ज्ञानवापी पर अगली सुनवाई 30 मई को:मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में 2 घंटे दलीलें दी, शिवलिंग के अस्तित्व को नकारा

वाराणसी4 महीने पहले

मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में गुरुवार को वाराणसी की जिला अदालत में सुनवाई हुई। मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया कमेटी के मुकदमा सुनने योग्य नहीं है के प्रार्थना पत्र पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में लगभग दो घंटे तक बहस हुई। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अगली तारीख 30 मई की दोपहर 2 बजे तय की है। उस दिन मुस्लिम पक्ष फिर अपनी बहस शुरू करेगा।

वहीं, वादी यानी हिंदू पक्ष ने बताया कि ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट फोटो-वीडियो के साथ उन्हें शुक्रवार को मिलेगी। उधर, ज्ञानवापी परिसर की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपील की है कि जुमे की नमाज के लिए शुक्रवार को कम संख्या में ही लोग मस्जिद आएं। कारण कि, अदालत के आदेश से वजूखाना और टॉयलेट सील है।

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वादी और प्रतिवादी पक्ष ने क्या कहा...

  • मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने कहा कि शिवलिंग का अस्तित्व कथित है। अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है। अफवाहों से अशांति होती है। ज्ञानवापी प्रकरण प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट-1991 के तहत कवर्ड है। इसलिए यह मुकदमा सुने जाने योग्य नहीं है। अपने तर्क के समर्थन में मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई निर्णयों का हवाला भी दिया। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि वादी को मस्जिद पर दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
  • हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हमारी याचिका के 12 पैराग्राफ तक को कोर्ट में पढ़ा गया है। अभी उनकी दलीलें जारी रहेंगी। हमने अपनी आपत्ति अदालत में दाखिल कर दी है। उनकी दलीलें जब खत्म हो जाएंगी तो हम अपनी बहस शुरू करेंगे।

विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने त्यागा अन्न

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने अन्न का त्याग कर दिया है। डॉ. कुलपति तिवारी ने गुरुवार की सुबह 'दैनिक भास्कर' से कहा कि ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार जब तक उन्हें नहीं मिल जाता है, तब तक वह अन्न नहीं ग्रहण करेंगे।

डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि वह अपने घर में रह कर फलाहार करते रहेंगे।
डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि वह अपने घर में रह कर फलाहार करते रहेंगे।

पूर्व महंत ने कहा कि वह अपने बारे में उड़ाई जा रही अफवाह से आहत हैं। कुछ लोग सुनियोजित तरीके से अफवाह उड़ा रहे हैं कि ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा के अधिकार के लिए उन्होंने जो याचिका दाखिल की थी, वह वापस ले ली है। जबकि, ऐसा कुछ नहीं है। सब कुछ ठीक रहा तो आज जिला जज की अदालत में उनकी याचिका पर सुनवाई होगी।

यहां पढ़ें - विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने त्यागा अन्न: कुलपति बोले- ज्ञानवापी के शिवलिंग की पूजा करने दें, याचिका वापस लेने की उड़ाई जा रही अफवाह

मसाजिद कमेटी ने जनवरी में दाखिल की थी आपत्ति

मां शृंगार गौरी से संबंधित मुकदमा पांच महिलाओं ने सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में 18 अगस्त, 2021 को दाखिल किया था। सुनवाई के क्रम में प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने जनवरी महीने में कोर्ट में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजंस) एक्ट, 1991 का हवाला देते हुए कहा था कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है।

ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली पत्थर की इस संरचना को लेकर एक पक्ष का दावा है कि यह शिवलिंग है। दूसरे पक्ष का दावा है कि यह फव्वारा है।
ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली पत्थर की इस संरचना को लेकर एक पक्ष का दावा है कि यह शिवलिंग है। दूसरे पक्ष का दावा है कि यह फव्वारा है।

कमेटी के अनुसार, उनकी अपील को खारिज कर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दे दिया था। मसाजिद कमेटी ने सर्वे आदेश के खिलाफ बीती 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को आदेश दिया कि मसाजिद कमेटी द्वारा ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र पर जिला जज सुनवाई करें कि मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं है।

(यहां क्लिक कर सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश पढ़ें।)

जिला जज की अदालत में आज होने वाली सुनवाई के बाद मुकदमे की आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तय होगी।
जिला जज की अदालत में आज होने वाली सुनवाई के बाद मुकदमे की आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तय होगी।

नया मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट को ट्रांसफर

ज्ञानवापी प्रकरण में बीती 24 मई को एक नया मुकदमा भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान के नाम से विश्व वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय महामंत्री किरण सिंह ने दाखिल किया। 25 मई को यह मुकदमा जिला जज के आदेश से फास्ट ट्रैक कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया। इस मुकदमे की सुनवाई 30 मई को होगी।

4 में 1 एप्लिकेशन पर मिली 2 जून की डेट

  • फौजदारी के अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित 7 नामजद और 200 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग कोर्ट से की थी। उनका कहना है कि ज्ञानवापी प्रकरण पर नेताओं ने अनावश्यक बयान देकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। साथ ही, मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बावजूद वहां लोगों ने हाथ-मुंह धोया और कुल्ला किया। इससे भगवान शिव के भक्तों को अपार कष्ट हुआ है। ACJM पंचम उज्ज्वल उपाध्याय की कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश देकर सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख नियत की थी। हरिशंकर पांडेय ने साक्ष्य पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने सुनवाई के लिए 2 मई की डेट तय की है।
  • श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने जिला जज की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। उनका कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद में आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग मिला है। अकबर के शासनकाल के समय से उनके पूर्वज बाबा विश्वनाथ की पूजा करते चले आ रहे हैं। इसलिए ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की नियमित पूजा, स्नान, शृंगार और भोग-राग का अधिकार उन्हें दिया जाए।
  • ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने की मछलियों को अन्यत्र शिफ्ट करने व नमाजियों के टॉयलेट आदि की व्यवस्था की DGC की मांग के साथ ही वादी महिलाओं द्वारा वजूखाने में मिले शिवलिंग के नीचे की जगह को तोड़ कर एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के अनुरोध पर भी अदालत अपना आदेश सुना सकती है।
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