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बाग़वानी:बाग़वानी कम जगह में भी की जा सकती है, छोटा सिटआउट बन सकता है, सब्ज़ियां उगाई जा सकती हैं और फूल खिलाए जा सकते हैं

आर. एस. यादव, बाग़वानी विशेषज्ञ2 महीने पहले
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  • आजकल छोटे घरों में पार्किंग के पास छोटा-सा चौकोर स्थान शेष बचता है या अपार्टमेंट में रहते हों, तो छोटी-सी बालकनी। बस, बाग़वानी के शौक़ को पूरा करने के लिए इतना ही स्थान मिलता है।
  • यहीं फूल, सब्ज़ियां उगाने के साथ-साथ बाग़ का आनंद लेने की गुंजाइश भी निकालनी होगी, जो चुनौती तो है, लेकिन साथ ही सुगठित, हरी-भरी, फूलों के विविध रंगों से सजी बगिया बनाने का सुख भी है।

जगह का सही उपयोग करें
अगर ज़मीन का घर है और उसमें पतली-सी क्यारी है तो पहले इसको लकड़ी या पतली टाइल की मदद से कई भागों में बांटें। हर भाग में अलग-अलग पौधे लगाएं। वहीं क्यारी की सीमा (बाउंड्री) पर सब्ज़ियों और फूलों के पौधों के गमले रख सकते हैं। इससे पौधों के लिए काफ़ी जगह बन जाएगी।
वर्टिकल गार्डन बनाएं
अगर आपको बहुत सारे पौधे लगाने हैं तो वर्टिकल गार्डन बना सकते हैं। गमलों के लिए स्टैंड रख सकते हैं जिसमें एक स्टैंड पर छह-सात से ज़्यादा गमले रखे जा सकते हैं। स्टैंड लंबाई में होता है इसलिए जगह भी कम घिरती है। अगर आंगन या बालकनी का कोई ऐसा कोना है जिसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो किनारे के लिए भी स्टैंड ले सकते हैं। पॉट वाले स्टैंड भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें छोटे पौधे वाले फल जैसे स्ट्रॉबेरी और सब्ज़ियां जैसे चेरी टमाटर उगाई जा सकती हैं।
हैंगिंग बास्केट आज़माएं
पालक, मेथी, स्ट्रॉबैरी, मोटी लाल मिर्च, चेरी टमाटर, करेला आदि जैसे छोटे पौधे और बेल को दीवार पर लटका सकते हैं। इसके लिए स्टैंड का इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर छत के सहारे लटकाया भी जा सकता है। पत्तेदार सब्ज़ियां छोटी जगह में भी अच्छी बढ़ जाती हैं इसलिए कई छोटे-छोटे पॉट में पालक, मेथी आदि लगाकर इन्हें दीवार के सहारे लटका सकते हैं।
इन पौधों को साथ लगाएं
कुछ पौधों को एक ही गमले में साथ लगाने से काफ़ी जगह बचेगी। धनिया-मेथी एक साथ लगा सकते हैं। शलजम और मूली एक गमले में लगा सकते हैं। हरी मिर्च, लाल मोटी मिर्च और शिमला मिर्च एक ही गमले में लगाई जा सकती है। जड़ वाली सब्ज़ियां जैसे मूली और गाजर साथ लग सकती हैं। लहसुन और प्याज़ की महक तेज़ होती है तो इन्हें साथ लगाएं। लताएं भी साथ लगा सकते हैं, जिन्हें बांस लगाकर ऊपर चढ़ा सकते हैं। जड़ वाली सब्ज़ियों के लिए उन ग्रो बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्हें जड़ वाली सब्ज़ियों के लिए ही बनाया गया है। इससे मिट्‌टी खोदकर सब्ज़ी निकालने की जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी।
हर जगह का उपयोग करें
घर में दो तरह की जगह हो सकती हैं जहां 5-6 घंटे धूप आती है और कम धूप आती है। 5-6 घंटे धूप आने वाली जगह में सब्ज़ियां जैसे बैंगन, मिर्च, टमाटर, गाजर, मूली, चुकंदर, शलजम, करेला, गिल्की आदि लगा सकते हैं। अगर शोभायमान पौधे लगाना है तो टेबल पाम, क्रोटन, जेड प्लांट, फायकस, गुड़हल, बोगनवेलिया, एक्जोरा, आदि लगा सकते हैं। वहीं कम धूप वाली जगह में पालक, मेथी, हरा धनिया, आदि लगा सकते हैं। शोभायमान पौधों में डिफनबाकिया, एग्लोनिमा, पीस लिली, कोलियस, मनीप्लांट, मॉन्स्टेरा, स्नेक प्लांट, केलेडियम लगा सकते हैं।

पौधों की मिट्टी की तैयारी
धूप और छांव वाले सभी पौधों को लगाने के लिए मिट्टी का मिश्रण तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए मिट्टी दो भाग, गोबर खाद एक भाग और वर्मी कम्पोस्ट एक भाग और एक-चौथाई भाग रेत लें। अगर रेत उपलब्ध नहीं है तो पौधों की उपज अच्छी नहीं होगी। एक बात ज़रूर ध्यान रखें कि हर 20 दिन बाद वर्मी कम्पोस्ट खाद पौधों को देते रहें जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। अगर पौधे गमलों में लगा रहे हैं तो उनमें नीचे छेद अवश्य रखें। छेद के ऊपर कुछ टूटे हुए गमले के टुकड़े रखें, उसके बाद तैयार की गई मिट्टी के मिश्रण को भरकर पौधे लगा दीजिए।
बैठक भी बन सकती है
गमलों को स्टैंड पर रखकर, कुछ बड़े गमलों को नीचे रखकर, बालकनी में झूला लगाकर छोटे-से बाग़ को सिटआउट में भी बदल सकते हैं। लो सिटिंग के लिहाज़ से, एक दरी बिछाकर उस पर छोटी टेबल व बीन बैग या बांस के मुड्‌ढे रखकर भी बैठक बनाई जा सकती है।
(विगत सप्ताह मधुरिमा के पाठक जयपुर से अतुल वशिष्ठ की जिज्ञासा के समाधान के रूप में यह लेख शामिल किया गया है।)

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