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कविता:अंधियारों को दूर करके नया सवेरा बस आने वाला है, जब सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, पढ़िए जीवन को नई दिशा देने वाली ये कविताएं...

डॉ. महिमा श्रीवास्तव, हर्ष शर्मा2 महीने पहले
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भलाई जीतने वाली हैै

जलधर ख़ूब बरसे हैं धरा पर फिर आज सौंधी गीली माटी का इत्र पसरा है

डालियां झूम कर बुरे दिनों को अलविदा कहना चाह रहीं भीगी छत से टपकते पानी से मानो ज़िंदगी झांक रही।

मासूम बालक मां की गोद से जबरन फिसल आंगन में भरे पानी में किलोल कर रहा।

रात भर कोई बेटी पिता का तप्त माथा तेज़ सांसें देखती और वैद्य जी का काढ़ा पिलाती रही है गीली सुबह झपकी से जाग बुखार उतरता पा चैन की सांस ले रही ।

तुलसी के चौबारे में किसी रूपसी ने दिया जलाया है दूर अपने प्रियतम की सलामती के लिए बुराई पर फिर भलाई जीतने वाली है अब बस।

नवल सीख

नई उड़ान भरनी है, नई ऊंचाइयां छूनी हैं, मृगतृष्णा के बिछे जाल से राह विजयपथ की चुननी है।

नवल-नीड़ की तलाश है, कोमल परों पर विश्वास है, क्षण-क्षण मौसम बदले रंग-ढंग, उसे न रंगीन-पंखों की चपलता का आभास है।

नव क्षितिज की ओर प्रस्थान करना है, व्यर्थ ही व्यवधान से डरना है, शनैः-शनैः यात्रा मंगल होगी, छोटी-छोटी उड़ानों से बड़ा उत्थान करना है।

सुनहरे सवेरे की है प्रतीक्षा, इस क्षण तो है धीरता की परीक्षा, अंधियारा बीतेगा संयम से, टिम-टिम करते सितारे-जुगनू से पाई जीने की शिक्षा।

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