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चर्चित शब्द, चर्चित चेहरा:तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं का बड़ा योगदान है, लेकिन फिर भी इन्हें उनका क्षेत्र नहीं माना जाता

13 दिन पहले
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चर्चित शब्द

विज्ञान में स्त्री

विज्ञान और तकनीक में महिलाओं के उल्लेखनीय योगदान के बावजूद इन्हें आमतौर पर उनका क्षेत्र नहीं माना जाता। यह भी लिंगभेद का एक रूप है। इस ग़लत धारणा को दूर करने और ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं और बालिकाओं को विज्ञान, तकनीक, गणित, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में आने के लिए प्रोत्साहित करने हर वर्ष 11 फरवरी को 'विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्रसंघ महासभा (यूएनजीए) ने 2015 में यह दिवस मनाए जाने का संकल्प लिया और 2016 में इसे पहली बार मनाया गया। इसे यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र-महिला द्वारा लागू किया जाता है। लैंगिक समानता यूनेस्को की वैश्विक प्राथमिकता है। इस लक्ष्य के साथ वह लड़कियों को शिक्षा में सहायता के साथ अवसर प्रदान करता है। हर वर्ष इस दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं और बालिकाओं को याद किया जाता है। 2021 में इसकी थीम 'कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी महिला विज्ञानी' रखी गई। इस दिन का उद्देश्य स्त्रियों-बालिकाओं की विज्ञान में भागीदारी के लिए पूर्ण और समान पहुंच को बढ़ावा देना है। इस तरह यह लैंगिक समानता के लिए भी प्रतिबद्ध है।

चर्चित चेहरा

चंदन मैती

शिक्षक का काम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, समाज को जागरूक करना और सही राह दिखाना भी उसकी ज़िम्मेदारी है। इस लिहाज़ से चंदन मैती मिसाल हैं, जो अपने क्षेत्र में ग्रामीणों को मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूक करते हुए बेटियों के संरक्षण में जुटे हैं। प. बंगाल के दक्षिणी 24 परगना स्थित मथुरापुर में कृष्णचंद्रपुर हाईस्कूल के हेडमास्टर मैती 2003 से इंसानी ख़रीद-फ़रोख़्त के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे हैं। इस तस्करी का शिकार मुख्यत: 14 से 18 साल की बालिकाएं होती हैं। चंदन भीतरी गांवों में जाकर ग्रामीणों को मानव तस्करों से बचने के उपाय बताते हैं। उन्हाेंने लोगों को अपना फोन नंबर दे रखा है और बचाव व पुनर्वास में मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। वे बाल विवाह रोकने के लिए भी समझाते हैं, जो कई बार बच्चियों को बेचे जाने का ही एक रूप होता है।​​​​

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