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  • Sunil Was Really Taking Care Of His Father Or He Was Forced To Do So, What Was The Reason To Care So Much…

लघुकथा:सुनील अपने पिता जी का वाकई ख़्याल रख रहा था या फिर मजबूरी वश उसे ऐसा करना पड़ रहा था, आख़िर इतनी परवाह करने का कारण क्या था...

मीरा जैन8 महीने पहले
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  • पिता को त्याग देने का निश्चय कर चुके सुनील को यकायक पिता का बेहद ख़्याल रखते देखकर सीमा का हैरान होना वाजिब था। आख़िर कारण क्या था?

‘चलिए पिताजी! आपको खांसी बहुत हो रही है, डॉक्टर को दिखा लाऊं।’ महिनों बात नहीं करने वाले बेटे को आज अचानक इतना मेहरबान देख मोतीलाल जी हतप्रभ थे। जो भी हो मोतीलालजी झटपट तैयार हो ख़ुशी-ख़ुशी सुनील के साथ चल दिए। आज ही नहीं ये पूछ-परख का सिलसिला अनवरत जारी था जिसे देख सीमा अंदर तक विचलित थी। कहां ससुर जी को वृद्धाश्रम पहुंचाने की तैयारी थी, कहां ये तिमारदारी? ताना मारते हुए आखिर कर सीमा ने पूछ ही लिया- ‘क्यों जी! अचानक पिताजी पर इतना प्यार क्यों उमड़ आया मैं भी तो जानूं?’ पहले तो सुनील टालता रहा जब सीमा ज़िद पर अड़ गई तो सुनील ने अपनी विवशता कुछ यूं ज़ाहिर की - ‘सीमा! बात दरअसल यह है कि कुछ दिनों पूर्व मैं अपनी जन्म कुन्डली लेकर शहर मे पधारे प्रकांड ज्योतिषाचार्य के पास गया और अपनी उम्र आदि के बारे में जानकारी चाही, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘बेटा! तुम ख़ुशकिस्मत हो। तुम्हारी उम्र भी तुम्हारे पिताजी के जितनी ही होगी और जीवन भी हू ब हू वैसा ही होगा जैसा तुम्हारे पिताजी का रहेगा।’

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