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नई राह:अकेलेपन में भरें उत्साह के रंग, दूसरों का सहारा बनें और कुछ नया करने की सोचें

अर्चना शर्म13 दिन पहले
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  • अकेले रहना आत्मनिर्भर होने की आदतें विकसित करने में मदद करता है और मानसिक रूप से मज़बूत बनने में भी सहायक होता है। कैसे, जानते हैं।

जीवन में कई बार उत्साह की कमी होती है। ख़ासतौर से उनके लिए जो अकेले रहते हैं या किसी कारणवश अकेले रहने को मजबूरी होते हैं। अकेले रहने वाले व्यक्ति के सामने बहुत-सी चुनौतियां आती हैं। बहुत मुमकिन है कि तन्हा व्यक्ति कभी-कभी मायूस महसूस करे, उत्साह की कमी का सामना करे। ऐसे वक़्त में कुछ कार्य उनके लिए मददगार साबित हो सकते हैं, जिनसे नई ऊर्जा मिल सके। इस लेख में हम कुछ सुझाव पेश कर रहे हैं, आज़माकर देख लीजिए।

सहारा बनें

जब समय मिले, दूसरों की मदद करें। वृद्धाश्रम या अनाथ आश्रम में जाकर बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ समय बिताएं। उनके पास बैठकर उनके सुख-दुख बांटे और उनकी समस्याओं को जानें और साथ मिलकर हल करने की कोशिश करें। ऐसा करने से उन्हें भी अच्छा लगेगा और आपको भी किसी के काम आने की तसल्ली होगी।

एक्टिविटीज़ तलाशें

ऐसी एक्टिविटीज़ तलाशें जो समूह में की जा सकें। उदाहरण के तौर पर साथ में फोटोग्राफी करने जाएं, इसके लिए अपना ग्रुप बना लें। किसी कार्यशाला में भाग लें, नई भाषा सीखें, किसी क्लब या संस्था से जुड़ें। जब आप लोगों से मिलेंगे तो आपका ग्रुप बनेगा और लोगों से मेलजोल बढ़ेगा, नई चीज़ें सीखने को मिलेंगी।

मेलजोल का दायरा

ख़ुश रहना चाहते हैं तो अपने परिचितों का दायरा बढ़ाएं। लोगों को घर पर आमंत्रित करें, किसी के आमंत्रण को मना न करें। इससे आना-जाना बढ़ेगा और जब दोस्त बन जाएंगे तो यही लोग आपका सहारा बन जाएंगे। इसके साथ ही हर महीने हर एक दोस्त के घर पार्टी रख सकते हैं। इससे सभी को मिलने का उत्साह भी रहेगा और हर बार अलग-अलग लोगों के घर जाने में आनंद भी आएगा।

मानसिक स्वास्थ्य

आप सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, लोगों से मिलते, बातें करते हैं, तो आपका मानसिक सवास्थ्य बेहतर होता है। कई शोधों से साबित हो चुका है कि सामाजिक सक्रियता मानसिक तौर पर स्वस्थ रखती है। इसके साथ ही संवाद कला को निखारती है। अगर आप दिन में 10 मिनट भी किसी से मिलते और बात करते हैं, तो आप अवसाद से दूर रहते हैं।

व्यावहारिक बनें

नौकरी या पढ़ाई के चलते अकेले किसी पराए शहर में रह रहे हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि कॉलेज या दफ़्तर में उदास घूमते रहें या सिर्फ़ वीकेंड या छुट्‌टी वाले दिन ही सबसे मिलें। बल्कि व्यवहार ऐसा रखें कि दफ़्तर में भी किसी को कोई मदद या ज़रूरत हो तो वो आपके पास आए। अपने दफ़्तर या कॉलेज आदि के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

अच्छी किताबें पढ़ें

अक्सर बहुत से सेलेब्रिटीज़ को कहते सुना जा सकता है कि किस तरह किसी एक किताब ने उनके जीवन को उत्साह से भर दिया या फिर नाउम्मीदी के दौर में किसी एक किताब ने उनको अवसाद से बाहर निकाल दिया। वाकई किताबें हमारे व्यक्तित्व पर व्यापक असर डालतीं हैं और बेहतर मसूस करने का भी साधन होती हैं। किताबें व्यक्ति की कल्पनाशीलता को बढ़ातीं हैं, जीवन में उत्साह भरने में सक्षम होती हैं। चाहे वे फिक्शन हों या नॉन फिक्शन, अपनी दिलचस्पी के अनुसार किताबों का चयन करें। बायोग्राफी भी बहुत अच्छा विकल्प हैं। दुनिया की ऐसी बहुत सी हस्तियां हैं जिनकी बायोग्राफी हताशा के दौर में उम्मीद भरने का बख़ूबी काम कर सकती हैं। स्वेच्छा से चयन करें।

मदद के काम करें

समाजसेवा से जुड़े कामों में रुचि लें। अपने दैनिक या साप्ताहिक जीवन में से समय निकालकर इस ओर क़दम बढ़ाएं। इसके तहत वंचित तबके के लोगों को पढ़ाना, उनकी किसी कला को विकसित कराना आदि शामिल हैं। इससे मन को सुकून भी मिलता है। इसके लिए आप किसी एनजीओ की मदद भी ले सकते हैं। कोई अनौपचारिक समूह बनाकर भी मदद कर सकते हैं।

कार्य एक तरीक़े दो

किसी कार्य को यदि हमेशा एक ही तरह से करते आए हैं तो उसे करने के तरीक़े में परिवर्तन करके देखिए। एक कार्य को दूसरे तरीक़े से करें फिर किसी अन्य तरीक़े से करके देखें। इससे क्षमता भी बढ़ेगी और रचनात्मकता भी बढ़ेगी।

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