साइकिल यात्रियों का काशी में स्वागत:वाराणसी में पं. दीनदयाल संगोष्ठी में बोले भाजपा के सह प्रभारी; काशी का चिंतन ही अंत्योदय

वाराणसी8 महीने पहले
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BHU के प्रोफेसर हरिहर नाथ त्रिपाठी सभागार में अंत्योदय सम्मान और संगोष्ठी की शुरूआत करते भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा। - Dainik Bhaskar
BHU के प्रोफेसर हरिहर नाथ त्रिपाठी सभागार में अंत्योदय सम्मान और संगोष्ठी की शुरूआत करते भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से निकली साइकिल यात्रा दिल्ली से वापस वाराणसी लौट आई है। बनारस स्टेशन पर पहुंचते ही NSS के 17 स्वयंसेवकों का भव्य स्वागत हुआ। स्टेशन पहुंचते ही दल के सदस्याें ने साफ-सफाई का काम किया। राजघाट, नई दिल्ली में अमृत महोत्सव मनाकर लौटे युवाओं ने कहा कि इस यात्रा से उनके भीतर चेतना का प्रसार हुआ।

साइकिल यात्रा 14 दिन तक BHU के मालवीय भवन से राजघाट नई दिल्ली तक निकाली गई थी। साइकिल यात्रियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक और प्लास्टिक की बोतलों को इकट्ठा कर इंसानी बस्ती से दूर डंप किया। इस यात्रा में 900 किमी तक डॉ. बाला लखेंद्र, नीतीश कुमार सुमन, सुभाष सिंह, राहुल कुमार, अभिषेक कुमार, तुषार मोहन, उपेंद्र कुमार, दिव्य प्रकाश पाठक, शुभम कुमार, नवनीत प्रताप सिंह, मनीष कुमार पांडेय, सूर्यभान सिंह ,मोनिश कुमार साह, अमरेश कुमार और आशु कुमार शामिल रहे। वहीं इन युवाओं के स्वागत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अशोक सोनकर, स्वर्णिमा सिंह, साहिल सिंह, धीरज कुमार, रवि करण यादव, राहुल राज अर्जुन, रोहित यादव, हरि प्रिय, रतन कुमार सिंह आद मौजूद थे।

पं. दीनदयाल पर काशी की उदारता रही हावी
BHU के कला संकाय स्थित प्रोफेसर हरिहर नाथ त्रिपाठी सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा अंत्योदय सम्मान और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा ने कहा कि काशी अपने आप में संपूर्ण है। यहां काम करना अपने आप में अद्भुत है। काशी का चिंतन ही अंत्योदय है। पं. दीनदयाल पर काशी की उदारता और सबको एक साथ लेकर चलने की छाप पड़ी थी। पंडित जी के दर्शन और चिंतन से प्रेरित होकर सक्षम व्यक्ति एक दिन में किसी व्यक्ति की मदद करे तो बदलाव खुद ही दिखने लगेंगे। कार्यक्रम में कार्यवाहक कुलपति प्रो. वीके शुक्ला ने कहा कि हम जल्द ही दुनिया के टॉप 500 यूनिवर्सिटी में होंगे। सामाजिक विज्ञान के डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने कहा कि अंत्योदय शब्द नहीं पूरा दर्शन है। इस एक शब्द से अरबों लोगों के जीवनस्तर को बेहतर किया जा सकता है।

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