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  • Hormones Changes Are Often Seen In Women, Which Also Create Many Difficulties, Read How To Get Rid Of Them.

आम समस्याएं:महिलाओं में हार्मोंस बदलाव अक्सर देखने को मिलते हैं, जो कई मुश्किलें भी पैदा करते हैं, इनसे कैसे निजात मिल सकती है पढ़िए

डॉ. मंजू गुप्ता, गायनेकोलॉजिस्ट, मदरहुड हॉस्पिटल2 महीने पहले
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  • महिलाआंे में हॉर्मोन असंतुलन से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।
  • जानिए क्या है यह समस्या और कैसे मिल सकती है निजात।

हॉर्मोन्स के असंतुलन से महिलाओं को व्यवहार में बदलाव, थकावट, मासिक चक्र बदलने जैसी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है। बदलाव केे लक्षणों को पहचानना और उपाय बेहद ज़रूरी है।
- प्री मेंस्ट्रुएशन सिंड्रोम (पीएमएस)
इस सिंड्रोम में थकान, चिड़चिड़ापन, रोना, ग़ुस्सा आना जैसे बदलाव महसूस होते हैं। पीएमएस जानने के लिए एक डायरी रखें और दो-तीन महीनों तक लक्षणों को लिखें। मासिक धर्म से दस दिन में इस सिंड्रोम के लक्षण नज़र आने लगते हैं। उसी के आधार पर विशेषज्ञ से परामर्श करें।
- चेहरे पर मुंहासे
कुछ स्त्रियों में मासिक के दौरान मुंहासे निकलते हैं और ठीक हो जाते हैं। अगर मुंहासे ठीक नहीं हों तो हॉर्मोन्स में असंतुलन की समस्या हो सकती है। चेहरे पर बाल होना भी नतीजा हो सकता है।
- व्यवहार में बदलाव
इस्ट्रोजन व अन्य हॉर्मोन्स के स्तर में बदलाव होने के कारण महिलाओं के व्यवहार में बदलाव (मूड स्विंग) होता है। जैसे थायरॉइड संबंधी समस्याएं।
- मासिक धर्म में दर्द
मासिक में बार-बार लघुशंका लगना, कमर में दर्द, माहवारी में थक्के होना, मासिक अधिक दिनों तक चलना या अपच की समस्या, फायब्रॉइड्स के चलते हो सकती है।

ऐसे संतुलित रखें हॉर्मोन्स
- आहार में प्रोटीन शामिल करें। प्रोटीन युक्त आहार से ज़रूरी एमिनो एसिड्स मिलते हैं। ग्रीन टी पीएं।
- व्यायाम करें, ध्यान लगाएं जिससे अच्छे हॉर्मोन्स रिलीज़ होंगे, तनाव कम होगा और मन अच्छा होगा।
- न अधिक खाएं और न ही बहुत कम। ज़्यादा खाने से इंसुलिन सेंसटिविटी कम हो सकती है। जबकि कम खाने से स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता है। इससे वज़न बढ़ने की आशंका होती है।
- लक्षण समझकर स्त्री रोग विशेषज्ञ से ज़रूर परामर्श लें।

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