भक्ति के लिए बनाए रखें शक्ति:नवरात्रि के शुभ दिनों में व्रत रखने के दौरान रखें पोषण का ध्यान

रुजुता दिवेकर, किरण जैन11 दिन पहले
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  • उपवास में अमूमन चंद मूंगफलियां या साबूदाना खा लिया जाता है, जबकि ऊर्जा के लिए पोषण की ज़रूरतें कहीं ज़्यादा होती हैं।
  • जानिए, सुप्रसिद्ध आहार विशेषज्ञ से कि नवरात्र में कैसे रखें पोषण का ध्यान।

बहुत से लोग नवरात्र के शुभ दिनों में उपवास रखते हैं। कुछ सभी नौ दिनों में उपवास रखते हैं तो कई केवल दो उपवास रखते हैं - नवरात्र की पड़वा और फिर नवमी का। जबकि उपवास के नियम समान हैं, लगातार नौ दिनों तक उपवास करना उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है जिन्हें उपवास रखने की आदत नहीं है।

उपवास के दौरान अक्सर यह देखने को मिलता है कि लोग खाने से बचते हैं। हालांकि, निराहार रहने का संकल्प ना लिया हो, तो उपवास के दौरान भी संतुलित आहार बहुत ज़रूरी होता है।

महिलाओं के लिए नवरात्र का विशेष महत्व है क्योंकि वे देवी मां की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। एक तरह से यह पर्व हमें सिखाता है कि एक महिला के रूप में हमें हर पल अपने जीवन का जश्न मनाना चाहिए और हर भूमिका को पूरी शिद्दत से निभाना चाहिए। अन्नपूर्णा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा - किसी भी रूप में हम ख़ुद को व्यक्त करना चाहें, सभी सुंदर हैं। उपवास रखने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं। उपवास में हम जिस तरह का व्यंजन खाते हैं वो ना सिर्फ हमें शारीरिक मज़बूती देते हैं बल्कि हमारे हॉर्मोंस को भी संतुलित रखते हैं।

सलाह के तौर पर मैं नवरात्र के उपवास में दिन के चार खाद्य आपको बता रही हूं...

  1. सुबह उठते ही आप ताज़े फल या मुट्ठी भर मेवे या रातभर भिगोई हुई किशमिश केसर का सेवन कर सकती हैं जिससे आप स्वस्थ और तरोताज़ा महसूस करेंगी। याद रखिए, नवरात्र में पूरे नौ दिन का उपवास करने से शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में फलों का सेवन करना बहुत ज़रूरी है।
  2. ब्रेकफास्ट में साबूदाना खिचड़ी या सिंघाड़े के पकौड़े या शकरकंद दही के साथ, या आलू खीर में से किसी एक का सेवन कर सकती हैं।
  3. दोपहर में आप अरबी की सब्ज़ी के साथ राजगिरे या सिंघाड़े या कुट्टू के आटे की रोटी, कुट्टू की कढ़ी या उपसचा थाईपीठ का सेवन कर सकती हैं।
  4. रात में आप दही के साथ समा चावल या पनीर की सब्ज़ी के साथ कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी खा सकती हैं।

उपवास करते वक़्त रखें ध्यान

  • जो लोग सभी नौ दिनों में उपवास करते हैं, उनके लिए नियमित अंतराल पर थोड़े-थोड़े खाद्य व पेय लेना महत्वपूर्ण है। इससे मेटाबॉलिज्म सही रहेगा।
  • तले हुए खाद्य पदार्थों से बचें और अधिक दही, स्मूदी, लस्सी और फलों को डाइट में शामिल करें।
  • आलू का सेवन सप्ताह में लगभग दो बार तक सीमित करें।
  • बीच में खूब पानी पिएं।
  • पानी, नारियल पानी, नींबू पानी (बिना चीनी), हर्बल चाय पीते रहें।
  • कम कैलोरी के लिए कद्दू और लौकी जैसी सब्ज़ियों को सूप और करी जैसे विभिन्न रूपों में खाएं।
  • कुट्टू के आटे की जगह राजगिरे के आटे का इस्तेमाल चपाती बनाने के लिए करें। यह हल्का और कैलोरी में कम होता है।
  • कढ़ी, थालीपीठ और चीला, मखाने या साबूदाना खीर जैसे व्यंजनों का सेवन करें। ये व्यंजन कम से कम तेल में बन जाते हैं और स्वादिष्ट भी होते हैं।
  • अपने पोषण को बनाए रखने के लिए आहार में फलों की स्मूदी या फलों का रायता या यूं ही ताज़े फलों को शामिल करें।
  • नमकीन और पकौड़े खाने के बजाय मुट्ठी भर भुने हुए मखाने या बादाम, पिस्ता, अखरोट जैसे मेवे लें। लड्डू बनाकर भी सेवन किया जा सकता है।
  • अपने आहार में दूध, लस्सी, दही को शामिल करके अपनी भूख कम करें।
  • खाद्य थोड़ी मात्रा में ही लें। दिन में चार या पांच बार थोड़ा-थोड़ा और पौष्टिक आहार लेंगे, तो ऊर्जा भी बनी रहेगी।
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