3 फीट नीचे गड्ढे में बैठ नहीं बुनेंगे बनारसी साड़ी:वाराणसी में पहली बार वीवर वेलफेयर की शुरूआत; हैडलूम इंडस्ट्री से जुड़ेंगे यूथ

वाराणसी3 महीने पहले
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वाराणसी के रामनगर में बने वीवरशाला में बुनकरों के लिए सुविधाजनक हॉल तैयार किए गए हैं। उन्हें फ्रेम लूम और सुविधाजक बेंच-कुर्सियां दी गईं हैं। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के रामनगर में बने वीवरशाला में बुनकरों के लिए सुविधाजनक हॉल तैयार किए गए हैं। उन्हें फ्रेम लूम और सुविधाजक बेंच-कुर्सियां दी गईं हैं।

शताब्दियों से बनारसी साड़ी की बादशाहत आज भी पूरी दुनिया में कायम है। मगर, बनारस में उसे बुनने वाला बुनकर एक काल कोठरी की 3 फीट नीचे गड्ढे में बैठकर 18-18 घंटे काम करता है। एक ही तरह का काम करके वह 15-20 दिन में बनारसी साड़ी तैयार कर पाता है। बुनकर बाप की यह बदतर स्थिति देख बेटा बुनकरी में आना ही नहीं चाहता। क्योंकि आज उसे न तो आर्टिस्ट, न बिजनेस मैन और न ही कर्मचारियों वाले अधिकार मिलते हैं।

बनारस के हैंडलूम कारखानों में अभी भी बुनकर पारंपरिक तौर पर गड्ढे में बैठकर काम करते हैं।
बनारस के हैंडलूम कारखानों में अभी भी बुनकर पारंपरिक तौर पर गड्ढे में बैठकर काम करते हैं।

इसी समस्या को खत्म करने के लिए वाराणसी में बुनकर वेलफेयर और बुनकरों को संगठित करने पर पहली बार काम हुआ है। साथ ही युवा बुनकरों को बनारसी साड़ी उत्पादन में प्रोत्साहित करने के लिए वाराणसी के रामनगर में एक 'वीवरशाला: नई कृति, जिसमें बसे संस्कृति’की शुरूआत हुई है।

बुनकरों की बदतर हालात पर वाराणसी में मॉर्डन फैसलिटी दी जा रही है।
बुनकरों की बदतर हालात पर वाराणसी में मॉर्डन फैसलिटी दी जा रही है।

बुनकरों को फ्रेम लूम, आरामदेह कुर्सी-बेंच और आकर्षक हॉल की सुविधा दी गई है। उत्तर प्रदेश में पहली बार बनारस ने बुनकर वेलफेयर पर कुछ बेहतर काम किया है। यह एक तरह स्मार्ट ट्रेनिंग रूम भी होगा।

बनारसी साड़ी। प्रतीकात्मक तस्वीर
बनारसी साड़ी। प्रतीकात्मक तस्वीर

जहां पर कपड़ों में ट्रेंडिंग डिजाइन और मॉडल को बनाने के लिए ट्रेडिशनल बुनकरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। टाइटन की कंपनी तनैरा ने रामनगर स्थित दो पार्टनर अंगिका हाथकरघा विकास उद्योग सहकारी समिति लिमिटेड और आदर्श सिल्क बुनकर सहकारी समिति लिमिटेड के साथ मिलकर इस काम को शुरू किया है।

वाराणसी में बनी वीवरशाला।
वाराणसी में बनी वीवरशाला।

इस तरह के होंगे बदलाव

  • बेसिक फैसलिटीज को अपग्रेड कर काम के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाएगा।
  • बुनकरों को नई तकनीक पर जानकारी दी जाएगी।
  • असंगठित वीविंग यूनिट्स को एक टीम की तरह से तैयार किया जाएगा।
  • समय से सैलरी मिलने के साथ ही, अन्य तमाम भुगतान भी कर दिए जाएंगे।
  • आगे चलकर बुनकरों के बच्चों की पढ़ाई का भी जिम्मा संभाला जाएगा।
  • बुनकरों के वेलफेयर पर खर्च कर 20% ज्यादा आउटपुट पा सकंगे।
अमरेश कुशवाहा।
अमरेश कुशवाहा।

हैंडलूम सेक्टर होगा ऑर्गेनाइज्ड
अमरेश प्रसाद ने कहा कि बुनकरों के स्वास्थ्य, सुविधा और शिक्षा पर इनवेस्ट करने से हैंडलूम सेक्टर ऑर्गेनाइज्ड हो जाएगा। इसके बाद उनके लिए हर एक योजना आसानी से अमल में लाई जा सकती है। ‘वीवरशाला’ के माध्यम से बुनकरों को काम के लिए सुरक्षित और अनुकूल माहौल होगा।

हैंडलूम से विमुख हो रहे युवा

युवा बुनकरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जो कई कारणों से बुनाई के व्यवसाय को छोड़ चके हैं। हाथ से बुनी बनारसी साड़ियों को बढ़ावा देने के लिए समिति बुनकरों और उनके बच्चों को शिक्षित कर रही है। आदर्श बुनकर सहकारी समिति लिमिटेड के संस्थापक जगन्नाथ प्रसाद ने बताया कि हाथ से बुनी बनारसी साड़ियों की भव्यता और गुणवत्ता को बनाने के साथ ही उत्पादन को बेहतर करने में वीवरशाला काफी हेल्पफुल रहेगी।