चेतावनी:कुछ नहीं करना ख़तरनाक हो सकता है ! कैसे ? जानिए इस लेख में...

डॉ. अनिल बल्लानी, कंसलटेंट-इंटर्नल मेडिसिन, पी. डी. हिंदुजा हॉस्पिटल, खार2 महीने पहले
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  • गतिहीन जीवन शैली यानी ऐसे काम करना जिसमें व्यक्ति दिन का अधिकांश समय बैठे, लेटे या झुके हुए रहता है, जिससे शारीरिक ऊर्जा की खपत बहुत ही कम होती है।

हम विचारते हैं कि एक ही जगह बैठे हुए बार- बार अपना मोबाइल देखने, दफ़्तर में 7-8 घंटे बैठे- बैठे काम करने, घर आकर आराम से बैठकर कोई फ़िल्म या वेबसीरीज देखने से हमारा जीवन गतिहीन थोड़ी न कहलाएगा। यह तो हमारी जीवनचर्या का हिस्सा है। बस, इसी बिंदु पर हमारी सोच ग़लत साबित हो जाती है। इस धारणा के प्रति हमारी स्वीकृति ही जीवन शैली को गतिहीन (सेडेन्टरी) बना रही है। आइए जानते हैं कि किस प्रकार गतिहीन जीवन शैली हमें प्रभावित कर रही है व इसे संतुलित करने के लिए हम क्या कर सकते हैं।
शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
गतिहीन जीवन शैली से हृदय व किडनी रोग, मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है, साथ ही पेट के कैंसर और पैर की नसों में ब्लड क्लॉट्स का भी जोखिम रहता है। अंदाज़न 30-35% हृदय की बीमारियां गतिहीन जीवन शैली के कारण होती हैं।
लंबे समय तक कुछ भी शारीरिक काम न करने से सुस्ती, थकान, अवसाद, उदासी और चिंता हो सकती है। शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से सेरोटोनिन (हैप्पी हाॅर्मोन) रिलीज़ होना कम हो जाता है, जिससे अवसाद उपजता है।

क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल लगभग 20 लाख लोगों की मौत गतिहीन जीवन शैली के कारण होती हैं। विश्व स्तर पर विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों के 85% लोग गतिहीन जीवन शैली वाले हैं। न केवल वयस्क, बल्कि लगभग दो-तिहाई बच्चों की भी जीवन शैली गतिहीन है। डब्ल्यूएचओ ने विभिन्न आयु समूहों के लिए कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि की सिफ़ारिश की है। 5 से 17 वर्ष के बच्चों के लिए साइकिल चलाना, बाहरी खेल खेलना अनिवार्य है। 18 से 65 वर्ष के वयस्कों के लिए योग, खेल, व्यायाम व पैदल चलना आवश्यक है।

गतिहीन जीवन शैली में सुधार लाने के तरीक़े

कामकाजी के लिए
यदि दफ़्तर में पूरे समय बैठे-बैठे लैपटॉप पर काम करना पड़ता है तो
लंच ब्रेक या कॉफी ब्रेक के दौरान थोड़ा टहलें।
हर घंटे में एक बार कुर्सी से उठें और थोड़ा घूमें।
जब फोन पर बात करनी हो तब टहलते हुए बात करें।
किसी सहकर्मी का केबिन आपसे थोड़ा दूर है तो बात करने के लिए फोन करने के बजाय चलकर जाएं।
कार्यालय में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। यदि दफ्तर आठवीं या नवीं मंजिल पर है, तो चौथी मंजिल तक सीढ़ियों का उपयोग करें, आगे भले ही लिफ्ट से चले जाएं।

गृहिणियों के लिए

पूरा दिन घरेलू काम और आराम में ही बीत रहा है तो छोटा-मोटा सामान लाने के लिए घर के आसपास की दुकान तक पैदल जाएं। टीवी देखते हुए कुर्सी या सोफे पर बैठकर पैरों को इस तरह से चलाएं, जैसे साइकिल पर पैडल मार रहे हों। सूर्योदय व सूर्यास्त के समय कॉलोनी में या छत पर आठ से दस चक्कर लगाएं। घर के कामों में मशीन के चलते श्रम कम लगता है। इसलिए थोड़ा बहुत कसरत करें। ब़ागवानी करें, इधर-उधर रखी चीज़ों को हाथोंहाथ उनके स्थान पर रखें।

बच्चों के लिए
यदि बच्चे बैठे-बैठे मोबाइल/टीवी के सामने समय व्यतीत कर रहे हैं तो
सबसे पहले माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें।
कोई ऐसी कला या खेल सीखने भेजें जिसमें शारीरिक श्रम लगता हो।
डिजिटल उपकरणों के बजाय शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले खिलौने और उपकरण बच्चों को दें।
खाना खाने के बाद बच्चों को साथ लेकर टहलें। सप्ताह में एक दिन उनके साथ घर में ही ऐसे कुछ खेल खेलें जिनमें शारीरिक श्रम लगता हो।
घर के छोटे-मोटे काम जैसे एक कमरे से दूसरे कमरे में कोई सामान रखना इत्यादि बच्चों से करवाएं।

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