मकर संक्रांति विशेष:हल्दी कुंकुम की रस्म में एक-दूसरे का साथ देने का शगुन भी दीजिए

डॉ. मोनिका शर्मा13 दिन पहले
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  • जब बाक़ी सब समझते हुए भी नासमझ बन रहे हों, तब महिलाएं एक-दूसरे को समझने लगें, साथ देने लगें, तो इसे पर्व की महती शुभता मान सकते हैं।

पर्व त्योहारों पर शगुन-सौग़ात देने की रवायत स्नेह बांटने का ही एक तरीक़ा है। मकर सक्रांति के अवसर पर देश के कई हिस्सों में महिलाएं चौदह चीज़ों का शगुन बांटती हैं। इनमें सुहाग सामग्री से लेकर रोज़मर्रा की ज़रूरतों से जुड़े सामान तक शामिल होते हैं। आमतौर पर आस-पड़ोस या रिश्तेदारी में महिलाएं इन वस्तुओं का ‘शगुन’ करती हैं। क्यों ना इस बार अपने परिवेश और परिवार से जुड़ी महिलाओं को शगुन में परवाह का भाव भी दिया जाए। चीज़ें देने के साथ चाहतें पूरी करने में मददगार बनने का वादा किया जाए। हर घर से जुड़ने वाली ऐसी शगुन की डोर ना सिर्फ़ महिलाओं को आपस में मज़बूती से बांध सकती है, बल्कि उनकी ख़्वाहिशों और ख़ैरियत को भी साध सकती है।

मुखरता और साथ का शगुन

अपना आंगन हो या सगे-सम्बंधियों का घर, किसी बहू-बेटी के साथ कोई ज़्यादती हो तो मुखरता अपनाएं। सम्मान को सहेजने वाली ऐसी सौग़ात कई बार जीवन तक सहेज लेती है। इसीलिए घरेलू हिंसा, कन्या भ्रूण हत्या या दहेज की मांग जैसे मामलों में आपका मुखर होकर विरोध जताना किसी महिला का सम्मान, किसी अजन्मी बेटी का जीवन या शादी कर घर बसाने वाली किसी बिटिया का भावी जीवन सहेज सकता है। इतना ही नहीं, आस-पड़ोस हो या अपना घर, किसी वर्किंग वुमन या हाउस वाइफ़ का ज़रूरत पड़ने पर साथ दें। बच्चे संभालने, हॉस्पिटल जाने या देर-सवेर होने पर कोई भी ज़रूरत हो तो हरसंभव मदद देने का वादा करें। नई-सी रीत की लीक पर भरोसे को बढ़ाने वाली यह सबसे प्यारी सौगात होगी।

अपनेपन और सराहना का गिफ्ट

महिलाएं चाहे पड़ोसी हों या सहकर्मी, रिश्तेदार हों या सहेली, एक-दूजे के गुणों की उपेक्षा कर जाती हैं। ज़रा सोचिए कि ख़ुद महिलाएं ही एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाने में कोताही बरतेंगी तो बाक़ी लोग तो उनके गुणों की अनदेखी करेंगे ही। इसीलिए आप सास, ननद, पड़ोसी या सहकर्मी, जिस रिश्ते में भी दूसरी महिला से जुड़ी हैं, उसकी क़ाबिलियत की सराहना करने का गिफ्ट दें। दूसरे घर से आई लड़की हो या कोई नई पड़ोसन, नई जगह, नए माहौल में अपनेपन का उपहार देने का प्रॉमिस करें। यह शगुन नई शुरुआत को स्नेह से तो लबरेज़ रखेगा ही, पुरानी पहचान और रिश्तों को मज़बूती भी देगा। रिश्ते सहेजने वाले इस उपहार से अच्छा शगुन और क्या हो सकता है? तारीफ़ का तोहफ़ा तो अपनेपन को और पोषित करता है। सराहना का शगुन स्त्री मन की डोर को और मज़बूती से बांधता है।

मनोभाव को समझने की सौग़ात

अबके बरस अपने से जुड़ी जिन महिलाओं को शगुन देना चाहती हैं, उन्हें नया सीखने में मदद करें। कोई नई क्लास जॉइन करवा दें। उनकी रुचि से जुड़ी किसी क्लास की जानकारी उन तक पहुंचाएं। उम्र के किसी भी पड़ाव पर हों, उनके मन में नया सीखने को लेकर कोई हिचक हो, तो उसे दूर करें। इससे प्यारी भेंट भी और कोई नहीं हो सकती कि एक स्त्री दूसरी स्त्री के मन की सुने, पीड़ा या ख़ुशी को साझा करे। रिश्तों की औपचारिकता से परे बस एक महिला होने के नाते दूसरी महिला का मन समझने का वादा पूरा परिवेश बदल सकता है। ससुराल में किसी बेटी को ननद के रूप में दोस्त मिल सकती है तो किसी को आस-पड़ोस में खुलकर बतियाने वाली सखी।

सुरक्षा और सम्मान का तोहफ़ा

आज के समय में घर हो या बाहर, महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे में घर में अपने से छोटी बहू-बेटियों को सुरक्षित और सम्माननीय महसूस करने का शगुन दें। परिवार, आस-पड़ोस या अपने परिवेश में बुजु़र्ग महिलाओं को मान का तोहफ़ा दें। बेटियों से उनके सपने पूरे करने में मदद करने का वादा करें। वे अकेले कहीं जाने से घबराती हैं तो उनके साथ चलने की बात कहें। सजग रहते हुए हरदम यह कोशिश करें कि किसी स्त्री को हाशिये पर ना धकेला जाए।

स्पष्टवादिता और दोस्ती की भेंट

वैचारिक रूप से आलोचना करनी हो या व्यक्तित्व की किसी कमी की ओर ध्यान दिलाना हो, खुलकर कहें। स्पष्टवादी व्यवहार का यह रुख़ आपसे जुड़ी किसी महिला को ग़लती करने से रोक सकता है। हकीक़त से रूबरू करवा सकता है। किसी अनजाने ख़तरे से आगाह कर सकता है। यह एक ऐसा गिफ्ट है, जो कमियों को दूर कर मन-जीवन संवारता है। स्पष्टवादिता एक अच्छे और ईमानदार दोस्त का भी सबसे बड़ा गुण होता है।

बेहतर ज़िंदगी और जुड़ाव का शगुन

अपने से जुड़ी महिलाओं को किसी वस्तु के रूप में शगुन देने का रिवाज़ रहा है, अब बेहतर ज़िंदगी और जज़्बाती जुड़ाव सौग़ात के रूप में दें। यह हर उम्र की महिलाओं को प्रोत्साहित करने और सशक्त बनाने के लिए ज़रूरी पहल है। सबसे पहले अपने ही घर और आस-पड़ोस से इस स्नेह भरी रीत की शुरुआत करें। उनकी ख़ुशियों और ख़्वाहिशों के साथ जज़्बाती जुड़ाव बनाएं।

परवाह और प्रेम का उपहार

सबसे बढ़कर उन्हें प्रेम और परवाह का शगुन दें। उनकी राय और इच्छाओं को सुनें। पसंद-नापसंद की बाबत बेझिझक बात करने का मौक़ा दें। बहन, बेटी, मां, भाभी, या आस-पड़ोस में जुड़ाव रखने वाली किसी महिला को यह ज़रूर बताएं कि उनका होना एक नेमत है। यह उन्हें ख़ास महसूस करवाने का सबसे प्यारा तरीक़ा है। प्रेम और परवाह के भाव की सौग़ात प्रोत्साहन और प्रगति का उपहार भी साथ लाती है। अपने परिवार और सामाजिक क्षेत्र से शुरू होने वाली यह दिली सौग़ात जब विस्तार लेती जाएगी, तो समाज की हर स्त्री से लिए बेहतर परिवेश बना सकती है।

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