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जागरूकता:उन दिनों में साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत होती है, ताकि संक्रमण के ख़तरे को दूर रख सकें

डॉ. ऊषा अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नारायणा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, जयपुर8 दिन पहले
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  • स्त्रियों को हर महीने मासिक धर्म से गुज़रना होता है। इस प्रक्रिया से जुड़ी कई तकलीफ़ों को झेलने के साथ ही इस वक़्त ख़ास साफ़-सफ़ाई की भी ज़रूरत होती है।
  • उन दिनों में कैसे सफ़ाई रखें और संक्रमण के ख़तरे को कैसे दूर करें, जानिए इस लेख में...

माहवारी के समय साफ़-सफ़ाई में बहुत बार चूक हो जाती है, जबकि इस समय काफ़ी ख़्याल रखे जाने की ज़रूरत होती है।
ध्यान रहे कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता न बनाए रखने का नतीजा कई तरह के संक्रमण के रूप में सामने आ सकता है। कई मामलों में लगातार संक्रमण रहने के परिणामस्वरूप फेलोपियन ट्यूब भी ब्लॉक हो जाती है, जिसके कारण गर्भधारण में भी समस्याएं आ सकती हैं। इसलिए मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ख़्याल रखना बेहद ज़रूरी होता है।
क्या-क्या समस्याएं आती हैं?
सबसे पहले यह समझना होगा कि योनि यानी कि वेजाइनल एरिया का पीएच एसिडिक होता है और मासिक धर्म के दौरान यह कम एसिडिक हो जाता है। यानी मासिक धर्म के दौरान संक्रमण या किसी एलर्जी के होने की आशंका अधिक बनी रहती है। स्वच्छता का ध्यान न रखने पर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, वेजाइनल इन्फेक्शन आदि की समस्या होने लगती है। सफ़ाई के अभाव में खुजली, जलन भी होती है, जो कि संक्रमण में तब्दील हो सकती है। इसलिए गीलेपन से बचाव भी इस समय बहुत ज़रूरी है।

सामाजिक दबाव व शर्म हैं कारण
स्त्रियों का बहुत बड़ा हिस्सा माहवारी से जुड़ी स्वच्छता से अनभिज्ञ है, जिसमें अधिकतर समाज के वंचित तबक़े से आने वाली स्त्रियां हैं। झिझक, शर्म और सामाजिक दबाव के कारण वे खुलकर अपनी समस्याएं भी नहीं कह पातीं।
यहां इन कारणों का ज़िक्र करने की अनेक वजहें हैं, क्योंकि बहुत-सी समस्याएं व समाधान की दिशा इन्हीं से तय हो जाती हैं।
— शर्म के कारण बहुत-सी महिलाएं अंतर्वस्त्र खुली धूप में सुखाने के बजाय अन्य कपड़ों के नीचे, कमरों के अंदर छुपाकर या बाथरूम के अंदर नमी वाली जगह पर ही सुखा देती हैं। इसके परिणामस्वरूप नमी के कारण संक्रमण का सीधा-सीधा ख़तरा बना रहता है।
— अनेक स्त्रियों की सैनेटरी पैड, टेम्पून्स आदि तक पहुंच नहीं है, जिसके कारण वे मासिक धर्म के दौरान पुराने कपड़ों की कतरनों को लगातार धो-धोकर पैड्स की जगह इस्तेमाल करती हैं। इससे भी संक्रमण की आशंका होती है।
— साफ़ टॉयलेट्स की कमी भी इस दौरान अनावश्यक संक्रमण का ख़तरा पैदा करती है।

यूं कम करें संक्रमण का ख़तरा...

— प्रयावेट पार्ट को कभी भी साबुन से न धोएं। इससे उसका पीएच लेवल प्रभावित होता है। उसे सामान्य साफ़ पानी से धोएं या एसिडिक पीएच वाले वॉश से। — अपने अंतर्वस्त्र खुली धूप में सुखाएं। उन्हें अच्छी तरह से धोएं और किसी प्रकार की नमी न रहने दें। उनका रखरखाव भी साफ़-सुथरे ढंग से करें। — माहवारी के दौरान लगातार गीलेपन से असहजता होती है और इन्फेक्शन पनप सकता है। इसलिए अतिरिक्त गीलापन महसूस होने से पहले ही समय-समय पर पैड बदलने की आदत डालें। 5-6 घंटों के अंतराल में पैड बदलना चाहिए। — पैड बदलने के समय अपने हाथ साफ़ रखें। पैड को कभी भी गंदे हाथों से न छुएं। — गंदे टॉयलेट के इस्तेमाल से बचें। यात्राओं के समय व पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के दौरान टॉयलेट स्प्रे साथ रखें और बाथरूम इस्तेमाल करने से पहले इसे प्रयोग करें। — दफ़्तर, कॉलेज आदि में भी बाथरूम इस्तेमाल करने से पहले फ्लश करें उसके बाद प्रयोग में लें। यहां भी टॉयलेट स्प्रे का इस्तेमाल कर सकती हैं। — वंचित तबक़े की महिलाएं जो सैनेटरी पैड्स नहीं ख़रीद सकतीं, उन्हें नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने या किसी एनजीओ की मदद लेने के बारे में बताएं। सैनेटरी पैड्स तक हर महिला की पहुंच सुनिश्चित करें। — माहवारी के समय रात को सोने से पहले संभव हो तो गुनगुने पानी से स्नान करके सोएं।

याद रखें... इन उपायों के बावजूद यदि योनि क्षेत्र में किसी तरह की असहजता या समस्या महसूस हो तो बिना देर किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और ज़रूरी जांच करवाएं, ताकि समय रहते समस्या को दूर किया जा सके।

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