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अपनी मदद आप करें:सेल्फ थैरेपी से दूर होगी हीनभावना और आत्मविश्वास की कमी, जानिए क्या है यह थैरेपी और कैसे काम करती है

डॉ. शानु श्रीवास्तव10 दिन पहले
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हम सब ज़िंदगी में किसी न किसी उलझन को सुलझाने में व्यस्त हैं। कोई घर और दफ़्तर की ज़िम्मेदारियों के बीच दबा हुआ है, कोई वित्तीय समस्याओं से जूझ रहा है, तो कोई छोटी-छोटी दिक़्क़तों का हल ढूंढने में लगा है। इन सारी उलझनों का सीधा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ रहा है। तनाव बढ़ रहा है और मानसिक थकावट हमें घेर रही है। शुरुआत में इसकी गंभीरता का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, लेकिन धीरे-धीरे ये तनाव अवसाद और विकार में बदल जाता है।

सेल्फ थैरेपी की मदद से हम इस स्थिति से ख़ुद को बचा सकते हैं। सेल्फ थैरेपी आपको व्यक्तिगत विकास के लिए और मानसिक व शारीरिक तौर पर तैयार करती है। आपको मज़बूत बनाती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करती है। जब व्यक्ति इसे पूरी समझदारी और भरोसे के साथ करता है तो यह रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना करने में उसकी बहुत मदद करती है।

यह थैरेपी उन लोगों के लिए भी मददगार है जिनमें हीनभावना है, आत्मविश्वास की कमी है या जिनका मन हमेशा उलझा रहता है।

क्या है सेल्फ थैरेपी

सेल्फ थैरेपी यानी कि स्व-चिकित्सा एक ऐसी थैरेपी है जिसमें प्रशिक्षित मनोचिकित्सक की मदद लिए बिना स्वयं अपना उपचार किया जाता है। कहने का मतलब यह है कि इसमें चिकित्सक की भूमिका भी वही निभाता है जो पीड़ित है। इसमें कुछ छोटे-छोटे अभ्यास होते हैं जिन्हें घर पर रोज़ाना कर सकते हैं। यह एक तरह का व्यायाम है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

ऑनलाइन थैरेपी

सेल्फ थैरेपी वैसे ख़ुद से की जाती है, लेकिन अगर आपको किसी की मदद की आवश्यकता महसूस हो रही है तो इसे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। किसी कोर्स की तरह इसमें कई तरह के अभ्यास होंगे और होमवर्क भी। इंटरनेट या ऑनलाइन कोर्स की वेबसाइट पर आत्मविश्वास और स्व-निखार से संबंधित कोर्स चुन सकते हैं। ये कोर्स आपकी नकारात्मक सोच और आदतों में सुधार लाने में मदद करेगा।

यह उनके लिए भी कारगर...

जिनमें है हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी

सेल्फ थैरेपी उनके लिए भी कारगर है जिनमें आत्मविश्वास की कमी है या हीन भावना है। मिसाल के तौर पर छोटे क़द का व्यक्ति जिसके चलते उसमें हीन भावना है, मेकअप के बिना घर से बाहर निकलने का आत्मविश्वास नहीं है या ऐसे लोग जो ख़ुद की दूसरों से तुलना करते रहते हैं। कुछ लोग इन कमियों को स्वीकारते हैं और कौशल को निखारकर आगे बढ़ते हैं, परंतु कुछ पहचान नहीं पाते या मानने से इंकार कर देते हैं। ऐसी स्थिति में आत्म विश्लेषण ही मदद कर सकता है।

  • अपने विचार, धारणा और जो भी महसूस करते हैं उसका विश्लेषण करें। आप जब भी दुख या ख़ुशी महसूस करें या ऐसी परिस्थिति बने जहां आपको हिचकिचाहट महसूस हुई हो, तो उसे एक कागज़ पर लिखें। आमतौर पर ये कमियां महसूस होने के चंद मिनट बाद याद नहीं रहतीं। जब आप इसे लिखेंगे तो अपनी कमियों को स्वयं स्वीकार करना सीखेंगे।
  • यदि परिजन या क़रीबी दोस्त आपको आपकी कमी बता रहे हैं तो भले आप उनके सामने न स्वीकारें परंतु उन पर विचार अवश्य करें और विश्लेषण भी करें।

मन और मस्तिष्क को समझें

  • उस समस्या के बारे में सोचें जिस पर आप काम करना चाहते हैं, यह बड़ी या मामूली समस्या भी हो सकती है, अपनी समस्या का अध्ययन करें।
  • समस्या को दो भागों में विभाजित करें- व्यावहारिक और भावनात्मक, उन भावनाओं और कार्यों पर ध्यान दें जिन्हें आप बदलना चाहते हैं। जब तक आप अपनी भावनाओं को ठीक से नहीं जान लेते, तब तक व्यावहारिक समस्या को हल करने का प्रयास न करें।
  • अगर थैरेपी में आप किताब पढ़ रहे हैं या लिख रहे हैं तो उसका रोज़ अभ्यास करें। इस दौरान एक साथ कई काम न करें, पूरा ध्यान अभ्यास में लगाएं।

सेल्फ थैरेपी की इन रणनीतियों को अपनाएं...

किताबों से मिलेगी थैरेपी

मस्तिष्क के लिए किताबें सबसे अच्छा व्यायाम हैं। ऐसी किताबें पढ़ सकते हैं जो सेल्फ-हेल्प पर आधारित हों और जिन्हें मनोचिकित्सक द्वारा लिखा गया हो। विशेषज्ञों के अनुसार सेल्फ थैरेपी पर कई किताबें हैं जिनसे आपको बेहतर परिणाम मिल सकता है। इनकी मदद से आप ख़ुद को मानसिक तौर पर और विकसित कर पाएंगे, जैसे-‘डिटॉक्स योर थॉट (एंड्रिया बोनिओर)’, ‘रैडिकल कम्पैशन (तारा ब्रांच)’, ‘वेन थिंग्स फॉल अपार्ट (पेमा चोड्रोन)।’ वहीं रॉबिन शर्मा की ‘द मोंक हू सेल हिज फरारी (सन्यासी जिसने संपत्ति बेच दी)’, ‘एम. स्कॉट पेक की द रोड लेस ट्रैवल्ड (जीवन की नई राह)’ और डॉ. जोसेफ़ मर्फ़ी की ‘आपके अवचेतन मन की शक्ति’ किताब हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में पड़ सकते हैं। किताब और ऑडियो बुक सीरीज़ में परमहंस योगानन्द की ‘एक योगी की आत्मकथा’ सुन सकते हैं।

इन्हें पढ़ने से मस्तिष्क की कवायद होगी, नया नज़रिया मिलेगा, साथ ही आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद भी मिलेगी। यदि डिप्रेशन या चिंता है तो उससे बाहर आने में भी मदद मिलेगी।

मोबाइल एप्स की मदद लें

मोबाइल के प्ले स्टोर पर कई ऐसे एप्स हैं जो सेल्फ थैरेपी पर आधारित हैं। ये माइंड गेम्स हो सकते हैं या तनाव और मन को जांचने पर आधारित हो सकते हैं। मूडफिट (Moodfit), बेटर हेल्प (Better Help), मूड मिशन (Mood Mission), सैनवेलो (Sanvello) जैसे एप्स इंस्टॉल कर सकते हैं।

मन की बात लिखें

एक डायरी पर रोज़ अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को लिखें। लिखने से आप अपनी सोच, सोचने का तरीक़ा और चुनौतियां जान सकेंगे। आपका आत्मविश्वास कब और कैसे डगमगाता है, इससे जानने में मदद मिलेगी। इसके अलावा आप जो बातें किसी से कह नहीं सकते उन्हें डायरी में लिखकर मन हल्का कर सकते हैं। मन हल्का होगा तो तनाव कम रहेगा। दिनभर में आपने क्या किया, किससे मिले आदि सब कुछ इसमें लिखें।

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