पहले चुनाव की 7 बड़ी बातें / 'रामू की मां' जैसे 28 लाख नाम पहली वोटर लिस्ट से हटाए गए थे



22 की उम्र में सुकुमार सेन ने इंडियन सिविल सर्विस जॉइन की थी। आजादी के वक्त वे पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी थे। 22 की उम्र में सुकुमार सेन ने इंडियन सिविल सर्विस जॉइन की थी। आजादी के वक्त वे पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी थे।
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22 की उम्र में सुकुमार सेन ने इंडियन सिविल सर्विस जॉइन की थी। आजादी के वक्त वे पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी थे।22 की उम्र में सुकुमार सेन ने इंडियन सिविल सर्विस जॉइन की थी। आजादी के वक्त वे पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी थे।

  • 85% वोटर निरक्षर थे, इसलिए हर उम्मीदवार को मिला एक बैलट बॉक्स
  • पहले चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने देश काे पहली चुनी हुई सरकार दी, 7 चुनौतियों को हराया

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2019, 08:25 AM IST

भास्कर रिसर्च. देश का पहला चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं था। परीक्षा की मुश्किल घड़ी थी। विश्व भारत की तरफ देख रहा था। 1951 में पहले चुनाव का साल आया। ऐसा मुल्क जिसकी 85% आबादी जिसने स्कूल का चेहरा तक नहीं देखा था। जहां महिलाओं की पहचान उनके नाम से नहीं बल्कि पति...के नाम से होती थी। ऐसे देश काे अपनी पहली सरकार चुननी थी। इस मुश्किल काम का जिम्मा मिला सुकुमार सेन को।  देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त। जिन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव का पूरा ढांचा खड़ा किया।

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