पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Madhurima
  • Know About The Main Forms And Beliefs Of Ganesh Ji, Also Keep In Mind Important Things Like Not Offering Tulsi In Worship.

गणेश जी के रूप और मान्यताएं:गणेश जी के प्रमुख रूप और मान्यताएं के बारे जानें, पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाने जैसी जरूरी बातों का भी ध्यान रखें

आचार्य राजेश7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

अष्टविनायक मंदिर

महाराष्ट्र में गणेश जी अष्टविनायक रूप में विराजित हैं। महाराष्ट्र के अष्टविनायकों में शामिल हैं -

मोरेगांव के मयूरेश्वर, थेऊर के चिंतामणि गणेश, लेण्याद्री के गिरिजात्मज, ओझर के विघ्नेश्वर गणेश, राजणगांव में महागणपति जी, महड़ में वरदविनायक मंदिर, पाली में बल्लालेश्वर गणेशजी और सिद्धटेक में सिद्धिविनायक। इन सभी मंदिरों की अपनी विशेषताएं हैं, जैसे- मयूरेश्वर गणेश जी की सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलि, इन चारों युगों में मान्यता है तथा अष्टविनायक में ये पहले माने जाते हैं। कथाओं के अनुसार, विष्णु जी को सिद्धिविनायक मंदिर में सिद्धियां प्राप्त हुई थीं, इसलिए सिद्धटेक का मंदिर सिद्धिविनायक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मंदिरों का महत्व

  • महड़ ज़िले में वरदविनायक गणेश सभी प्रकार के वर देने वाले हैं। यहां पर गृत्समद ऋषि ने ‘गणानां त्वा गणपति हवामहे’ ऋचा की रचना की थी। यहां पर आज भी लोग विशेषकर कोर्ट-कचहरी से सम्बंधित मामलों में अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु आते हैं।
  • चिंचवड के मंगलमूर्ति गणेश जी पद्मासन मुद्रा में विराजित हैं। मनोकामनाएं पूर्ण होने के बाद यहां कमलदल चढ़ाया जाता है। बल्लालेश्वर मंदिर में सूर्य की सबसे पहली किरण मूर्ति पर पड़ती है इसलिए यहां प्रात: दर्शन का विशेष महत्व होता है।
  • ओझर में गणेशजी का विघ्नेश्वर स्वरूप है। यहां पर भगवान ने विघ्नासुर नामक राक्षस का वध किया था।
  • लेण्याद्री में गिरिजात्मज गणेश जी उस स्वरूप में विराजित हैं जिस स्वरूप में माता पार्वती ने उन्हें बनाया था।

उज्जैन के षड् विनायक

  • बाबा महाकाल की नगरी में षड् विनायक गणेशजी मौजूद हैं। मोदविनायक गणेश कोटितीर्थ में हैं जहां का जल महाकाल को चढ़ाया जाता है।
  • प्रमोद विनायक को लड्‌डू विनायक भी कहते हैं। यहां विशेषकर मोटी बूंदी का लड्‌डू चढ़ाया जाता है। समुख विनायक को थल महागणपति भी कहते हैं और यहां पर लोग अपने घर की मनोकामना लेकर जाते हैं।
  • दुर्मुख विनायक किसी भी प्रकार के कष्ट एवं बीमारियों को दूर करते हैं।
  • विघ्नविनायक गणेश मंदिर में मान्यता है कि यहां पर हर मनोकामना पूर्ण होती है। साथ ही यह भी जानने योग्य है कि भगवान रिद्धि-सिद्धि सहित जहां पर विराजते हैं वहां पर सामने की ओर द्वार पर मूषक स्थित होता है। अन्य मंदिरों में भगवान के दाईं ओर मूषक विराजते हैं।

इंदौर के खजराना गणेश

  • मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर देश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में शामिल है।
  • मंदिर स्थापना 1735 ईस्वी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा की गई थी। यहां पर महाराष्ट्रियन संस्कृति के अनुसार मोदक भी चढ़ाए जाते हैं और मालवा की संस्कृति के अनुसार बाटी का चूरमा भी चढ़ाया जाता है।
  • बूंदी एवं मोतीचूर के लड्‌डुओं का भोग भी यहां लगाया जाता है। स्थानीय लोग किसी भी शुभकार्य का आरम्भ मंदिर में आराधना के बाद करते हैं एवं नए वाहन आदि की पहली पूजा लोग यहीं करते हैं। यहां सायंकाल भव्य आरती होती है। लोगों द्वारा दान आदि के मामले में भी इस मंदिर की गिनती भारत के प्रमुख मंदिरों में होती है।

पूजा में रखें ध्यान

भगवान गणेश की साधना में विशेष रूप से इन बातों का ध्यान रखते हैं : गणेश जी को कभी तुलसी नहीं चढ़ाते हैं, गणेश जी को दूर्वा प्रिय होती है। 11 दूर्वा या 21 दूर्वा की एक पोटली बनाकर भगवान को समर्पित की जाती है। षोडशोपचार से भी भगवान गणेश का पूजन करते हैं।

  • नियमानुसार भगवान को मोदक चढ़ाए जाते हैं। मोदक एवं बूंदी के लड्‌डू का भी महत्व होता है। दक्षिण भारत में अन्य प्रकार के लड्‌डू भी चढ़ाए जाते हैं क्योंकि देशकाल एवं परिस्थिति के अनुसार उपलब्ध चीज़ें चढ़ाई जाती हैं।
  • मोतीचूर के लड्‌डू मालवा क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। चूरमे के लड्‌डू राजस्थान में प्रसिद्ध हैं। गणेशजी को पीठी (मूंग दाल) के लड्डू चढ़ाए जाते हैं, बेसन के लड्‌डू चढ़ाने का विधान नहीं है। ये हनुमान जी को चढ़ाए जाते हैं।
  • हल्दी कुमकुम मिट्‌टी की प्रतिमा को ही लगाए जाते हैं। सिंदूर आदि का का लेप इन पर नहीं करते हैं। साथ ही भगवान की आरती दीपक से करनी चाहिए। गाय के घी का दीपक हो तो श्रेष्ठ है। कपूर से नहीं करनी चाहिए, सिर्फ़ यज्ञ अनुष्ठान के समय ही कपूर से उनकी आरती की जा सकती है।
खबरें और भी हैं...