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बोध कथा 'जीवन क्या है?':प्रतीकों के ज़रिए समझें, तो जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदल जाएगा

14 दिन पहले
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लेव टॉलस्टॉय से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, ‘जीवन क्या है?’ उसका उत्तर देते हुए टॉलस्टॉय ने कहानी सुनाई :

एक बार एक यात्री जंगल के मार्ग से अपने गंतव्य की ओर जा रहा था। तभी अचानक एक जंगली हाथी ने उस पर हमला किया और पैर उठाकर लगभग झपट्‌टा मारा। बचाव का अन्य मार्ग न देख वह अपने पहुंच में दिख रही एक बरगद के पेड़ की डाल पर लटक गया, जिसका सिरा तालाब पर झूल रहा था।

अपने प्राण बचाने के लिए जब वह इधर-उधर देख रहा था, तो डाल के नीचे उसकी दृष्टि गई, वहां साक्षात मृत्यु खड़ी दिखाई दी। विकराल मगरमच्छ उस यात्री के पेड़ से नीचे गिरने की बाट जोह रहा था। भय-कम्पित निरुपाय आंखें ऊपर पेड़ पर गईं, तो देखा, शहद का एक छत्ता लटक रहा है और उससे बूंद-बूंद मधु टपक रहा है। उसके मुख में पानी आ गया। कुछ क्षणें के लिए वह भय को भूल गया। उसने टपकते हुए मधु की बूंद की ओर अपना मुख खोल दिया। कुछ देर वह शहद का स्वाद लेता रहा।

किंतु यह क्या! वट की जिस पतली-सी टहनी को पकड़कर वह लटका हुआ है उसे एक श्वेत और काला चूहा कुतर रहे हैं। इस प्रकार टहनी थोड़ी ही देर में टूटने वाली थी।

कहानी पूर्ण हुई। जिज्ञासु का मुख प्रश्न की मुद्रा में उठा हुआ था। उसे देख टॉलस्टॉय ने कहा, ‘समझे कि नहीं?’

जिज्ञासु मौन रहा। टॉलस्टॉय ने समझाना आरम्भ किया, ‘वह हाथी काल (समय) था, मगरमच्छ मृत्यु था, मधु जीवन रस था, काला और श्वेत चूहे दिन और रात थे।’

‘इन सबका सम्मिलित नाम ही जीवन है।’

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