सायबर सुरक्षा:धोखाधड़ी का तरीका है आइडेंटिटी थेफ्ट, जानिए इससे कैसे बच सकते हैं

उपेंद्र सिंह18 दिन पहले
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आइडेंटिटी थेफ्ट यानी पहचान की चोरी, ठगी का एक तरीका है। इसमें किसी व्यक्ति की वित्तीय या निजी जानकारी का इस्तेमाल ज़्यादातर पैसों से संबंधित लूट के लिए किया जाता है। ठग व्यक्ति की निजी जानकारी जैसे नाम, चेहरा, जन्म तारीख, पता या क्रेडिट और डेबिट कार्ड आदि चुराकर इनका इस्तेमाल कुछ ख़रीदारी, क्रेडिट कार्ड या मेडिकल हेल्थ बीमा आदि लेने के लिए कर सकता है।

परंतु इस तरह की धोखाधड़ी को कई तरह से अंजाम दिया जा सकता है। जानिए इन ज़रियों के बारे में और साथ में जानिए बचने के तरीके भी।

वित्तीय पहचान की चोरी

ठगी का यह ज़रिया सामान्य है। इसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की जानकारी वित्तीय फ़ायदा पाने के लिए चुराता है, जैसे कि बैंक अकाउंट, क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पैसे चुराना या यूपीआई के ज़रिए खाता ख़ाली कर देना या किसी और के नाम के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके ख़रीदारी करना। इसके अलावा ठगी करने वाला व्यक्ति की निजी जानकारी की मदद से क्रेडिट कार्ड ले सकता है और उसका इस्तेमाल कर सकता है, जिसका बिल पीड़ित व्यक्ति को भुगतना पड़ सकता है।

कैसे बचें - समय-समय पर अपने बिल, स्टेटमेंट और बैंक खाते जांचते रहें। कई बार ठग छोटे-छोटे पैसों के लेन-देन से शुरुआत करते हैं जिस पर खाता धारक का ध्यान नहीं जाता। यदि आप ऐसा कोई लेन-देन देखते हैं जो कि आपने नहीं किया है तो बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी से तुरंत संपर्क करें। साथ ही, बैंक और आधार से संबंधित जानकारी किसी से कभी साझा न करें।

मेडिकल पहचान की चोरी

कोई व्यक्ति (ठग) आपकी निजी जानकारी जैसे नाम, हेल्थ इंश्योरेंस अकाउंट नंबर या मेडिकेयर नंबर का इस्तेमाल डॉक्टर से जांच कराने, दवाई लेने, इंश्योरेंस पर दावा करने या कोई अन्य चिकित्सीय सेवा लेने के लिए कर सकता है। इससे भविष्य में मेडिकल सेवा लेना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा और क्रेडिट स्कोर भी इससे प्रभावित होगा।

कैसे बचें - मेडिकल दस्तावेज़, जीवन बीमा के कागज़ात, दवाई की पर्ची, हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड, मेडिकल बिल और मेडिकल से संबंधित अन्य दस्तावेज़ों को सुरक्षित स्थान पर रखें। इन्हें ई-मेल या किसी ड्राइव में न रखें। बिल या मेडिकल के दस्तावेज़ फेंकना है तो उन्हें जला दें या कतरन कर दें। इसके अलावा ठग फोन, मैसेज या ई-मेल पर आप से आपकी चिकित्सीय जानकारी लेने की कोशिश कर सकता है, सो सतर्क रहें।

अपराध के लिए चोरी

गुनहगार ख़ुद के बचाव में या तहकीकात के दौरान किसी व्यक्ति की जानकारी जैसे उसका नाम या पता इस्तेमाल कर सकता है। मिसाल के तौर पर अपराध को अंजाम देने के बाद व्यक्ति की आईडी जैसे ड्राइविंग लाइसेंस या आधार कार्ड आदि उस स्थान पर फेंक सकता है।

कैसे बचें - अपनी सारे आईडी संभालकर रखें। इन्हें वॉलेट में पैसों के साथ न रखें क्योंकि इससे इनके गिरने की आशंका अधिक होती है। यदि आपकी कोई आईडी कहीं गिर गई है या गुम हो गई है तो फौरन पुलिस में शिक़ायत करें। सोशल मीडिया पर आईडी से संबंधित जानकारियां साझा न करें। मिसाल के तौर पर कुछ लोग पहला ड्राइविंग लाइसेंस पाने पर ख़ुशी ज़ाहिर करने के लिए फोटो सहित सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। किंतु ऐसा करके आप अपनी निजी जानकारी ख़तरे में डाल सकते हैं।

ऑनलाइन धोखाधड़ी

इंटरनेट के ज़रिए धोखाधड़ी करना सबसे आसान है। ठग किसी व्यक्ति की फर्ज़ी आईडी बनाकर या आईडी हैक करके उसके परिचितों से पैसों की मदद मांग कर सकता है। इसी तरह ठग किसी कंपनी या जन सेवा का नाम और लोगो इस्तेमाल करके ई-मेल के ज़रिए नाम, पासवर्ड या बैंक की जानकारी की मांग करता है। सोशल माीडिया पर फर्ज़ी नौकरियां या विज्ञापन भी धोखाधड़ी करने का तरीका है।

कैसे बचें - अगर कोई व्यक्ति ख़ुद को किसी कंपनी या सरकारी कर्मचारी बताते हुए निजी जानकारी जैसे आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी मांगता है तो उसकी बातों में न आएं। अगर कोई सुविधा बताने के लिए भी आईडी और पासवर्ड की मांग करता है तो उससे जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर नौकरियों के विज्ञापन पर विश्वास करके रेज़्यूमे भेजने के बजाय वेबसाइट पर जाकर नौकरी के लिए आवेदन करें। सॉफ्टवेयर और एप्स अपडेट करते रहें।

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