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  • I Am Getting Bored, What Should I Do? If Your Child Also Says The Same, Then By Adopting Some Tricks, You Can Overcome This Problem.

परवरिश:मैं बोर हो रहा हूं, क्या करूं? अगर आपका बच्चा भी यही कहता है तो कुछ तरक़ीबें अपनाकर इस समस्या को दूर कर सकते हैं

कैथी लिन, पैरेंटिंग स्पीकर12 दिन पहले
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  • मैं बोर हो रहा हूं, क्या करूं?...बच्चों के मुंह से इस जुमले को इन दिनों तो कई बार सुन रहे हैं माता-पिता।
  • घर में बंद रहने की मजबूरी और पढ़ाई के ढर्रे से ऊब भी एक कारण है, लेकिन इस जुमले का घर में आम हो जाना बच्चे के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, जानिए कैसे....

‘मैं क्या करूं, बोर हो रहा हूं। आप मेरे साथ खेलिए’ का जुमला उन घरों में ख़ासतौर पर सुनाई देता है, जहां 6-12 साल के बच्चे हों। जब ज़िंदगी घरबंदी से आज़ाद थी, तब ऐसे जुमले बोलने वाले बच्चे माता-पिता को गाहे-बगाहे मॉल, पिक्चर व शॉपिंग पर ले जाने को मजबूर कर देते थे, जहां बच्चे को ‘बोरियत’ से दूर करने के लिए समय के अलावा अनावश्यक रूप से जेब भी ढीली करनी पड़ती थी। फिलहाल, कहीं जा नहीं सकते, तो स्थिति बहुत ही दारुण है।
जब बच्चे पुकारते हैं कि ‘मैं बोर हो रहा हूं/रही हूं’, तो माता-पिता को उतनी ही कोफ़्त होती है, जितनी दीवार पर नाख़ून रगड़ने की आवाज़ से। माता-पिता को लगता है कि ऐसा करने का उनका केवल एक मक़सद होता है, घर के लोगों का, ख़ासतौर पर अभिभावकों का ध्यान अपनी ओर खींचना और उन्हें अपने साथ व्यस्त करने की कोशिश करना। जबकि बाल मनोविशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा बच्चे अपने आलस के चलते कहते हैं।
यह आपकी समस्या नहीं है
बच्चों की बोरियत को या समय ना बिता पाने को अभिभावक अपनी समस्या मान लेते हैं और उन्हें सुझाने लगते हैं कि वे क्या करें। 99 प्रतिशत ऐसा होता है कि बच्चे बड़ों के सुझाए हर उपाय को नकार देते हैं। मनोविशेषज्ञ अभिभावकों को चेताते रहे हैं कि बच्चे की ऊब आपकी समस्या नहीं है। आप उसे लेकर परेशान या विचलित ना हों। उसके पास अपने आपको व्यस्त रखने के लिए आपने काफ़ी खेल-खिलौने दे रखे हैं। वे उसमें से आसानी से चुन सकते हैं, लेकिन उनका मक़सद माता-पिता को शामिल करना होता है, जो कि ज़ाहिर है हर बार संभव नहीं होता। तो ऐसे में यह करें कि जो काम आप कर रहे हैं, उसमें बच्चे को शामिल होने को कहें। या तो वे आपके साथ व्यस्त हो जाएंगे या आपके काम को मुश्किल मानकर, अपने खेल की तरफ़ लौट जाएंगे। लेकिन याद रखिए, उन्हें तीसरा विकल्प ना दें- या तो आपके साथ काम करें या ख़ुद खेलें, बस यही दो रास्ते दें।

बच्चे से सहानुभूति जताएं
बच्चे को सिखाएं कि उसकी बोरियत उसकी समस्या है, जिससे निपटने के रास्ते उसे ही सोचने होंगे। जब बच्चा यह कहे ‘मेरे पास कुछ करने को नहीं है’, तो उससे सहानुभूति जताते हुए कहें कि अपनी राहें तलाशे। बोरियत को दूर करने के उपाय खोजे और ख़ुद को व्यस्त करे। यह तरीक़ा उसे अपने भावी जीवन के उतार-चढ़ावों को लेकर अपनी मदद ख़ुद करने या तलाशने का सलीका भी सिखाएगा।

कब ध्यान देना होगा?
बच्चा अगर लगातार ऊब की शिकायत करता रहता हो, तो ध्यान देना होगा। इसके दो कारण हो सकते हैं - पहला कि बच्चे के पास जो खिलौने या एक्टिविटी टॉएज़ हैं, वो उसकी उम्र के हिसाब से नहीं हैं, दूसरा बच्चे को शिकायत करते रहने और हर खेल या गतिविधि से जल्द ही ध्यान हटा लेने की आदत पड़ रही है। पहले कारण को तो आसानी से समझा और उसका निराकरण किया जा सकता है। लेकिन दूसरे के लिए, आपको बच्चे की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर ग़ौर करना होगा। अगर उसका ध्यान जल्दी उचटता है, तो इसके लिए ध्यान के व्यायाम कारगर हो सकते हैं।
वहीं कुछ बच्चों को ज़िद करने और बड़ों के आस-पास बने रहने की आदत पड़ने लगती है। वे जो मांगे, उन्हें मिले, यह रवैया भी बन जाता है। इस आदत को धीरे-धीरे, लेकिन कड़े अनुशासन के साथ दूर किया जा सकता है।

कुछ भी नहीं कर सकते
— जब बच्चों को कहा जाए कि ख़ुद हल ढूंढों अपनी बोरियत का, तो इन गतिविधियों की
सख़्त मनाही होनी चाहिए - टीवी देखना, मोबाइल चलाना या सो जाना।
— अगर ख़ाली समय है, ऊब हो रही है, तो उसको दूर करने का तरीक़ा ऐसा ही होना चाहिए जिससे कुछ सीखा जाए, जिससे सृजनात्मकता बढ़े और जिससे किसी तरह का कौशल विकसित हो।
— वैसे सबसे अच्छा तरीक़ा तो कुछ पढ़ना होगा। कहानियों की किताबें, स्व-विकास के लिए लोगों की जीवनियां, आत्मकथाएं और नाटिकाओं को पढ़ना ना सिर्फ समय बिताने का बेहतरीन तरीक़ा है, बल्कि विकसित हो जाए, तो जीवन में सदा सीखते और बढ़ते रहने का किताबों से अच्छा कोई ज़रिया नहीं।

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