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  • Holi Festival Is Not Just For Fun, It Gives Us The Opportunity To Know The Traditions, Changes In Nature, Value Of Life And How Much Is Known, This Time Explain The Meaning Of This Colorful Festival To The Children And Feed Them Some Fun Games Too. ...

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पर्व परिचय:होली का त्योहार सिर्फ़ मौज-मस्ती के लिए नहीं है, ये हमें परम्पराएं, प्रकृति में बदलाव, जीवन के मूल्य और न जाने कितना कुछ जानने का मौक़ा देता है, इस बार बच्चों को इस रंगीन त्योहार के मायने समझाएं और कुछ मज़ेदार खेल भी खिलाएं...

कोपल जैन, काउंसलर21 दिन पहले
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  • होली प्रकृति में उजागर हुई उमंग का, सर्दियों की जकड़न से गर्मी के खुलेपन की ओर बढ़ने का त्योहार है। आइए, बच्चों को होली के असली स्वरूप से परिचित कराएं।

बच्चे जीवन के हर क्षण को उत्सव की तरह मनाते हैं और जब मौक़ा हो होली का तो इनका उत्साह देखते ही बनता है। रंग, पिचकारी, पानी से भरे गुब्बारे और बच्चे, इन्हीं सब से तो होली लगती है। लेकिन बच्चों को होली का असल अर्थ बताना बहुत ज़रूरी है। होली क्यों मनाई जाती है, इसका क्या महत्व है, इससे जुड़े पौराणिक तथ्यों से हमें क्या सीखना चाहिए व सही रूप में इसे कैसे मनाया जाए, ये सभी बातें बच्चों को समझाना हमारी ज़िम्मेदारी है।

त्योहार की अहमियत
हर त्योहार के पीछे परम्परा की कहानी होती है। त्योहार केवल मौज-मस्ती, लोगों से मिलने-जुलने व अच्छे पकवान खाने के लिए ही नहीं होते बल्कि इनका संबंध हमारे शरीर, स्वास्थ्य, और ऋतुओं के हम पर पड़ने वाले प्रभावों से भी है। इसे ख़ुद समझना और बच्चों को समझाना ज़रूरी है। बच्चे हर चीज़ का कारण जानना चाहते हैं। इसलिए त्योहार के पीछे का वैज्ञानिक और ऋतु संबंधी कारण और इतिहास उन्हें बताएं।

होलिका दहन कैसे हो
अब होली नाम-मात्र की है। न पहले-सी रौनक़ दिखती है, न लोगों के बीच वह अपनापन। हुल्लड़ के कारण लोग घरों में अंदर रहते हैं। आप बच्चों को सिखाएं कि होली को सही तरीक़े से कैसे मनाएं। सबसे पहले बात करें होलिका दहन की। पेड़ों को काटकर हम ख़ुद तो होली मना लेते हैं पर प्रकृति को नुकसान पहुंचा देते हैं। बच्चों को बताएं कि गोबर के कंडों की होली जलाएं जिससे प्रकृति का संरक्षण होता है। कंडों की होली में कपूर,नीम की सूखी पत्तियां भी डालें, ताकि हवा भी शुद्ध हो सके।

प्रकृति मनाती है होली
होली केवल हम नहीं मनाते बल्कि पूरी प्रकृति मनाती है। टहनियों पर खिलते टेसू के फूल होली का संकेत देते हैं, पतझड़ के बाद नए पत्ते भी ये उत्सव मनाते हैं। होली नए सृजन की भी प्रतीक है, क्योंकि पतझड़ के बाद होली से ही प्रकृति फिर हरी-भरी हो जाती है। होली मनाने का वैज्ञानिक कारण भी है। सर्दियों में हमारी त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है और पतझड़ के मौसम में ये रूखापन और बढ़ जाता है। पहले के समय में प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती थी, उसके बाद जब नहाया जाता था तो त्वचा की मृत कोशिकाएं व रूखापन दूर हो जाता था।

होली की कथाएं
बच्चों को ये बताना बहुत ज़रूरी है कि कोई भी त्योहार क्यों मनाया जाता है। होली के पीछे कई कथाएं हैं। जैसे हिरण्यकशिपु व उसकी बहन होलिका की कथा। होलिका दहन का अर्थ बुराइयों को ख़त्म कर अच्छाई की जीत होना है। दूसरी कथा वृंदावन में कृष्ण और गोपियों की होली की है, जिससे होली प्रेम का प्रतीक बन जाती है। तीसरा कारण है फसल पक जाने पर किसान को होने वाली ख़ुशी को त्योहार के रूप में मनाना। इसलिए होली सफलता और समृद्धि की प्रतीक है। ये सभी कारण बच्चों को कहानियों के रूप में सुनाएं, ताकि वे इन्हें गहराई से आत्मसात कर सकें।

ख़ुद बनाएं रंग
अब बात आती है रंगों की। आजकल रसायनिक वाले रंगों की प्रधानता है, इस वजह से माता-पिता बच्चों को होली खेलने से मना करते हैं। लेकिन बच्चों को होली खेलने से रोकने के बजाय उनके साथ मिलकर प्राकृतिक रंग बनाएं। इस समय टेसू के फूल आसानी से मिल जाते हैं तो उनका रंग, हल्दी और मुलतानी मिट्टी मिलाएं, चंदन के पाउडर में चुकंदर का रस मिलाकर उसका रंग तैयार करें। इससे वे रंग भी खेल सकेंगे और त्वचा को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।

होली में घोलें खेल के रंग

विगत वर्ष के हर त्योहार की मिसाल से समझें तो होली भी हमें घर में ही रहकर मनानी है यानी घर से बाहर, लोगों के बीच में नहीं जाना है। हुड़दंग की रस्म घर में निभाते हैं, होली की सामग्री से संबंधित कुछ खेल खेलकर।
गुब्बारा उठाओ
क्या चाहिए— पानी के गुब्बारे, सलाई और दो बाल्टी ।
इस खेल को खेलने में आपको बहुत मज़ा आने वाला है। करना यह इतना है कि एक कंटेनर में पानी के गुब्बारे भरकर रखना है और इन्हें दो सलाइयों या पतली डंडियों की मदद से उठाकर (चिमटे की तरह) दूसरे कंटेनर में डालना है। जो खिलाड़ी 1 मिनट में सबसे ज़्यादा गुब्बारे उठाकर डालेगा वो बनेगा विजेता।

विशाल बबल बनाएं

​​​​​​​दो स्ट्रॉ लेकर उनके बीच में से मोटा धागा डालकर पिरोएं और सिरे मिलाकर बांध दें। एक छोटी बाल्टी में एक छोटा कप डिशवॉश लिक्विड, एक बड़ा चम्मच ग्लीसरीन और चार छोटे कप पानी मिलाकर बबल सॉल्यूशन बनाएं।
अब दोनों स्ट्रॉ को दोनों हाथों में पकड़ते हुए सॉल्यूशन में डुबोएं और हाथों को हवा में घुमाएं ताकि बबल बनने लायक हवा स्ट्रॉ के बीच में आए। विशाल बबल बन जाएगा।

सिक्का खोजो

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क्या चाहिए- पानी भरी बाल्टी या टब, गहरे रंग, 10 रु.का सिक्का, 5 का सिक्का और 1 का सिक्का।

इस खेल को खेलने के लिए पानी भरे टब या बल्टी में रंग मिलाएं। अब इसमें तीनों सिक्के डाल दें। अब खिलाड़ी को 30 सेकंड का समय दें और किसी एक सिक्के को ढूंढने को कहें। ये सिक्का 5 या 10 या फिर 1 रु. का हो सकता है। जो ग़लत सिक्का निकालेगा वो खेल से बाहर हो जाएगा और तय समय में सही सिक्का निकालने वाला होगा विजेता। इस खेल में जितने अधिक खिलाड़ी होंगे उतना मज़ा आएगा।

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