वाराणसी...पिकअप हादसे की कहानी घायलों की जुबानी:दुर्घटना के शिकार बोले- जब तक जिएंगे, यह दिवाली कभी नहीं भूलेंगे

वाराणसी8 महीने पहले
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वाराणसी में पिकअप हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया तो अफरातफरी का माहौल था। - Dainik Bhaskar
वाराणसी में पिकअप हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया तो अफरातफरी का माहौल था।

वाराणसी में डाफी बाईपास पर गोकुल ढाबे के पास बुधवार को तेज रफ्तार पिकअप डिवाइडर पर चढ़ कर पलट गई। इस हादसे में 4 महिलाओं की मौत हो गई। इसके अलावा 19 घायलों में एक महिला समेत 2 लोगों की हालत नाजुक बनी है। प्राथमिक उपचार के बाद भी पिकअप सवार घायल घंटों दहशत के साए में दिखे। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भी कोई कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं था।

प्राथमिक उपचार और आराम के बाद सामान्य प्रतीत हो रहीं पिकअप सवार 2 महिलाओं समेत 3 लोगों से दैनिक भास्कर ने बात की। उनका यही कहना था कि त्योहार मनाने घर जा रहे थे। लेकिन, अब क्या बताएं कि यह सब क्या हो गया। जो भी सोचा था, वह सब कुछ धरा रह गया। अब जब तक जिएंगे, यह दिवाली कभी नहीं भूलेंगे...।

हादसे में घायल सुदामा।
हादसे में घायल सुदामा।

पेट की आग परदेश ले जाती है साहब

बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदपुर निवासी सुदामा पिकअप हादसे में घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि पेट की आग परदेश ले जाती है साहब...। घर से आए 2 महीने से ज्यादा हो गया था। दिवाली और छठ पूजा के लिए घर जा रहे थे। गाड़ी तो कल से ही चल रही थी। निश्चित तौर पर उसमें लोगों के साथ ही सामान भी ज्यादा ही था।

आज हमें घर पहुंच जाना था। लेकिन नींद में ही न जाने क्या हो गया कि हाईवे से सीधे अस्पताल पहुंच गए। ड्राइवर को नींद लग रही थी, तो बता देना चाहिए था। साथ ही थोड़ी देर आराम कर लेना चाहिए था। अब क्या बताएं कि क्या तैयारी थी और क्या सोच रखा था। लेकिन क्या हो गया। जो कुछ हुआ, वह अच्छा नहीं हुआ। यह दिवाली हमें कभी नहीं भूलेगी।

अपने बच्चे को सीने से चिपका कर अस्पताल में लेटी हुई अनीता।
अपने बच्चे को सीने से चिपका कर अस्पताल में लेटी हुई अनीता।

जान बच गई, लेकिन भरोसा नहीं था कि जिंदा हूं

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में सीने से अपने बच्चे को चिपका कर अनीता लेटी थी। उसने कहा कि छोटी सी गाड़ी में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। गाड़ी जब पलटी, तो ज्यादातर लोग नींद में थे। हादसे में जान तो बच गई। लेकिन भरोसा नहीं हो रहा था कि हम जिंदा हैं। आधे लोग तो गाड़ी पर और आधे लोग उसके ऊपरी हिस्से में लकड़ी के पटरे पर बैठे थे।

घर जाकर दिवाली का सामान खरीदना था और तैयारी करनी थी। फिर छठ पूजा को भी भला कितने दिन बचे हैं? उसकी भी तैयारी करनी थी। लेकिन सब कुछ बिखर गया। लीलावती, रूपा, अंशू और कौशल्या चंद घंटे पहले हमारे साथ ही थीं। अब वह जिंदा ही नहीं हैं। कुछ गलती ऐसी हुई होगी कि भगवान ने यह सजा दी होगी। क्या करें, घर के पास आसानी से काम मिल जाता तो भला क्यों इतनी दूर जाते।

हादसे में घायल हुई पूजा।
हादसे में घायल हुई पूजा।

बहुत सारा सामान था, न जाने कहां गया

हादसे में घायल पूजा भी बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। उसने कहा कि हम सब मौत के मुंह से लौट कर आए हैं। गाड़ी आराम से चल रही थी। अचानक तेज आवाज के साथ कुछ देर तक समझ में ही नहीं आया कि हुआ क्या है। चीख-पुकार के बीच कुछ देर बाद होश आया, तो पता लगा कि हम जिंदा हैं। अब अस्पताल में हैं।

हम सब रोज कमाने और खाने वाले लोग हैं। दिवाली और छठ पूजा के लिए घर जा रहे थे। बहुत सारा सामान भी हमने खरीदा था। पता नहीं सामान कहां चला गया। अब दिवाली और छठ पूजा भला क्या मनाएंगे और क्या बताएंगे। भगवान की कृपा थी कि उन्होंने हमें मरने से बचा लिया। लेकिन हमारे साथ की चार सहेलियां तो अब नहीं रहीं। हे भगवान...ऐसा किसी और के साथ न करना...।