परवरिश:क्या आप भी बच्चों को सब कुछ बताते हैं, अगर हां तो ज़रा संभल जाएं

शिखर चंद जैन17 दिन पहले
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  • कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनसे बच्चों को जितना दूर रखा जाए उनके लिए उतना ही बेहतर है।
  • उनसे केवल वही बातें साझा करें जो उनके लिए जानना ज़रूरी हैं, अन्यथा नकारात्मक बातोंं का असर उनके मस्तिष्क पर तो पड़ेगा ही, साथ ही व्यवहार में भी नज़र आने लगेगा।

बच्चे पढ़ने-लिखने में होशियार, बोल-चाल में चंचल और खेल-कूद में सक्रिय रहते हैं। इसके बावजूद उनमें दुनियादारी की समझ और अनुभव की कमी होती है। इसलिए बहुत-सी ऐसी बातें हैं जो उनसे छुपानी ज़रूरी होती हैं। कम से कम किशोरावस्था में पहुंचने से पहले उनसे कुछ बातें साझा करने से बचना चाहिए। यह गोपनीयता बच्चे और अभिभावक दोनों के हित में है।

वित्त से जुड़ी समस्याएं
घर में अगर किसी प्रकार की वित्तीय समस्या चल रही है तो इसका ज़िक्र बार-बार बच्चों के सामने न करें। इससे उनके मन पर एक अनजाना-सा बोझ आ जाएगा और तनाव भी बढ़ सकता है। ज़मीन-जायदाद के झगड़े या पैसों की तंगी के मामले को भी बच्चों के साथ साझा नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे का ध्यान भटकेगा, घर का माहौल चिंता बढ़ाएगा, जिसका बुरा असर उसकी पढ़ाई-लिखाई पर पड़ेगा।
रिश्तेदारों के झगड़े
बच्चों के सामने कभी भी अपने निकट संबंधियों या परिजनों के बारे में नकारात्मक बातें न करें। अगर आपकी किसी व्यक्ति से नहीं बनती है तब भी बच्चों को इससे अवगत न कराएं क्योंकि उन पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। आप बच्चों के सामने दूसरों की जैसी छवि बनाएंगे, वे उनके बारे में वैसा ही सोचेंगे। नतीजतन आगे चलकर वे भी उन लोगों के प्रति दुर्भवना रखने लगेंगे। हो सकता है अपरिपक्व होने के कारण सबके सामने ही वे रिश्तेदारों के साथ अशिष्टता से पेश आएं या दुर्व्यवहार करने लगंे या कोई कड़वी बात कह दें। इससे आपके रिश्ते तो लोगों से ख़राब होंगे ही, बच्चों की भी नकारात्मक छवि बनेगी।
अकाउंट की पूरी जानकारी
आपके लिए बेहद ज़रूरी है कि घर में रखे आभूषण, नक़द रुपये या तमाम बैंक अकाउंट की जानकारी बच्चों को कभी न देंं। एटीएम, पिन, ज़रूरी पासवर्ड भी बच्चों के सामने कभी न रखें। इससे बच्चे अनजाने में या भोलेपन में यह सब किसी और को बता सकते हैं जिससे आपकी सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है। बच्चे इनसे जितना दूर रहेंगे वह उतना उनके और अभिभावकों के लिए सुरक्षित होगा।
बचपन की कमियां
कई बार अभिभावक बातों ही बातों में बच्चों को उनके बचपन की कुछ नकारात्मक बातें या कमज़ोरियां बताने लगते हैं। जैसे वे बिस्तर पर पेशाब कर दिया करते थे, तुतला कर बोलते थे, हकलाते थे या फिर शर्माते थे। ऐसी बातें बच्चों को बार-बार याद नहीं दिलानी चाहिए और न ही उस बात का मज़ाक उड़ाना चाहिए। ख़ासतौर पर रिश्तेदारों और बाहरी लोगों के सामने तो बिल्कुल भी नहीं। रिश्तेदारों और क़रीबियों को भी समझाना चाहिए कि वे ऐसी बातें या मज़ाक बच्चों के साथ न करें। इससे उनके मन में अपराध बोध और हीन भावना का संचार हो सकता है।

बीमारी में उसे न कोसें
यदि बच्चे को कोई ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो जाती है जिसकी वजह से हर वक़्त उसकी देखभाल करनी पड़े, तो उसको बार-बार ताना न दें कि- ‘तू मेरी जि़ंदगी पर बोझ बन गया।’ इससे बच्चे का मन विचलित हो सकता है और हो सकता है उसका मानसिक विकास बाधित हो जाए।

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