पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Madhurima
  • Know The Reason Behind Mohanji's Habit Of Skipping And Learn About The Boys Who Have Become Angels In The New City, Through These Experiences

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

अनुभव:मोहन जी के कंजूसी करने की आदत के पीछे छिपी वजह और नए शहर में देवदूत बनकर आए लड़कों के बारे में जानिए, इन अनुभवों के ज़रिए

संदीप आनंद, डॉ. महिमा श्रीवास्तव18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

धन का उपयोग समझे...

मोहन जी हमारे पड़ोस में रहते हैं। संयोग से हम दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं। वो बड़े कंजूस किस्म के इंसान हैं। ऑफिस में अक्सर उनकी कंजूसी की कहानियां गूंजती रहती हैं। हमारे ऑफिस का रिवाज़ है कि जब भी किसी स्टाफ के साथ कुछ भी अच्छा घटता है तो वो सभी को पार्टी देता है। मोहन जी इस मामले में काफ़ी लकी रहे हैं। आज तक उन्होंने ख़ुद को पार्टी से दूर रखा है। पार्टी लेने में भी उनकी कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं रहती है। लिहाज़ा, देने के अवसर पर भी कोई उनसे सीधे-सीधे पूछ नहीं पाता। इसीलिए ऑफिस स्टाफ इस बात को लेकर अक्सर उन पर ताने कसते हैं, पर वो जवाब में केवल चेहरे पर हल्की मुस्कान ले आते हैं। तकरीबन छह महीने पहले की बात है। मेरा भतीजा बिट्टू छत से उतरते वक़्त सीढ़ियों से फिसल गया। उस समय घर में मां के अलावा और कोई नहीं था। बिट्टू को ज़ख़्मी देखकर मोहन जी ने उसे गोद में उठा लिया और अस्पताल की तरफ़ भागे। तब तक मां ने घर के सभी सदस्यों को फोन कर दिया था। हम दौड़े-दौड़े अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर साहब ने बताया कि बिट्टू को पैर और कमर में गंभीर चोटें लगीं हैं, अभी उसे अस्पताल में ही रहना होगा। यह कहकर डॉक्टर साहब चले गए। सारे इंतज़ाम और इलाज का लम्बा-चौड़ा बिल हमारे पास आया। बिल देखकर हमारे पैरों तले की ज़मीन खिसक गई। हम सोच में पड़ गए कि इतनी मोटी रक़म का तुरंत इंतज़ाम कैसे होगा। उस दिन घर में इसी बात को लेकर चर्चा चल रही थी कि अचानक मोहन जी घर पर आए और मेरे हाथों में पचास हज़ार रुपए थमाते हुए बोले -‘मित्र, इसे रख लो। बिट्टू के इलाज में काम आएंगे।’ एक पड़ोसी होने के फ़र्ज़ को इस हद तक निभाते देख, मेरी ज़ुबान बंद हो गई। मैं उन्हें मना नहीं कर पाया। मेरी चुप्पी से उन्हें शायद लगा हो कि मैं उनकी कंजूस वाली साख को लेकर कुछ सोच रहा हूं, सो उन्होंने आगे कहा - ‘मित्र, तुम लोगों को हमेशा शिकायत रहती थी कि मैं पार्टियों में ज़्यादा इंटरेस्ट क्यों नहीं लेता तो इसका कारण यही है कि हम जैसी मिडिल क्लास फैमिली को ख़र्च सोच-समझकर करना चाहिए। कब पैसे की ज़रूरत पड़ जाए, कोई नहीं जानता। हमारे पास आमदनी का निश्चित ज़रिया ही तो है। उसी का आसरा है, इसीलिए मैं फिज़ूलख़र्ची से दूर भागता हूं।’ ख़र्चे और बचत को लेकर मोहन जी के नज़रिए ने मुझे नई दिशा दे दी थी।

देवदूत से लड़के

घटना तब की है जब मैं अपने पति व तीन वर्षीय पुत्र के साथ पहली बार दिल्ली किसी कार्यवश गई थी। हम वहां राजस्थान हाउस में ठहरे थे। मेरे पति के बचपन के मित्र को जब हमारे वहां आगमन का पता चला तो उन्होंने हमें अपने घर रात्रि- भोज पर आमंत्रित किया। हम शाम को उनके घर जा पहुंचे। अनेक वर्षों बाद पुराने मित्र मिले थे तो सब बातों में लग गए। मेरा पुत्र, मित्र के दो हमउम्र बच्चों के साथ बाहर खेलने चला गया। भोजन तैयार होने पर मित्र की पत्नी ने बच्चों को पुकारा। उनके दोनों बच्चे तो अंदर आ गए किन्तु मेरा बेटा नदारद था। घबराकर मैंने उन बच्चों से पूछा तो वे इतना ही बता पाए कि वे दोनों घर के आसपास की सड़कों पर साइकिल चला रहे थे व मेरा पुत्र उनके पीछे- पीछे दौड़ रहा था। फिर वह कहां पीछे छूट गया, यह उनको नहीं पता था। हम लोग बाहर आकर पुत्र को खोजने लगे एक अनजान शहर की अनजान काॅलोनी में। मुझे याद है मैं बेटे का नाम ज़ोर-ज़ोर से पुकारती हुई उन गलियों में पागलों की भांति भटक रही थी, जिनसे मैं स्वयं भी परिचित ना थी। मेरे पति व उनके मित्र स्कूटर पर निकल गए थे बालक की खोज में। अज्ञात आशंका से मैं बेहद घबराई हुई थी। अंधेरा छा रहा था व एक घंटा व्यतीत हो चुका था। तभी मुझे सामने से दो किशोर स्कूटर पर आते दिखे। स्कूटर पर आगे, चटक रंग की टी- शर्ट पहने मेरा बालक खड़ा था। मैंने ज़ोर-ज़ोर से हाथ हिला व आवाज़ दे उन्हें रोका। मेरा बेटा तत्काल स्कूटर से कूद कर मेरी गोद में आ गया। उन लड़कों ने बताया कि वे अपने घर के बाहर अपनी कार साफ़ कर रहे थे, जब उन्होंने एक नन्हे बालक को रोते हुए सामने की सड़क पर से गुज़रते हुए देखा। उन्होंने बच्चे को रोक कर, उससे पूछताछ की तो उस बालक ने बताया कि उसके मम्मी- पापा खो गए हैं, मिल नहीं रहे हैं। उन्होंने बालक को पानी पिलाया, तसल्ली दी व उस बच्चे के साथ आसपास की गलियों में उसके अभिभावक को ढ़ूंढने का प्रयास कर रहे थे, जब मैंने उन्हें रोककर बालक को पहचाना। मेरी आंखों से ख़ुशी व राहत के आंसू बह रहे थे व मुंह से शब्द भी नहीं फूट पा रहे थे। मैं उन्हें धन्यवाद दूं इससे पहले ही वे दोनों लड़के स्कूटर पर सवार रवाना हो गए। मेरे जीवन में वे देवदूत बनकर आए थे। वे आज जहां भी हों, मेरी दुआएं उन तक पहुंचें।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज आपका अधिकतर समय परिवार तथा फाइनेंस से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में व्यतीत होगा। और सकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। किसी भी परेशानी में नजदीकी संबंधी का सहयोग आपके लिए वरदान साबित होगा।। न...

    और पढ़ें