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  • Mighty Cat And The Chubby Mouse Were Coming On The Birthday Of Fudku Rabbit, Fudku Was Nervous Thinking That The Two Would Face Each Other

सुनो भई कहानी:फुदकू खरगोश के जन्मदिन पर माइटी बिल्ली और चुलबुला चूहा आ रहा था, पार्टी में दोनों का आमना-सामना होगा ये सोचकर फुदकू घबरा रहा था

डॉ. अलका जैन ‘आराधना’एक महीने पहले
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  • फुदकू के जन्मदिन पर माइटी बिल्ली केक बनाने वाली थी। वो पार्टी में आने वाली थी और फुदकू को अपने दोस्त चुलबुले चूहे की चिंता लगी हुई थी।
  • इस समस्या को भुल्लू भालू ने कैसे संभाला, बच्चों को बताइए इस छोटी-सी कहानी को पढ़कर।

आज फुदकू खरगोश की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। आज उसका जन्मदिन जो था। सुबह से ही जंगल भर में घूम-घूमकर वह सबको शाम को अपने जन्मदिन की पार्टी में आने के लिए इनवाइट कर रहा था। उसने सबको बता दिया था कि शाम को ख़ूब डांस होगा और गेम खेले जाएंगे। उसके बाद खाना खाकर केक काटा जाएगा। सबको इनवाइट करने के बाद जब फुदकू अपने घर पहुंचा तो भुल्लू भालू को न पाकर परेशान हो गया। भुल्लू फुदकू का सबसे अच्छा दोस्त था। उसके बिना तो वह कुछ कर ही नहीं सकता था। भुल्लू जंगल की एकमात्र बेकरी शॉप पर उसके लिए केक ऑर्डर करने गया था लेकिन अभी तक लौटा नहीं था। फुदकू बेचैनी से इधर-उधर टहल रहा था तभी भुल्लू को सामने देखकर ख़ुुशी से चहक उठा और बोला- ‘कितनी देर लगा दी दोस्त... हो गया केक ऑर्डर?’ भुल्लू ने उदास होकर कहा- ‘नहीं, वह बेकरी शॉप वाला जंपी बंदर अपनी शॉप का कुछ सामान लेने पास ही के जंगल गया है। वह तो कल तक आएगा।’ यह सुनकर फुदकू परेशान हो गया और बोला- ‘अब हम केक का इंतज़ाम कैसे करेंगें? बिना केक के भी कोई बर्थडे होता है?’ भुल्लू ने उसे समझाते हुए कहा- ‘कोई ज़रूरी नहीं है जन्मदिन पर केक ही काटा जाए। यह तो सब बाहर के कल्चर का प्रभाव है।’ यह सुनकर फुदकू बोला- ‘मैं तो तुम्हारी बात मान भी लूं पर मेरे बहुत से दोस्त तो इसीलिए जन्मदिन पर आएंगे क्योंकि मैं केक काटूंगा।’ भुल्लू ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘तुम परेशान मत हो... मैं कोई रास्ता निकालता हूं।’ तभी भुल्लू ने चुटकी बजाते हुए कहा- ‘हमें केक तैयार करवाने के लिए कहीं भटकने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारे पड़ोस में जो माइटी बिल्ली रहती है, वह बहुत शानदार केक बनाती है। मैंने खाया है उसके हाथ का केक। उसके केक के सामने तो जंपी बंदर की बेकरी का केक भी फेल है।’ यह सुनकर फुदकू खरगोश बोला- ‘ना बाबा ना... उससे केक बनवा लूंगा तो उसे पार्टी में भी बुलाना पड़ेगा। उसे पार्टी में बुला लूंगा तो मेरा दोस्त चुलबुला चूहा पार्टी में नहीं आएगा। उसे तो बिल्ली से बहुत डर लगता है। पार्टी के धूम-धड़ाके में कहीं माइटी बिल्ली ने झपट कर उसे खा लिया तो क्या होगा?’ यह सुनकर भुल्लू भालू ने कहा- ‘मुझ पर भरोसा रखो दोस्त! खाना तो दूर की बात है... माइटी बिल्ली तुम्हारे चुलबुले दोस्त को हाथ भी नहीं लगाएगी।’ फुदकू मुस्कराते हुए बोला- ‘हां, तुम पर तो पूरा भरोसा है दोस्त।’ अब फुदकू और भुल्लू माइटी बिल्ली के पास गए थे और उसे पार्टी के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि केक की व्यवस्था भी उसे ही करनी है। यह सुनकर माइटी बिल्ली बहुत ख़ुश हुई। उसने पूरा दिन लगाकर बहुत ही शानदार केक बनाया। शाम को सबसे पहले केक लेकर वही पहुंची। धीरे-धीरे फुदकू के सारे दोस्त आने लगे। चुलबुला चूहा जैसे ही घर में घुसा, माइटी बिल्ली को देखकर उल्टे पांव लौटने लगा। लेकिन भुल्लू भालू ने उसे रोक लिया और कहा -‘मैं गारंटी देता हूं दोस्त, तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम पार्टी इंजॉय करो।’ थोड़ी ही देर में सब डांस करने लगे। माइटी बिल्ली की नज़र चुलबुले चूहे पर थी लेकिन फुदकू के कुछ दोस्त और भुल्लू इस तरह नाच रहे थे कि बिल्ली चूहे के पास पहुंच ही नहीं पा रही थी। अब बिल्ली डांस करते-करते थक गई और उसे बहुत तेज़ भूख लगी थी। वह भी स्टॉल के पास पहुंचकर कुछ खाना चाहती थी तभी भुल्लू भालू उसके पास आया और बोला - ‘आओ तुम्हें एक शानदार चीज़ खिलाता हूं...’ माइटी बोली- ‘सब लोग जो चीज़ें खा रहे हैं, वे तो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। चुलबुले चूहे को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा है।’ भुल्लू माइटी को अपने साथ ले गया और उसे रसोई के पिछले हिस्से में रखी गर्मा-गर्म जलेबियां खिलाईं। माइटी ने जलेबी पहली बार खाई थी। वह गपागप ढेर सारी जलेबियां खा गई। भुल्लू उसे आश्चर्य से देख रहा था। इस तरह तो वह शहद पर भी नहीं टूट पड़ता था जैसे माइटी जलेबियों पर टूट पड़ी थी। कुछ ही देर में उसने जलेबी से भरा सारा पतीला ख़ाली कर दिया। अब तो उससे हिला भी नहीं जा रहा था। वह बाहर आकर कुर्सी पर धप्प से बैठ गई और सबको नाचते हुए देखने लगी। भुल्लू ने चुलबुले चूहे से कहा- ‘चुलबुले ! अब तुम बिल्ली के पास जाकर नाचोगे तो भी वह तुम्हें हाथ नहीं लगाएगी।’ चुलबुला डरते-डरते बिल्ली के पास जाकर नाचने लगा। यह क्या बिल्ली ने तो उसे देखा तक नहीं। वो जलेबियों से भरे पेट के कारण एकदम लस्त बैठी थी। थोड़ी देर में सबने खाना खाया। माइटी ने डकार लेते हुए कहा- ‘मैं केवल सूप लूंगी।’ यह सुनकर भुल्लू मुस्कराने लगा। थोड़ी देर बाद केक काटा गया। केक सचमुच बहुत शानदार था। सबने उसके स्वाद की बहुत तारीफ़ की। चुलबुले चूहे ने भी जमकर केक खाया। माइटी तो अपना बनाया हुआ केक भी नहीं खा सकी क्योंकि उसका पेट तो कुछ ज़्यादा ही भरा हुआ था। पार्टी बहुत शानदार रही। थोड़ी देर में सब जानवर अपने घरों की ओर लौट गए। अब फुदकू ने चैन की सांस ली। फुदकू ने अपने प्यारे दोस्त भुल्लू को धन्यवाद दिया। भुल्लू ने मुस्कराते हुए कहा- ‘यह सब जलेबी की करामात के कारण संभव हो पाया।’ यह सुनकर फुदकू खिलखिलाकर हंस दिया।

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