सेहत:प्री-डायबिटिक हैं, तो वक़्त रहते संभलना ही बेहतर है, जानिए कैसे

डॉ. डेविड चंडी, एंडोक्रिनोलोजिस्ट सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई | इनपुट्स : डॉ. सचिन गुप्10 दिन पहले
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  • आज की बदलती जीवनशैली में लोग 35 से 40 बरस की उम्र में ही मधुमेह से ग्रस्त होने लगे हैं।
  • यदि समय रहते प्री-डायबिटीज़ की स्थिति का पता लग जाए तो पूर्ण डायबिटीज़ को रोका जा सकता है।

प्री डायबिटीज़़ वह अवस्था है जब व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं होता कि उसे टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीजों में शामिल किया जाए। एक तिहाई से अधिक वयस्क आबादी प्री-डायबिटिक हो सकती है। प्री-डायबिटीज़ की ज़द में आ चुके करीब 80 फीसदी लोग नहीं जानते कि वह इससे पीड़ित हैं। आहार में बदलाव, संयमित दिनचर्या का पालन करके टाइप-2 डायबिटीज़ से बचा जा सकता है। प्री-डायबिटिक अगर ख़ुद पर ध्यान नहीं देंगे, तो 5-7 साल के भीतर वे पूर्ण रूप से डायबिटीज़ का शिकार हो सकते हैं। दूसरी तरफ़, प्री-डायबिटिक अवस्था में ही सचेत होकर पूर्ण मधुमेह की संभावना को 70-90 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
प्री डायबिटीज़ या इम्पेयर्ड ग्लूकोज़ टालरेंस टेस्ट
शुगर का खाली खाने के
स्तर पेट 2 घंटे बाद
नॉन डायबिटिक 110 मि ग्रा 140 मि ग्रा
प्री डायबिटिक 110-125 140-199
डायबिटिक 126+ 200
इस चार्ट में डायबिटीज़ संभावित ब्लड शुगर की रीडिंग दी गई है। इनके नतीजों में शर्करा का स्तर भूखे पेट 110 से 126 मिली ग्राम तथा ग्लूकोस टालरेंस टेस्ट के पश्चात 140 से 199 मिली ग्राम है।

ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस टेस्ट

अधिक वज़न हो, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करते हों, धूम्रपान की लत, परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो या बहुत ज़्यादा तनाव में रहने वाले साल में 1 या 2 बार ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस टेस्ट कराएं तो बेहतर हैं। ऊपर बताई स्थितियां मधुमेह को न्योता दे सकती हैं। टेस्ट के लिए ख़ाली पेट शुगर की जांच कराएं। इसके बाद 75 ग्राम ग्लूकोज़ को एक 1 गिलास पानी में घोलकर 5 मिनट में पी लें व दो घंटे के बाद ब्लड शुगर की जांच करवाएं। इस बीच कुछ न खाएं। इस टेस्ट से पता चलता है कि आपका शरीर ब्लड शुगर के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया कर रहा है। इस टेस्ट को करने के 8 से 12 घंटे पहले तक कुछ नहीं खाना होता है, इसलिए इस टेस्ट को कराने का सबसे अच्छा समय सुबह का है। टेस्ट जिन पाबंदियों के साथ कराया जाना चाहिए, उनका पूरी कड़ाई से पालन करें। इसमें चूक करने से नतीजों पर असर पड़ सकता है, जो डायग्नॉसिस को प्रभावित कर सकते हैं। - दवाएं निर्देशानुसार लें... हॉर्मोन की अनियमितताएं जैसे मधुमेह या थायरॉइड आदि की दवाएं समय व भोजन की पाबंदी की दरकार रखती हैं। इन मामलों में डॉक्टर के बताए निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

क्या करें...

वजन नियंत्रण
हर मोटा व्यक्ति डायबिटिक होगा ऐसा ज़रूरी नहीं है, लेकिन डायबिटीज़ से जूझ रहे 10 में से 8 लोग मोटापे से ग्रस्त होते हैं। यदि आपका वज़न अधिक है और प्री डायबिटिक हैं, तो वज़न कम करके ब्लड शुगर नियंत्रित कर सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी संतुलित होगा।
व्यायाम को शामिल करें
नियमित रूप से व्यायाम करने से वज़न कम करने और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। प्रतिदिन 45 मिनट पैदल चलें। रात को खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतराल रखिए। सुबह का एक घंटा व्यायाम और मेडिटेशन को दें। खाने के बाद 30 मिनट तक बैठना या लेटना नहीं चाहिए।
जूस नहीं फल चुनिए
फलों का रस या नियमित कोल्ड ड्रिंक्स पीने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। जूस के बजाय फलों का सेवन करें और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दूर रहिए। चीकू और किशमिश शुगर बढ़ाते हैं, उन्हें खाने से बचिए।
तीन भागों में बांटकर खाएं खाना
खाना एक साथ खाने के बजाय तीन मुख्य भोजन और दो बार हल्के स्नैक्स लें। सुबह उठने के दो घंटे के भीतर नाश्ता अवश्य कर लें।

ऐसा हो आहार
भोजन में मोटा अनाज और साबुत दाल को शामिल करें। रोटी बनाने के आटे में गेहूं के बजाय ज्वार, बाजरा आदि का प्रयोग करें। मिठाई, बेकरी उत्पाद और मैदे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। मुख्य आहार में प्रोटीन और फाइबर की वस्तुओं को शामिल करें। सिर्फ़ रोटी सब्ज़ी न खाएं, दाल, पनीर, दही, सलाद साथ में लें। खाने के साथ 1 चम्मच मेथी दाने का उपयोग करें। इससे ब्लड शुगर नियंत्रित होती है।
अमिता सिंह, आहार विशेषज्ञ

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