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सेहत:कोरोना ‘पॉज़िटिव’ होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि थोड़ी सावधानी और सतर्कता के साथ जल्दी ही ठीक हुआ जा सकता है

डॉ. नवनीत सूद, पल्मोनरी कंसल्टेंट, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पतालएक महीने पहले
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  • कोविड का अब तक का सबसे कठिन दौर चल रहा है। हर दिन मृत्यु और संक्रमण के बढ़ते आंकड़े डर बढ़ा रहे हैं। लेकिन डरने की बजाय ये वक़्त सावधानी और सतर्कता बरतने का है। यह ध्यान रखने का कि संक्रमण के किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ नहीं करना है।
  • संक्रमण के प्रसार की गति बहुत बढ़ गई है। सावधान न रहे, तो यह तेज़ी से अपने संपर्क में आए हर व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। लेकिन, वहीं यह भी सच है कि सावधानी रखी, कोविड अनुशासन का पालन किया, डॉक्टरों के कहे मुताबिक़ दूसरों से दूरी और दवाओं की नियमितता रखी, तो कोरोना से जीत निश्चित है।

कोविड संक्रमण के शुरुआती लक्षण महसूस होने पर चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि तनाव और घबराहट व्यक्ति को असहज बनाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में धैर्य और समझदारी से काम लेना उचित है। किन-किन बातों का ख़्याल रखना है, कैसे मरीज़ की देखभाल की जा सकती है, आइए, जानते हैं।

डरें नहीं
इस दौर में बहुत से लोग इसलिए भी रोग की गंभीरता का शिकार हो रहे हैं क्योंकि वे अनिश्चितता के डर के घेरे में आ रहे हैं। याद रखें घबराहट, मानसिक तनाव केवल रोग की गंभीरता को बढ़ाते हैं। यह दौर निश्चित रूप से हौसले की परीक्षा ले रहा है लेकिन धैर्य रखना बेहद ज़रूरी है। कोविड के बताए लक्षणों में से कोई भी दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। टेस्ट करवाएं। रिपोर्ट पॉजिटिव आए या नेगेटिव, टेस्ट कराने के साथ-साथ डॉक्टर की बताई दवाइयां और सभी सावधानियों का पालन करते रहें। यदि परेशानी महसूस कर रहे हैं तो बेझिझक ऑनलाइन माध्यमों से किसी मनोचिकित्सक की सलाह लें।

दवाएं डॉक्टर की सलाह पर
जैसा कि देखा गया है कि इसके शुरुआती लक्षण खांसी बुखार, गले में दर्द आदि होते हैं। ऐसे में मरीज़ खांसी-बुखार की दवाएं लेने लगते हैं जो कि क्षणिक आराम पहुंचाती हैं। यहां यह समझने का प्रयास करें कि यह वायरस (ख़ासतौर पर मौजूदा दौर का वैरिएंट) केवल श्वसन तंत्र को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर व्यापक असर डाल रहा है। जांच पूरी होने पर डॉक्टर ख़ुद आपको ज़रूरी दवाएं देंगे। उनसे बात करते रहें। अगर आपको कोई अन्य रोग है, जैसे अस्थमा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि तो डॉक्टर को बता दें। लक्षणों की अनदेखी न करें।
दूसरी बात, बिना परामर्श के दवाएं लेना या घरेलू उपचार करना बुद्धिमानी नहीं है। मुमकिन है कि डॉक्टर द्वारा बुखार के लक्षण दिखने पर बुखार की दवा दी जाए और घर पर स्टीम लेने की भी सलाह दी जाए, लेकिन यह निर्णय केवल डॉक्टर पर छोड़ें।

कौन-सा टेस्ट ठीक होगा
शुरुआती लक्षण दिखने पर या लक्षण नहीं होने के बावजूद आशंका की स्थिति में भी कोविड के संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया जाता है, जिसके बाद संक्रमण के होने या नहीं होने की पुष्टि होती है। यदि व्यक्ति का आरटी- पीसीआर में टेस्ट नेगेटिव आए लेकिन लक्षण और तकलीफ़ें ठीक वही कोविड वाली बरकरार रहें तो डॉक्टर उस रोगी को एचआर सीटी स्कैन की सलाह देते हैं और आकलन के बाद पॉज़िटिव केस मानकर देखभाल की सलाह देते हैं। टेस्ट से लेकर संक्रमण मुक्त होने की पुष्टि तक ख़ुद को आइसोलेटेड रखें।

दूरी है ज़रूरी
अगर संक्रमण के हल्के लक्षण भी दिखें, तो घर के लोगों से अलग रहने में ही समझदारी है। तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, लक्षण बताएं, टेस्ट कराएं और जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, ख़ुद को दूसरों से दूर ही रखेेेेें। दवाइयों और सेहत के मापदंडों जैसे ऑक्सीजन का स्तर, रक्तचाप, शरीर का तापमान आदि जांचकर रिकॉर्ड बनाकर रखें, ताकि डॉक्टर के लिए उसके आधार पर परामर्श देते रहना आसान हो। दवाओं और कड़ाई में कोई कोताही न बरतें।

कैसे करें ख़ुद को आइसोलेट
कोविड के लक्षण महसूस होते ही या आशंका होने पर आइसोलेशन में चला जाना बेहतर है। जांच करवाने, जांच की रिपोर्ट आने आदि की प्रक्रिया में समय लगता है। ऐसे में यदि व्यक्ति पॉज़िटिव निकले तो इस प्रक्रिया के दौरान आइसोलेट न होने के कारण वह निश्चित रूप से संक्रमण का वाहक हो सकता है। इसलिए शुरुआत में ही सभी सावधानियों के साथ आइसोलेट हो जाना चाहिए।
- यदि व्यक्ति वयस्क है और घर में बाथरूम समेत अलग कमरे की व्यवस्था है तो उसे कमरे में अलग रहना शुरु कर देना चाहिए। अपना सारा सामान घर के अन्य सदस्यों से अलग कर लें। रिपोर्ट आने तक ख़ुद को कोविड के रोगी के समान ही आइसोलेटेड रखें।
- यदि रिपोर्ट पॉज़िटिव आए और लक्षण सामान्य हैं तो डॉक्टर की सलाह पर घर पर आइसोलेशन जारी रखें या अस्पताल जाएं।
- घर में अतिरिक्त कमरे की व्यवस्था नहीं है तो आइसोलेशन सेंटर या अस्पताल जाएं। घर के बाक़ी सदस्यों को ख़तरे से दूर रखना ज़रूरी है।
- घर के सदस्य घर में भी मास्क लगाकर रखें।
- दवाओं के साथ-साथ पोषण का ध्यान रखे। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लेकर लिस्ट बनाएं और उसी के अनुसार उसका खानपान रखें।
- रोगी के खानपान आदि के लिए डिस्पोज़ेबल बर्तनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बर्तनों को हर उपयोग के बाद सैनिटाइज़ करके फेकें। डिस्पोज़ेबल न होने पर बर्तन अलग भी किए जा सकते हैं। यह संभव न हो, तो रोगी को बर्तनों का एक सेट दे दें, जो वे ख़ुद ही धोकर अलग रखें और रोज़ उसी में खाना खाएं।
- रोगी से दूरी बनाकर ठीक होने के लिए उसका हौसला बढ़ाएं। सावधानियों के साथ उसके संपर्क में रहें लेकिन साथ बैठना या मिलना न करें। उसे अकेला महसूस न होने दें। फोन पर बात करें।
- यदि रोगी बच्चा है तो निश्चित रूप से अभिभावकों की ज़िम्मेदारी और जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में सभी सावधानियों के साथ बच्चे का किस प्रकार ख़्याल रखें यह संक्रमण की जांचकर डॉक्टर बता सकते हैं। परामर्श ही उचित है।

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