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  • If The Daughter Remains A Daughter Even After Entering The New House, Then The Relationship Becomes Easy, Verma Ji Also Understood This.

ज़िंदगीनामा:बेटी नए घर में प्रवेश करने के बाद भी बेटी ही रहे तो रिश्ते सरल बनते हैं, ये वर्मा जी भी समझ चुके थे

लाल बहादुर श्रीवास्तव16 दिन पहले
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बहुत दिनों बाद मेरे एक मित्र वर्मा जी मुझे प्रातःकाल वॉक पर मिल गए। देखते ही बोले, ‘आप तो अब ससुर बनने वाले हो? सुना है आपके बेटे की‌ शादी जल्द होने वाली है। ससुर के तो अलग अंदाज़ और झटके रहते हैं। आपके भी बदल जाएंगे।’ मैने कहा- ‘ससुर शब्द तो मुझे असुर जैसा लगता है। मुझे ससुर नहीं, बेटी का पिता बनकर रहना है। पिता बनकर अपनी बहू को बेटी-सा असीम प्यार देना है। बेटियां पिता के दिल का टुकड़ा हुआ करती हैं। बेटियां जब घर से बिदा होती हैं तो उनके दर्द को भला आप क्या जानो वर्मा जी? इसीलिए मैं नहीं चाहता कि जो बिटिया मेरे घर आ रही है, उसे पिता के स्नेह से बिदाई मिले।’ वर्मा जी सोचकर बोले- ‘आप सचमुच बड़े ही भाग्यशाली हैं जो आपके यहां बेटी आ रही है।’

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