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नींद का अलार्म है:स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए ज़रूरी है नींद, कम नींद डिप्रेशन, हृदयरोग जैसी कई बीमारियों को जन्म दे सकती है

डॉ. रतन कुमार वैश्य8 दिन पहले
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  • किसी भी व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है प्रत्येक दिन छह से सात घंटे की गहरी नींद।
  • गहरी नींद का हर मिनट अमूल्य है, जिसे धन के बजाय आत्मसंतोष से सहज पाया जा सकता है।
  • कम नींद कई बीमारियों को जन्म दे सकती है, जैसे- डिप्रेशन, डायबिटीज़, हृदयरोग, याददाश्त की कमी, कार्यक्षमता की कमी, सांस के मरीजों में अचानक बीमारी का दौरा पड़ना, मिर्गी के मरीजों का दौरा जल्दी-जल्दी आना आदि।

इन दिनों सबकी दिनचर्या बड़ी अस्त-व्यस्त चल रही है। अधिकांश लोग घर से काम कर रहे हैं, बच्चे घर पर हैं और मनोरंजन के साधन सभी के हाथ में हैं। दिन और रात के भेद मिटने लगे हैं। जो नुक़सान हो रहा है, वो है नींद का। हाल ही में नींद पर हुए कई अध्ययनों के नतीजे सामने आए और वैज्ञानिकों ने एक वाक्य में पूरी बात कह दी- नींद इस तरह लीजिए जैसे कि आपका जीवन इस पर निर्भर करता हो। क्योंकि करता है।

जो लोग मानते हैं कि रात के चंद घंटे अगर फिल्म देखने में या सोशल मीडिया पर बिता दिए, तो क्या हुआ, बाद में कोटा पूरा कर लेंगे, या यह तर्क दिया हो कि दस बजे तो बच्चे सोते हैं, तो ऐसे लोगों को अध्येताओं ने एक प्रयोग करने को कहा- एक अंधेरे कमरे में बैठ जाएं और हाथ में एक पेंसिल पकड़ लें। पांच मिनट का अलार्म लगाएं और रिलैक्स करें। क्या हुआ? पांच मिनट से पहले ही पेंसिल हाथ से छूट गई? नींद का दबाव बढ़ जाता है, तो कभी भी झपकी लग ही जाती है।

यह संकेत है इस बात का कि आप अपने दिमाग़ पर बहुत दबाव डाल रहे हैं। काम तो करने ही हैं, उसका दबाव तो रहेगा ही लेकिन मनोरंजन के ज़रिए जो सुकून दिमाग़ को मिलना चाहिए, वो नींद की कमी के चलते बिलकुल नहीं मिल पा रहा है।

क्या हो रहा है?

  • लगातार कई दिनों से ऑनलाइन बिल भरना भूल रहे हैं, सामान्य-से कामों में देर लग रही है - लग रहा है कि कहां पकड़ ढीली हो रही है? क्यों साधारण-से काम याद नहीं रहते या ऊब-सी लगती है, थकान हो जैसे?
  • यह सच है। सोशल मीडिया या वेब सीरीज़ के चस्के के चलते जो आधी रात स्क्रीन के सामने और बाक़ी की रात करवटें बदलते बिताई हों, तो थकान लाज़िमी है।
  • जब हम थके हुए होते हैं, तो ज़िंदगी के मामूली काम भी मुश्किल लगते हैं। या तो उन्हें भूल जाते हैं या करते समय बोझ-सा महसूस होता है। रोज़मर्रा के कामों पर से पकड़ ढीली होती है।

दिमाग़ पर असर पड़ता है

बहुत कम नींद लेने के कारण हमारा भावनात्मक नियंत्रण और नियमन दोनों गड़बड़ा जाते हैं। तब हम आगे का कुछ सोच ही नहीं पाते। इस प्रक्रिया की कमान हमारे दिमाग़ के हिस्से ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ के पास होती है, जो सुस्त पड़ने लगता है, गर हमने नींद के साथ समझौता किया हो।

शोध साबित करते हैं कि अगर आपने एक रात की भी भरपूर नींद लेने में कोताही बरती है, तो दिमाग़ के भावनात्मक केंद्र का प्रभावित होना तय है। ऐसे में ख़ुशी या परेशानी- किसी भी स्थिति में आप ओवर रिएक्ट कर सकते हैं। अकारण या छोटे-से कारण से भी आप भावुक हो सकते हैं, अतिसंवदेनशील या चिड़चिड़े हो सकते हैं।

नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं

काम की थकान जब हद से ज़्यादा हो जाती है, तो नतीजे कितने ख़तरनाक हो सकते हैं, इसका प्रमाण स्पेसशिप चैलेंजर का हादसा है, जो थकान से उपजे उनींदेपन के चलते हुआ। जब थकान बहुत बढ़ जाए, तो आसपास क्या हो रहा है, उस पर उतना ध्यान नहीं रहता। चेतना इस तरह साथ छोड़ने लगती है कि इंसान सही निर्णय नहीं ले पाता।

  • अध्ययनों ने साबित किया है कि अगर कोई इंसान सुबह 6 बजे सोकर उठा हो, और फिर रात 12 बजे तक जागता रहे यानी 18 घंटे तक तो उसकी निर्णय लेने की क्षमता निश्चित रूप से प्रभावित होगी।
  • यूं भी नींद यानी आराम अच्छा ही है और अगर वो कई तकलीफों से बचाए, तब तो बेहतरीन कहा जाएगा। कम से कम सात घंटे की गहरी नींद अवश्य लें। रात में कम सोने वाले लोग, दिन में अत्यधिक काम करने के बाद कम से कम आधे-एक घंटे का आराम ले सकें, तो और भी बेहतर।
  • ध्यान रखें, 9 घंटे से ज़्यादा सोना भी मुश्किलें पैदा तक सकता है। यह कई बीमारियों का संकेत करता है।

अच्छी नींद के लिए करें ये उपाय

  • सोने का समय रात के 9-10 का रखें और इस नियम पर कायम रहें। रोज़ समय ना बदलें।
  • शयनकक्ष का तापमान और रोशनी उतनी रखें जितनी आपकी नींद के लिए सुविधाजनक हो।
  • गैजेट्स बंद कर दें। टीवी-मोबाइल से दूरी रखें।
  • सोने से कम से कम 2 घंटे पहले रात का भोजन खा लें। कुछ चहलकदमी कर सकें, तो और बेहतर होगा।
  • भोजन बहुत गरिष्ठ ना लें। हल्का खाना खाएं।
  • किसी खेल और दिमाग़ी कसरत को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। ये अच्छी नींद की ज़मानत है।

नुक़सान कैसे-कैसे?

दिमाग़

ज़्यादा देर तक जागने से एडीनोसिन नामक रसायन बढ़ जाता है, तो उनींदा बनाए रखता है। अगर आपने जल्दी ही नींद पूरी नहीं की तो ध्यान देने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। लेकिन जब हम सोते हैं, तो दिमाग़ बीटा- एमीलॉएड प्रोटींस को निकाल देता है, जो अगर जम जाएं, तो एल्ज़ाइमर्स और डिमेंशिया के लिए आधार तैयार कर सकते हैं।

चेहरा

कम सोने से आंखें थकी, उनींदी, आंखों में सूजन और मुख उदास होने लगता है।

मांसपेशियां

लगातार कम सोने के आदी लोगों की मांसपेशियों में समस्या आने लगती है या चोटें देर से ठीक होती हैं, क्योंकि ऐसी स्थितियों में मस्तिष्क उन हॉर्मोंस को स्रावित करने के निर्देश देता है, जो मांसपेशियों के विकास को बाधित करें।

आंखें

अगर नींद को दूर रखा जाए, तो ड्राय आंखों की समस्या भी हो सकती है।

हृदय

स्वस्थ वयस्कों में, जो 5 घंटे से भी कम सोते हों, उनके हृदय की धमनियों में अवरोध उत्पन्न होने की आशंका 50% तक बढ़ जाती है।

त्वचा

कम नींद हमारी त्वचा को ढीला और झुर्रियोंदार बनाती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

जो लोग लगातार कम नींद लेते हैं, वे सुबह उठने के साथ ही छींकते हैं। धूल और ठंड की वजह से भी उन्हें जल्दी ज़ुकाम हो जाता है।

डायबिटीज

जो लोग अपनी नींद को 5 घंटे से कम करते जाते हैं, डायबिटीज (मधुमेह) की ओर उनके कदम 9% तेज़ी से बढ़ते जाते हैं।

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