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  • In This Phase Of Corona, You Should Strengthen The Mind And The Breath, By Controlling The Breath, You Can Keep The Mind Calm, For This, A Few Exercises Are Helpful.

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व्यायाम:कोरोना के इस दौर में सबसे अधिक मज़बूती चाहिए मन की और सांसों की, सांसों पर काबू करके मन को शांत रख सकते हैं, इसके लिए चंद व्यायाम मददगार हैं

अजिता मिश्रा, पल्मोनरी फिज़ियोथैरेपिस्ट ब्यूटको प्रैक्टिशनर एंड ट्रेनर (ब्रेथवर्कर)7 दिन पहले
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  • दुनिया के हर कोने से उथल-पुथल की ख़बरें आ रही हों, अपने आस-पास भी अफ़रा-तफ़री मची हो, तब मन के मथे जाने को कैसे रोका जाए? यह संभव है, योग की तर्ज़ पर सांसों पर काबू पाकर।

हम जानते हैं कि जब मन घबराता है, तो सांसें तेज़ हो जाती हैं। तो इस प्रक्रिया को उलटा करके देखते हैं, गर सांसों को काबू में कर लें, तो मन शांत होने लगता है। श्वास के व्यायाम कोरोना के दौर में ‘एक पंथ, दो काज’ वाला लाभ देते हैं। एक तो इनके करने से मन शांत होगा, दूसरे, अपने श्वास लेने की प्रणाली प्रबल होगी, फेफड़े मज़बूत होंगे। चंद व्यायाम के ज़रिए देखें...

तनाव को कम करें

पालथी लगाकर या पद्मासन में बैठ जाएं। शरीर को पूरी तरह ढीला रखें। कंधों को तना हुआ ना रखें। अब एक हाथ अपने पेट पर रखते हुए नाक से धीमी गति से लेकिन गहरी सांस लें। सांस लेते समय पेट वाला हाथ ऊपर उठेगा, इसे महसूस करें। धीमी गति से सांस छोड़ें। ऐसा करते हुए मन शांत होगा।

सांस पर ध्यान

पालथी लगाकर बैठें। आंखें बंद करें और अपना पूरा ध्यान सांस के लिए जाने और छोड़ने पर केंद्रित करें। इस क्रिया में आप विविधता ला सकते हैं। नाक से ही सांस लेनी और छोड़नी है, यह ज़रूर याद रखें। सांस को लेते समय कभी गति कम कर दें यानी धीमे सांस लें और कभी थोड़ी देर सांस को रोककर रखें।

हर कोशिका में प्राण

सुकून से पीठ के बल लेट जाएं। आंखें बंद करके धीमे से सांस लेते हुए अपने पैरों के पंजों से लेकर माथे तक को रिलैक्स होता हुआ महसूस करें। पहले पंजों की उंगलियों, फिर पंजों, पैरों, कमर, पेट, कंधे, सीने, गले, चेहरे, माथे, आंखें, होंठ सब पर बारी-बारी सिलसिलेवार सांस लेते हुए ध्यान जमाएं और रिलैक्स हों।

सांस की साधना
पालथी लगाकर बैठें। हथेलियां खुली हुई, घुटनों पर रखें और कंधे को पूरी तरह रिलैक्स करें।
अपनी दाईं मुट्‌ठी बांध लें और अब कोशिश करें कि आप अपनी बांईं नसिका से सांस लें (शुरुआत में आपको अभ्यास करना होगा) इस तरह मानें कि सांस नाक से आते हुए शरीर की पूरी बांईं तरफ़ में जा रही है। पैरों से लेकर सिर के बांए हिस्से तक। कल्पना करें जैसे कोई रोशनी की किरण हो, या कोई रंग या पानी की धार जो बांईं तरफ़ बह रही है।
अब बांईं मुट्‌ठी बांध लें और दाईं को खोलते हुए धीमे-धीमे सांस को दाईं नसिका से बाहर निकलता हुआ महसूस करें। अब यही क्रिया दाईं तरफ़ से दोहराएं। दाईं तरफ़ से सांस लेते हुए, बाईं मुट्‌ठी बंद कर लें। फिर बांई तरफ़ से सांस छोड़ें।
इस क्रिया को शुरूआत में पांच बार करें और फिर गिनती बढ़ाएं। तनाव ही नहीं भागेगा, अनियंत्रित सांस पर भी काबू आ जाएगा।

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