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देश चार सबक अपार:जापान, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से सीखें सभ्यता, इन्हें सीखकर खुद को और अपने देश को बनाएं बेहतर

तेजस्वी मेहता2 महीने पहले
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सीखने के लिए आवश्यकता होती है खुली दृष्टि और जिज्ञासा की। दुनिया में कितना कुछ है सीखने को, यदि प्रत्येक देश से हम थोड़ा-थोड़ा भी सीखें तो बहुत सीख सकते हैं। देशों की विभिन्नता संस्कृति और शिष्टाचार में भी विविधता लेकर आती है। बरसों से हो रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान का परिणाम ही है कि किसी देश से हम कुछ लेते हैं, किसी को कुछ देते हैं और विश्व की संज्ञा में एकरूप हो जाते हैं। किसी नियम या व्यवहार को आत्मसात करके यदि हमारा व्यक्तित्व निखरता है, समाज बेहतरी की ओर बढ़ता है तो उसे सीखने में देर कैसी।

जापानी शिष्टाचार

  • जापान में यदि आप डेट पर जा रहे हैं तो बिल का भुगतान दोनों आधा-आधा करते हैं ताकि किसी एक पर भार न पड़े। इस शिष्टाचार को ‘बेत्ज़-बेत्ज़’ कहते हैं।
  • स्वच्छता के लिहाज़ से भी जापानी अदब श्रेष्ठ हैं। यहां आप किसी रेस्तरां, दुकान, बाग़ या किसी परिचित के घर जाते हैं तो बाहर चप्पल उतारना अनिवार्य है। गंदगी और कीटाणुओं को आप इन जगहों के भीतर नहीं ला सकते। इन सभी स्थानों पर आप जब चप्पल उतारेंगे, तो भीतर पहनकर जाने के लिए भी आपको साफ़ चप्पलें रखी हुई मिलेंगी।
  • जापान में गर्म पानी के झरनों में घंटों बैठना आम है लेकिन सार्वजनिक जलस्रोत का उपयोग यहां नहाने के लिए नहीं बल्कि आराम के लिए होता है। ऐसा कोई भी जलस्रोत, जो कि सार्वजनिक है, वहां पानी में जापानी पहले से स्नान करके ही उतरते हैं ताकि पानी गंदा न हो। ऐसी जगहों पर साबुन का उपयोग भी वर्जित होता है।
  • रेस्तरां में आपको खाने से पहले ‘ओशीबोरी’ अर्थात एक गीला तौलिया दिया जाता है। यह तौलिया मौसम के अनुसार गर्म या ठंडे पानी से भीगा होता है। भोजन से पूर्व इससे हाथ पोंछे जाते हैं। इसके उपयोग से पानी की बचत के साथ ही हाथ भी साफ़ होते हैं।
  • लोगों के बीच नाक साफ़ करना या छिनकना भी बुरे बर्ताव की श्रेणी में आता है, इसके लिए शौचालय का इस्तेमाल करना आवश्यक है।
  • जापान में टिप देना अपमान करने जैसा है। यदि आप किसी ड्राइवर से बहुत अधिक प्रसन्न हैं और टिप देना ज़रूरी ही लगता है तो मुद्रा को एक लिफ़ाफ़े में डालकर गाड़ी में रखी ट्रे में ससम्मान रखें। रेस्तरां में भी आपको यही व्यवहार अपनाना होगा।
  • जापान की सारी ख़ूबसूरती इस एक शिष्टाचार में है जो कि ‘ओसीबो’ और ‘ओचीगन’ कहलाता है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष ग्रीष्म व शीत ऋतु में उन सभी क़रीबी, दोस्त, डॉक्टर, शिक्षक व अजनबी आदि जिन्होंने आपकी सहायता की थी, को तोहफ़े देकर शुक्रिया अदा करना होता है। इन उपहारों में मिठाइयां, फल व पेय होते हैं।
  • भोजन से पूर्व आपको ईश्वर को धन्यवाद देते हुए ‘इतदाकिमास' अर्थात ‘मैं विनम्रतापूर्वक ग्रहण करता हूं’ कहना होगा व भोजन समाप्त होने के बाद ‘गोचिसोसमादिस्ता’ अर्थात ‘यह एक श्रेष्ठ दावत थी’ कहकर भोजन पकाने वाले को धन्यवाद देना होगा।

क्या सीखा हमने...

स्वच्छता व जल संरक्षण का पाठ, कार्य का सम्मान, भोजन व उसे बनाने वाले का मूल्य, शुभचिंतकों की महत्ता।

जर्मन तहज़ीब

  • यदि आपको किसी ने रेस्तरां में भोजन के लिए निमंत्रित किया है, तो यह ज़रूरी नहीं कि पूरा बिल वही देगा, आपको अपने हिस्से का बिल स्वयं देना होगा। यदि सामने वाला व्यक्ति इस बात को बुलाते वक़्त ही स्पष्ट कर देता है कि बिल वही देगा, तब आपको कुछ नहीं देना होगा।
  • जर्मनी में यदि किसी समूह में खड़े हैं, जहां आप सिर्फ़ एक या दो लोगों को ही जानते हैं, तब भी आपको सभी से हाथ मिलाकर अभिवादन करना होगा। ताकि अन्य लोग आपसे व आप उनसे नावाकिफ़ न रहें।
  • रात्रि 10 बजे के बाद आप किसी को भी अपने घर आमंत्रित नहीं कर सकते क्योंकि यह निजी व विश्राम का समय है।
  • जर्मन राष्ट्र में किसी भी दुकान में आपको दुकानदार के साथ ही अन्य स्टाफ़ का भी अभिवादन करना होगा।
  • जर्मनी के निवासी कोई भी सामान लेने जाते हैं तो घर से ही अपना थैला साथ लेकर जाते हैं।
  • सड़क पार करने का पहला अधिकार पैदल चलने वाले का होता है। सड़क पार करते समय पैदल यात्री का रुकना आवश्यक नहीं है। वहीं कार व अन्य मोटर वाहन को तब तक रुककर इंतज़ार करना होगा, जब तक पैदल यात्री सकुशल सामने से निकल न जाए।

क्या सीखा हमने...

पर्यावरण के प्रति नैतिक दायित्व, व्यावहारिकता का पाठ, वित्तीय समभाव व यातायात नियम।

कीवी तकल्लुफ़

  • कीवी राष्ट्र में सैलरी, वज़न और उम्र से जुड़े सवाल पूछना अशिष्ट माना जाता है।
  • न्यूज़ीलैंड में किसी को भी आप ऐसा उपहार नहीं दे सकते जिसका बहुत अधिक दाम हो, वहां भेंट स्वरूप पुस्तक, फूल और चॉकलेट सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।
  • यदि आप किसी के घर जा रहे हैं तो उन्हें पहले सूचित करना होगा, आने वाले लोगों की संख्या बताना होगी। ऐसा करके आप सामने वाले की व्यवस्थाओं को नहीं बिगाड़ते हैं।
  • न्यूज़ीलैंड से ‘ब्रिंग योर ओन’ की तहज़ीब सीखने योग्य है। इसके मुताबिक आप यदि किसी के घर जा रहे हैं तो साथ में अपना खाना ले जा सकते हैं और वहां मिल-बांटकर खा सकते हैं ताकि किसी एक पर काम का बोझ न पड़े।
  • किसी के घर डिनर पर गए अतिथियों का यह कर्तव्य बनता है कि वे आयोजक की रसोई व डिनर टेबल साफ़ करवाकर लौटें।
  • न्यूज़ीलैंड में किसी भी चीज़ को लेकर भाव-ताव नहीं किया जाता है। फल और सब्ज़ी से लेकर फर्नीचर तक का एक तय दाम होता है और सभी विक्रेताओं को बराबर मुनाफ़ा होता है।

क्या सीखा हमने...

सभ्य व्यवहार, बुरी आदतों पर रोक, विक्रेताओं के प्रति समान बर्ताव व सहायता का भाव।

फ्रांसीसी अदब

  • फ्रांस लंबे समय से कला, दर्शन और विज्ञान का केंद्र रहा है। यहां छोटी उम्र से ही बच्चों के लिए पढ़ने, लिखने और गणित-विज्ञान का अभ्यास करने के साथ ही थियेटर, दर्शनशास्त्र, संगीत और कला का अध्ययन करना आवश्यक होता है। प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही उनके मस्तिष्क में देशभक्ति के विचार पोषित किए जाते हैं।
  • दिनभर के भोजन कार्यक्रम को छह हिस्सों में विभाजित किया जाता है। शाम को हल्का खाना ही खाते हैं। सूर्यास्त के बाद अधिकतर रेस्तरां की व्यंजन सूची में भी इसी तरह का भोजन उपलब्ध होता है।
  • फ्रांस के व्यंजनों में सॉस अधिक मात्रा में डलता है, ऐसे में पूरा भोजन ग्रहण करने के बाद भी प्लेट पर सॉस रह जाता है। यह सॉस बर्बाद न हो, इसलिए फ्रांस के लोग हमेशा डिनर टेबल पर ब्रेड रखते हैं। खाना पूरा होने के बाद वे बचे सॉस को ब्रेड से साफ़ करके खाते हैं।
  • फ्रांसवासी मिनिमलिज़्म की अवधारणा के प्रति बेहद गंभीर हैं। अमीर से अमीर महिलाएं एक ही कपड़े को अलग-अलग आभूषणों के साथ बार-बार पहनती हैं। पुरुष भी एक शर्ट को तब तक प्रतिदिन पहनते हैं, जब तक वो गंदी न हो। भले ही पेरिस दुनिया के फैशन केंद्रों में है, परंतु इस देश में फैशन पर बहुत अधिक खर्च़ बर्बादी की श्रेणी में आता है।

क्या सीखा हमने...

कला व रचनात्मकता की अहमियत, भोजन के अपव्यय पर रोकथाम, स्वास्थ्य के प्रति सजगता।

‘मीशी’

जापान में ‘मीशी’ अर्थात बिज़नेस कार्ड को सम्मान देना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे दोनों हाथों से लिया जाता है। इस पर कुछ लिखना या इसे मोड़कर रखना अशिष्ट व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसे इंसान की व्यक्तिगत पहचान के रूप में देखा जाता है।

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