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कथा प्रसंग:कहानी सुनना-सुनाना एक चिकित्सा है, इससे जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं

प्रो. विनीता ढौंडियाल भटनागरएक महीने पहले
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  • बचपन में दादी-नानी से कहानियां सुनते थे, ये कहानियां सिर्फ़ हमारी कल्पनाशीलता को ही नहीं बढ़ाती थीं, बल्कि हमें जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबक़ भी सिखा देती थीं।
  • कहानियां हमें जीना सिखाती हैं। आइए, इसे विस्तार से जानते हैं इस लेख के ज़रिए।

कुछ दिन पहले की बात है। एक विद्यार्थी मेरे पास आया। बहुत उदास था। मां-बाप से दूर अजनबी शहर में अस्वस्थ अकेला, परेशान। वो मेरे सामने रोने लगा। मैं उसे क्या समझाती? कोई ज्ञान, कोई प्रवचन देना असंभव था। समय कम था और बच्चा परेशान। मैंने देखा कि उसके मोबाइल में श्रीराम का चित्र था। फिर क्या था। कहानी याद दिलाई। कैसे भगवान विष्णु मनुष्य अवतार में आए तो परेशान रहे। कहां राज्याभिषेक होने वाला था। कहां वनवास। एक पल में राजा से वनवासी बन गए। और कैकेयी मां जो बचपन से उनको इतना प्यार करती थी, पल भर में कैसे बदल गईं। पिता की मृत्यु, पत्नी का वियोग, कौन सा ग़म सहा नहीं श्रीराम ने? फिर भी धैर्य न खोया। विद्यार्थी मेरी बातें ध्यान से सुन रहा था। मानो कि वह सोच रहा हो कि श्रीराम तो घर और परिवार से चौदह साल दूर रहे। और मैं चार साल की दूरी के बारे में सोचकर रो रहा हूं। एक ऐसी कथा, जो उसने बचपन से सुनी थी, एक बार फिर उसको सहनशीलता और धैर्य सिखा गई।

यही है कहानी सुनने सुनाने का जादू। कहानी कभी पुरानी नहीं होती। हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। हर उम्र में हर परिस्थिति में वह कुछ नया सिखा जाती है। उस बच्चे और मेरे बीच कई दशक की दूरियां थीं पर एक कहानी जो हम दोनों ने सुनी थी, उसने इस दूरी को एक पल में खत्म कर दिया।

कहानियां...

संघर्ष करना सिखाती हैं

ग़ौर कीजिए, कहानी के केंद्र में विषयवस्तु के रूप में कोई न कोई संघर्ष ज़रूर होता है। एक इंसान अपना सब कुछ खो बैठता है। दुख-दर्द, पीड़ा जो हमारी मानवीय स्थिति का एक बड़ा हिस्सा है नायक को घेर लेते है पर वो हार नहीं मानता। हमको भी प्रेरणा देता है कि डरना मत लौटना मत, आगे बढ़ो। अंत में जीत मिलती है और परेशानी और दुख कुछ सिखाकर ही जाते हैं।

कल्पनाशीलता को बढ़ाती है

कहानी सुनना और सुनाना कल्पनाशीलता को बढ़ाता है। हम ना सिर्फ़ एक अलग दुनिया की कल्पना कर पाते हैं, बल्कि हम दूसरे की मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्थिति को समझने की क्षमता भी पाते हैं। शोध से पता चलता है कि कहानी सुनने-सुनाने से चिंता और डिप्रेशन की समस्या से जूझने में मदद मिलती है। यहां तक कि कैंसर, मनोभ्रंश और दीर्घकालिक बीमारी में भी कहानी सुनने-सुनाने से कुछ क्षण आराम मिला है।

कथा चिकित्सा को अपनाइए

​​​​​​​कोविड-19 के दौरान हमने बहुत कुछ खोया है। अपने अनुभव की कहानी अपनी आप बीती जब हम बताना सीख जाएंगे तो हम उस कहानी को बदल सकेंगे। एक नई कहानी रचेंगे। कथा चिकित्सा है। कहानी की दुनिया में डूब कर आप अपने को एक बार फिर तरोताज़ा पाते हैं।

आप अपने बारे में कौनसी कहानी बताते हैं? क्या आप अपने को बेबस और बेचारे किरदार में देखना पसंद करते हैं?

सावधान रहिए। जो कहानी आप सुनाते हैं वो ही आपका जीवन बन जाती है। डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की जीवन कथा अस्त-व्यस्त हो जाती है। जब वो फिर से अपनी कहानी का नायक अपने को पाते हैं, तो अंधेरे से उजाले की तरफ और निराशा से आशा की तरफ घूम जाते हैं। यह है कहानी की शक्ति। सही समय पर सही कहानी मनोवैज्ञानिक और यहां तक कि शारीरिक उपचार की सुविधा प्रदान कर सकती है। यही कारण है कि सभी संस्कृतियों की प्राचीन परंपराओं में कहानी पाई जाती है। कहानी ज्ञान और बुद्धि का विकास करती है। वो शिक्षा का पहला रूप होती है। जहां 3-5 साल के बच्चे कहानी सुनकर जिज्ञासु और कल्पनाशील हो जाते हैं, वहीं यह देखा गया है कि वरिष्ठ नागरिको के लिए भी कहानी सुनना-सुनाना लाभदायक है। मनुष्य कहानी कहने वाली प्रजाति है। वो जहां भी जाता है अपनी कहानियों का खज़ाना ले जाता है। रात को जब सोता है तो सपनों के रूप में कहानी को पाता है। वो दिन में चौबीस घंटे कहानियों की दुनिया में रहता है। कहानियां कहना तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। बस हम वो कहानियां सुनें-सुनाएं जो हमें सशक्त और प्रबुद्ध बनाएं और समाज को प्रगतिशील और उज्ज्वल बनाएं।

क्यों ज़रूरी है कहानी सुनाना

  • कहानी सुनते समय हमारे ब्रेन के एमिगडाला और हिप्पोकैम्पस भाग सक्रिय हो जाते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में एमिगडाला को भावनाओं और हिप्पोकैम्पस को याददाश्त का केंद्र कहा जाता है। ये दोनों शॉर्ट टर्म मैमोरी को लॉन्ग टर्म मैमोरी में बदल देते हैं।
  • कहानी सुनते समय मस्तिष्क में डोपामाइन हार्मोन स्रावित होता है जिसे ख़ुशी देने वाला हार्मोन कहते हैं।
  • कहानी सुनकर और सुनाकर बच्चे नकारात्मक-सकारात्मक विचार और ऊर्जा को अभिव्यक्त करना सीख जाते हैं।
  • परिजन और शिक्षक कहानियों के माध्यम से बच्चों को आसानी से बहुत कुछ सिखा सकते हैं, क्योंकि इस दौरान बच्चा उनसे जज़्बाती तौर पर जुड़ जाता है।
  • बच्चे दूसरी बातों की तुलना में कहानियों पर जल्दी यकीन करते हैं। कहानियां सुनाने से अभिभावकों के साथ बच्चों का भावनात्मक रिश्ता गहरा होता है।

विशेषज्ञ सलाह

-द् युतिमा शर्मा, मनोवैज्ञानिक

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