पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Madhurima
  • Parts Of The House Can Be Done Easily, But How Can One Be Happy By Doing Parts Of The House Where Childhood Has Been Spent

लघुकथा:घर के हिस्से तो आसानी से किए जा सकते हैं, लेकिन जिस घर में बचपन बीता हो उसके हिस्से करके कैसे ख़ुश रहा जा सकता है

नीना बहल12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • जिस घर में बचपन गुज़ारा हो, उसका कौन-सा हिस्सा बेचकर, ‘अपना हिस्सा’ पाने का सुख मिल सकता है?

लंबे अरसे बाद सुधा से मिलना हुआ। इधर-उधर की गपशप के बाद सुधा चाय बना लाई। चाय के साथ बिस्किट, नमकीन, मिठाई आदि से पूरी भरी हुई ट्रे से मिठाई का टुकड़ा मेरे मुंह में डालते हुए चहक कर बोली, ‘मुंह मीठा कर।’ स्वादिष्ट कलाकंद का मज़ा लेते हुए मैं हंस दी, ‘अरे यह क्या बात हुई! पहले मुंह मीठा कराओ और ख़ुशख़बरी बाद में सुनाओ! सुधा ज़ोर से खिलखिला दी। ‘हमारे यहां तो यही रिवाज़ है जी।’ ‘अब बताओगी भी या..’ मेरे नक़ली ग़ुस्से से सुधा और भी ज़ोर से हंस दी। ‘वो जो पापा वाले घर का कोर्ट केस चल रहा था ना, बस वही हम बहनें जीत गईं। घर तो पुराना था तो इसलिए ज़्यादा तो नहीं किसी के हिस्से आया पर चलो लॉटरी ही सही और फिर लॉटरी का तो अपना मज़ा है, है ना?’ कलाकंद का स्वाद कसैला हो चुका था! ‘क्या हुआ? तुझे ख़ुशी नहीं हुई? अरे उस घर में तो कितना खेलीं हैं हम, तब से चली आ रही है दोस्ती अपनी।’ सुधा चाय का कप वापस रख के बोली। ‘हां, वही सोच कर उदास हूं सुधा! अब किस मुंह से मायके जाया करोगी तुम! कैसे बांध पाओगी उसकी कलाई पर राखी जिसके हाथ कांप-कांप गए होंगे काग़ज़ पर दस्तख़त करते हुए! तुम तीन बहनों का छोटा इकलौता दुलारा भाई! उस से उसका घर छीन कर तुम जश्न मना सकती हो सुधा, मैं नहीं। मैंने भी खेलते हुए, खाना खाते हुए, कभी-कभी थक कर दोपहर में वहीं सो जाते हुए घंटों गुज़ारे हैं उस घर में! उसका आंगन, दालान, छत, वृक्ष, उनके फल, धूप-छांह....सब का सब, पूरा का पूरा मेरे हृदय में सदा के लिए सुरक्षित है! उसका कोई भी हिस्सा मुझसे कोई नहीं छीन सकता!’ कहते कहते मैं अपनेे आँंसू पोंंछते हुुुए तेज़ी से बाहर निकल आई!

खबरें और भी हैं...