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कविता:फूलों और रंगों की होली को लेकर पढ़िए ये दो कविताएं

केदारनाथ अग्रवाल, हरिवंशराय बच्चन21 दिन पहले
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फूलों की होली

फूलों ने होली फूलों से खेली

लाल गुलाबी पीत-परागी

रंगों की रंगरेली पेली

काम्य कपोली कुंज किलोली

अंगों की अठखेली ठेली

मत्त मतंगी मोद मृदंगी

प्राकृत कंठ कुलेली रेली

​​​​​​​...तो होली है

तुम अपने रंग में रंग लो तो होली है। देखी मैंने बहुत दिनों तक दुनिया की रंगीनी,

किंतु रही कोरी की कोरी मेरी चादर झीनी, तन के तार छूए बहुतों ने मन का तार न भीगा,

तुम अपने रंग में रंग लो तो होली है।

अंबर ने ओढ़ी है तन पर चादर नीली-नीली,

हरित धरित्री के आंगन में सरसों पीली-पीली,

सिंदूरी मंजरियों से है अंबा शीश सजाए,

रोलीमय संध्या ऊषा की चोली है।

तुम अपने रंग में रंग लो तो होली है।

(दोनों कविताएं साभार - कविता कोश)

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