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नई सोच:घर में रहकर बच्चों से लेकर बड़े तक सभी ऊब गए हैं, दिनभर क्या करें, क्या न करें, ऐसे में एक तरक़ीब है, क्यों न पुराने दिन फिर जी लिए जाएं...

फायज़ा सिद्दिक़ी2 महीने पहले
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  • खाली दिमाग़ शैतान का घर होता है, ये तो हम सभी ने सुना है लेकिन ख़ाली समय...! यही तो आगे बढ़कर दिमाग़ को मौके देता है कि उलझनों में पड़े, नकारात्मक निराशा-भरे विचारों को जगह दे।
  • इसलिए ज़रूरी है कि खाली समय को मनोरंजक गतिविधियों से भर दिया जाए।

इस समय सभी के मन में कहीं न कहीं नकारात्मकता घर किए हुए है। ऐसे में ख़ुद को सकारात्मक बनाए रखने के लिए कुछ पुराने दिन जी लिए जाएं तो मन भी लगा रहेगा और मज़ा भी आएगा। आप क्या-क्या कर सकते हैं इसके लिए कुछ सुझाव हम लेकर आए हैं-

पुराने खेलों से नाता जोड़ें
खेल हमेशा से सभी की यादों में रहते हैं। ख़ासतौर से बचपन के खेल। अभी सभी के पास पर्याप्त समय है तो क्यों न ऐसे खेल खेले जाएं जो बचपन में बड़े लुभाते थे।
चार पर्ची यानी राजा-मंत्री-चोर-सिपाही का खेल सभी को याद होगा। चार लोगों में खेला जाने वाला ये खेल गर्मियों की छुटि्टयों का पसंदीदा टाइम पास हुआ करता था। ऐसे ही पचकुट्‌टा (पांच छोटे पत्थर या लकड़ी के टुकड़ों से खेला जाने वाला खेल), पत्तों के दिमाग़ी कसरत वाले खेल जैसे 29, ऐसे न जाने कितने ही खेल हैं जो सभी ने कभी न कभी खेले हैं। संभव हो, तो अपने क्षेत्रीय खेल खेलकर इस समय को यादगार बनाएं और तनाव से राहत पाएं।

पुराने एल्बम का खज़ाना
इस समय फ्री हैं तो पुरानी यादें ताज़ा करें। अपनी शादी की एल्बम निकालें, अपने बचपन की तस्वीरें देखें, घरवालों की तस्वीरें देखकर ख़ूब ठहाके लगाएं। बच्चे माता-पिता की शादी की तस्वीर देखें और अपने मामा-बुआ को पहचानें और देखें कि वो पहले कैसे दिखा करते थे। इसके अलावा ऐसी कई तस्वीरें होंगी जिनमें आपके रिश्ते के भाई-बहन होंगे, उन्हें भी उनके बचपन की ये तस्वीरें भेजें। इस बहाने सभी से बातचीत हो जाएगी और पुराने दिन भी याद आ जाएंगे।

चख लें पुराना ज़ायका
पहले के समय में कई तरह का भोजन तो बनता था लेकिन उसमें प्रयुक्त सामग्रियां कुछ अलग होती थीं। तुरत-फुरत ना करके, सुकून से भोजन तैयार किया जाता था, ताज़े मसाले पीसकर, कूटकर। ऐसी ही क्लासिक रेसिपीज़ को भोजन के लिए तैयार करें। अगर आपको नहीं आती तो घर के बड़ों से पूछकर बनाएं और बाक़ी सदस्यों की मदद भी लें। इससे पारंपरिक स्वाद फिर से चखने का मौक़ा मिलेगा।

लौटेंगे स्कूल के दिन
आप चाहें कॉलेज में हो, नौकरीपेशा हों या ग्रहिणी हों, दोस्त सभी के होते हैं। ख़ासतौर से स्कूल-कॉलेज के दोस्त हमेशा याद रहते हैं। इस समय इन सभी के साथ वीडियो कॉल या कॉन्फ्रेंस कॉल के ज़रिए बात करें। यदि नंबर नहीं है तो सोशल मीडिया के ज़रिए जुड़कर भी ग्रुप बना सकते हैं। यक़ीन मानिए अपने पुराने दोस्तों से दोबारा बात करना, पुराने दिन याद करना आपको सुकून देगा और ख़ुश कर देगा। इसलिए कोशिश कीजिए सभी से जुड़ने की।

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