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तरक़ीब:किताब पढ़ते हुए करें टैगिंग का इस्तेमाल, इससे समझ विकसित होगी और दिलचस्पी भी बढ़ेगी

पूजा सिंह10 दिन पहले
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क्यों ज़रूरी है टैगिंग...?

याद रखने के लिए - हम किताब तो पढ़ते हैं लेकिन उनमें लिखे नए शब्द, वाक्य, अंक आदि याद नहीं रहते। कुछ ऐसे शूब्द जिनके अर्थ नहीं जानते उन्हें भी उस दौरान पढ़कर ध्यान नहीं रख पाते। किताब में मौजूद ज़रूरी सामग्रियों को टैगिंग की मदद से याद रख सकते हैं। यह तरीक़ा छात्रों के लिए काफ़ी मददगार साबित होता है।

पन्ना न छूटे - किस पन्ने तक किताब पढ़ चुके हैं या किस पेज से पढ़ना शुरू करना है, इसके लिए भी टैग का उपयोग कर सकते हैं। इससे उसकी याद बनी रहेगी। वहीं जो आवश्यक पन्ने हैं उनमें भी टैग लगा सकते हैं।

काम आसान होगा - मान लीजिए कि आपने किताब में कोई आंकड़ा पढ़ा है। जब कभी उस आंकड़े की ज़रूरत होगी तो आप दोबारा किताब खंगालने में समय बर्बाद करेंगे। अगर उसे टैग कर दें तो उसे हर बार ढूंढना आसान होगा।

कई तरह से कर सकते हैं टैगिंग

मार्कर से हाईलाइट करें- अगर किताब आपकी है तो उस पर ज़रूरी शब्दों या वाक्यों को मार्कर से हाईलाइट कर सकते हैं। मार्कर के अलग-अलग रंगों को कलर कोड की तरह उपयोग कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, हरा रंग ज़रूरी वाक्य के लिए या पीला रंग आंकड़ों के लिए।

नोट कार्ड का उपयोग- ये सबसे आसान तरीक़ा है टैगिंग का। एक छोटे-से कार्ड पर हर अध्याय से संबंधित जानकारी लिख सकते हैं। उस अध्याय को संक्षेप में लिख सकते हैं या ज़रूरी कोट्स भी लिखे जा सकते हैं। उससे संबंधित जानकारियां लिखने के लिए लंबा कार्ड उपयोग करें।

चिह्न लगा सकते हैं- अगर पन्नों पर रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो ज़रूरत के अनुसार चिह्न का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, पसंदीदा वाक्य के नीचे रेखा खींच सकते हैं, ज़रूरी अनुच्छेद (पैराग्राफ) पर सितारा, संदेह के लिए प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग करें।

कई रंग के स्टिकी नोट्स- ​​​​​​​स्टिकी नोट्स के कई फ़ायदे हैं। इसे रंगों के आधार पर बांट सकते हैं, इस पर लिख सकते हैं और एक बार चिपकाने के बाद आसानी से निकाल सकते हैं। जितने चाहें, उतने नोट्स चिपकाए जा सकते हैं। अगर किताब लाइब्रेरी की है तब ये स्टिकी नोट्स आपके काम आएंगे।

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