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नई राह:बच्चों को अपने सबक याद रहें, इसके लिए छुटपन से ही कुछ उपाय किए जाएं या चंद तरक़ीबें आज़माई जा सकती हैं

डॉक्टर उपमा पालीवाल, लेखिका एवं व्याख्याता, सेज विश्वविद्यालय, भोपाल12 दिन पहले
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विद्यालयों में अक्सर बच्चे किसी ना किसी प्रतियोगिता में भाग लेते रहते हैं। कुछ प्रतियोगिताओं में बच्चों को बहुत याद करना पड़ सकता है, जैसे कि निबंध, कविता अथवा व्याख्यान आदि सुनाना। फैंसी ड्रेस इत्यादि में भी किसी चरित्र को निभाते हुए उसके बारे में चंद पंक्तियां भी याद रखनी पड़ती हैं। अभिभावकों के समक्ष यह एक बड़ी चुनौती होती है कि लंबे पाठ, व्याख्यान इत्यादि बच्चों को कैसे याद कराए जाएं। आ जकल स्कूल भी पढ़ाई के लिए खेल विधि (प्ले-वे मेथड) पर ज़ोर देते हैं जिसके तहत बच्चों को खेल ही खेल में सिखाया जाता है। ऐसा करने से बच्चे रुचि भी लेते हैं तथा आसानी से उन्हें विषय का ज्ञान भी हो जाता है। खेल-खेल में पढ़ने के अलावा अवचेतन दिमाग़ का इस्तेमाल भी बच्चों को याद करवाने के लिए किया जा सकता है। ऐसी कुछ तरक़ीबें यहां प्रस्तुत हैं।

सफ़र के दौरान बच्चे को होर्डिंग्स पर लिखे हुए दुकानों के नाम पढ़ने को कहें और आप भी उत्साह से इस खेल में हिस्सा लें। आती-जाती गाड़ियों के नंबर प्लेट पर लिखे नंबर भी पढ़वा सकते हैं। उनका जोड़ या घटाना भी कर सकते हैं। इस तरह खेल-खेल में बच्चे पढ़ना सीख लेंगे।

शोध के अनुसार सोने के दस मिनट पहले और जागने के बाद शुरुआती दस मिनट तक अवचेतन दिमाग़ सक्रिय रहता है। यदि इस समय कुछ याद कराया जाए तो ना सिर्फ़ जल्दी याद हो जाता है, बल्कि जीवन-भर याद रहता है। अच्छे संस्कार व आदतों संबंधित कहानियां सुनाई जाएं तो बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं। समय के अभाव की स्थिति में आप किसी मोबाइल या टेप-रिकॉर्डर पर जो भी याद करवाना चाहते हैं उसे चला दें।

बच्चे को बोर्ड या स्लेट पर लिखने को कहें। घर के बाहर होने की स्थिति में भी यह लिखने का अभ्यास खेल-खेल में करवाया जा सकता है। उंगली से बच्चे की कलाई पर अक्षर या शब्द लिखिए और उन्हें अनुमान लगाने दें। उनसे भी अपनी कलाई पर अक्षर लिखने को कहें और आप अनुमान लगाएं।

मोबाइल में बच्चे की तथा अपनी आवाज़ में उनके पाठ्यक्रम की कविताएं, कहानियां रिकॉर्ड करें तथा सुनें। अपनी बोली सुनने की ख़ुशी तथा उत्साह में बच्चे बार-बार कविता रिकॉर्ड करेंगे और सुनेंगे, जिससे वह उन्हें खेल-खेल
में ही याद हो जाएगी। बच्चों को बग़ीचे में झूला झुलाते वक़्त गिनती करें। बच्चे आसानी से गिनती सीख जाएंगे।

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