सेहत:खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला एल्यूमीनियम आपकी सेहत को किस क़दर नुक़सान पहुंचा रहा है, जानिए

डॉ. राजन ढींगरा, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पारस जेके हॉस्पिटल, उदयपुर17 दिन पहले
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भोजन का पोषण उसकी सामग्री चुनाव के साथ-साथ उसे पकाने के तरीक़े पर भी निर्भर करता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि हम जिस बर्तन में भोजन पका रहे हैं, उससे भी पोषण प्रभावित होता है? दरअसल, हम जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके तत्व भोजन में स्वत: आ जाते हैं। और यही तत्व भोजन द्वारा शरीर में भी जाते हैं। इस लिहाज़ से एल्यूमीनियम के बर्तन असावधानी बरतने पर काफ़ी हानिकारक हो सकते हैं।
कैसे हानिकारक है एल्यूमीनियम
यह तंत्रिका तंत्र पर बुरा प्रभाव डालता है। इससे याददाश्त की कमी, हड्डियों का कमज़ोर होना, त्वचा पर खुजली, डैंड्रफ, पेट से सम्बंधित बीमारियां हो सकती हैं। यदि इसका ज़्यादा इस्तेमाल किया गया तो किडनी तक फेल हो सकती है, क्योंकि खाने से आयरन और कैल्शियम जैसे तत्वों को एल्यूमीनियम सोख लेता है। वहीं जब इसके कण पेट में जाते हैं तो ये शरीर का आयरन और कैल्शियम भी सोखना शुरू कर देते हैं। नतीजतन शरीर में इनकी कमी होने लगती है और कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं।

इस्तेमाल में बरतें सावधानियां

एल्यूमीनियम बॉक्साइट से बना होता है। यदि खाना बनाते समय इसके कण धीरे-धीरे पेट में जाकर जमा हो जाएं तो ये कण मूत्र के द्वारा बाहर भी नहीं निकलते। इससे शरीर के तंत्रिका तंत्र को नुक़सान पहुंचता है साथ ही ये कण मस्तिष्क को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं। आगे चलकर ये अल्ज़ाइमर का रूप ले लेता है। लिहाज़ा एल्यूमीनियम के बर्तनों में खट्‌टे खाद्य पदार्थ रखने की सख़्त मनाही है, क्योंकि इसके कारण इनके कण जल्दी खाने में मिल जाते हैं। खाना बनाते समय खाद्य पदार्थों को चलाने के लिए स्टील की कलछी का इस्तेमाल करने के बजाए लकड़ी की कलछी का इस्तेमाल करें। स्टील या अन्य धातु की कलछी बरतन की परत को खुरच देती है जिससे खाने के साथ एल्यूमीनियम शरीर में अधिक पहुंचता है।

तेज़ आंच में खाना पकाने से भी बचें। बहुत देर तक पकने वाला भोजन इसमें बिल्कुल न पकाएं।

यदि एल्यूमीनियम के बर्तन में खाना बना रहे हैं तो उस खाने को ज़्यादा देर तक उसी बर्तन में न रखें। बहुत देर तक गर्म खाने को उसी बर्तन में रखेंगे तो उसके अधिक से अधिक कण खाने में घुल जाएंगे।

शोधकर्ताओं के अनुसार चाय, कॉफ़ी, अम्लीय खाद्य पदार्थ, सिरका और उससे जुड़े भोज्य पदार्थ, चटनी, टमाटर की ग्रेवी या सॉस आदि एल्यूमीनियम बर्तन में नहीं बनाने चाहिए।

विकल्प जिन्हें अपनाना चाहिए
 इसके स्थान पर एनोडाइज़्ड एल्यूमीनियम से बने बर्तनों का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि बेहतर होगा कि स्टील, लोहा और मिट्‌टी के बर्तनों का प्रयोग ज़्यादा से ज़्यादा किया जाए।
 एल्यूमीनियम फॉइल का इस्तेमाल भी हानिकारक है। जब लंबे वक़्त तक इसमें खाना लपेटते हैं तो इसके कण भी भोजन में मिल जाते हैं। लिहाज़ा फॉइल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
 एल्यूमीनियम का इस्तेमाल बिल्कुल बंद करना चाहते हैं तो इन्हें किसी बर्तन की दुकान पर बेचकर इनके बदले नए बर्तन ख़रीद सकते हैं।

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