिक योग विज्ञान, वैदिक प्रौद्योगिकी, वैदिक गणित और वैदिक विधि शास्त्र की प्रासंगिकता बताई। BHU में संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. कमलेश झा ने वेद और तंत्र पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वेद ज्ञान है, वहीं तंत्र विज्ञान है। वेद नित्य ज्ञान का भंडार है।

अभियांत्रिकी अध्ययन के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना

वेद विभाग के मनोन्नत आचार्य प्रोफेसर हृदय रंजन शर्मा ने कहा महामना ने संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के साथ ही बीएचयू में विज्ञान और अभियांत्रिकी अध्ययन के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की। इसका उल्लेख हमें शांतिस्वरूप भटनागर की ओर से लिखित बीएचयू कुलगीत की पंक्ति प्रतीची व प्राचि का मेल सुंदर में मिलता है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से वैदिक विज्ञान केंद्र भी वेदों में बताए विज्ञान से मानव की जरूरतों को पूरा करने की आगे बढ़ रहा है। वेद अपौरुषेय है, जो कि शुरूआत में भाषा और लिपि के रूप में नहीं बल्कि प्राणरूप ध्वनि रूप में था। इस स्थापना दिवस पर देश भर के विद्वानों में प्रो. आशाराम त्रिपाठी, प्रो. सुमन जैन, प्रो. विंध्याचल पांडेय और प्रो. मुकुट मणि त्रिपाठी आदि शामिल हुए।

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