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  • Navratri Is The Time Of Sadhna, If You Take Any Resolution With A Sincere Heart, Then It Also Turns Into Sadhana And Worship.

फलित होते हैं संकल्प:नवरात्र का समय साधना का होता है, सच्चे हृदय से कोई संकल्प लेकर उसे साधे तो वह भी साधना और आराधना में तब्दील हो जाता है

आचार्य राजेश11 दिन पहले
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व्रत का संकल्प

व्रत का अर्थ है संकल्प करना। एक समय निराहार रहकर भी व्रत किया जा सकता है लेकिन यदि आपने पूर्व में कठिन व्रत नहीं किए हैं तो 9 दिनों तक निराहार रहना मुश्किल हो सकता है। इसलिए एक समय भोजन एवं एक समय फलाहार कर सकते हैं। सायंकाल देवी मां के दर्शन करें।

साधना

किसी भी एक मंत्र के साथ आप प्रतिदिन देवी मां की साधना कर सकते हैं। संकल्प के लिए मंत्र जप की कोई भी एक संख्या चुन सकते हैं।

दर्शन का समय

आप किसी भी मंदिर में देव दर्शन का समय तय कर सकते हैं। अपने साथ फल, फूल या कोई प्रसाद अवश्य ले जाएं। उस निश्चित समय में आप दर्शन करें। यह भी एक प्रकार की साधना ही है जो आपके जीवन को नियमित करने में सहायक हो सकती है।

बुज़ुर्गों की सेवा

वृद्धाश्रम आदि में बुज़ुर्गों की सेवा का संकल्प ले सकते हैं। मानवमात्र की सेवा ही सच्ची ईश सेवा है।

फलों का दान

जो लोग व्रती हैं उन लोगों को या ज़रूरतमंद लोगों को फलों का दान आप कर सकते हैं। यह भी देवी आराधना का एक उपादेय तरीक़ा है।

यौगिक साधना

आप योग या प्राणायाम करने जैसे संकल्प भी ले सकते हैं। इस प्रकार का कोई भी संकल्प लेकर आप उसे साधना शुरू करें। यदि हम नियमानुसार अपने संकल्प को पूरा करते हैं तो हमारी साधना सफल होती है। साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी श्रेष्ठ है।

स्वाध्याय

नवरात्र में किसी भी धार्मिक ग्रंथ का पाठ संकल्प लेकर कर सकते हैं। इससे हमारा कार्य पूर्ण होता है तथा देवी मां का आशीष भी प्राप्त होता है। आप दुुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, श्रीमद्‌भगवद्‌गीता आदि किसी भी धार्मिक ग्रंथ का पारायण कर सकते हैं।

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