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ज़रा ध्यान दीजिए:कोरोना का असर मानसिक सेहत पर न पड़े इसलिए इन बातों का ध्यान रखें

डॉ. नेहा दत्तएक महीने पहले
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  • कोराेना नामक वैश्विक महामारी एक मानसिक महामारी में न तब्दील हो पाए इसका ख़्याल हम सबको मिलकर रखना है।

नकारात्मक ख़बरों को ‘ना’

सोशल मीडिया पर नकारात्मक ख़बरें और जानकारी के आदान-प्रदान से बचें। पहला कारण तो यह है कि इससे न आपको कुछ हासिल होगा और न सामने वाले व्यक्ति को। हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति भावनात्मक रूप से इतना मज़बूत न हो और वह आपके द्वारा भेजी गई जानकारी या ख़बर के बारे में सोच-सोचकर परेशानी में आ जाए या उसकी मानसिक सेहत पर बुरा असर हो। साथ ही ऐसे समय में यदि आप अपना दुख और परेशानी भी किसी के साथ बांटना भी चाहते हैं तो पहले यह भी पता कर लें कि सामने वाला व्यक्ति किसी गम्भीर परेशानी या दु:ख से तो नहीं जूझ रहा है। साथ ही बात करते वक़्त आपको यह लगे कि आपकी परेशानी उक्त व्यक्ति पर नकारात्मक असर डाल रही है तब तुरंत बात को बदलने की कोशिश करें।

आपसी व्यवहार रहे स्वस्थ

घर में लम्बे समय तक एकसाथ बने रहने के कारण व्यवहार में चिड़चिड़ापन भी आ जाता है। विशेषकर महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ आया है और सामान्य दिनों से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ने लगी है। ऐसे में खीझ हो सकती है। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपनी पहले की दिनचर्या की तरह से कार्य करें। यानी घर से काम कर रहे हैं और पहले 9 बजे ऑफ़िस पहुंचते थे तो यही नियम का पालन घर पर भी करें और उसी समय से आॅफिस का काम करें। बीच में जो फ्री समय मिले उसमें गृहकार्य में स्त्रियों का हाथ बंटाएं या महिलाएं अपने साथी के दफ़्तर सम्बंधी काम में भी मदद कर सकती हैं। साथ ही अपने व्यक्तिगत जीवन का भी ख़्याल रखें और मित्रों से, क़रीबी रिश्तेदारों से विभिन्न माध्यमों से जुड़े रहें।

मानवता ना भूलें

देखने में आ रहा है कि कोराेना का पता चलने पर लोग संक्रमित से अछूत जैसा व्यवहार करने लगते हैं। बेशक आपको अपनी सेहत का ख़्याल रखना है और बीमारी से बचे रहना है किंतु एक मनुष्य का धर्म भी निभाना ज़रूरी है। यदि आपके आसपास किसी को कोराेना हुआ है और वे सब होम आइसोलेशन में हैं तो आप कम-कम से राशन आदि के प्रबंध में उनकी सहायता कर सकते हैं। फ़ोन पर ज़रूरत पूछकर दरवाज़े के आसपास तय स्थान पर रख सकते हैं। बीमारी किसी के सामने दिख जाने से नहीं फैलती। आइसोलेटेड परिवार का हौसला बनाए रखें। कोई अपने प्रति अमानवीय व्यवहार होते देखता है, तो मन से दुखी होता है, तनाव में भी आ सकता है। अत: मानवता ना भूलें।

मन के जीते जीत है

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इस महामारी के चलते बहुत ही बुरा समय गुज़र रहा है लेकिन यह बात भी सच है कि बहुत उम्रदराज़ लोग भी इस बीमारी को हरा कर स्वस्थ हुए हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के लातूर में 105 साल के धेनु उमाजी चौहान और उनकी 95 वर्षीय पत्नी कोरोना काे हराकर सकुशल अस्पताल से घर लौट आए। कुल जमा बात इतनी है कि यदि आप बीमार हो भी जाएं या आपके परिवार या आसपास कोई कोरोना से संक्रमित हो जाए तो कभी भी अपने आप के ऊपर बीमारी को हावी न होने दें। न स्वयं से कोई रिसर्च करें और न दवाइयों की आज़माइश। डॉक्टर को उनका काम करने दें और आप स्वयं को दूसरी चीज़ों में व्यस्त रखने की कोशिश करें। लोगों के अनुभवों के आधार पर कोई दवाई का सेवन न ही करें, चिकित्सकीय सलाह को ही मानें।

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