स्व-निखार:आवाज़ हमारे व्यक्तित्व का बड़ा हिस्सा है, इसमें कैसे सुधार ला सकते हैं, यहां जानिए

आशना जैन, जागृति शर्मा17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

एक सभ्य, सलीक़ेदार परिधान पहने एक महिला काफ़ी देर से सामान लिए बिल की कतार में लगी थी। उसे देखकर लग रहा था कि उसके पास जाकर कह दूं कि वो बहुत अच्छी लग रही है लेकिन तब तक कतार आगे निकल गई और उसका नंबर आ गया। मैं उसे देख ही रही थी कि उसने जैसे ही बिल भरने के लिए पेमेंट करने के बारे में पूछा तो मैं अचंभित रह गई। उसकी आवाज़ बेहद तीखी और कर्कश थी। अक्सर हम ऐसे लोगों को देखते हैं जो पढ़े-लिखे, अच्छे कपड़े पहने हुए और एक सभ्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के दिखाई पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही वे बात करना शुरू करते हैं, हमें एहसास होता है कि उनकी आवाज़ उस परिस्थिति के लिए उपयुक्त नहीं है या उनके व्यक्तित्व पर जंच नहीं रही। अक्सर इस वजह से लोग उन्हें असभ्य तक समझ बैठते हैं।

आवाज़ के तीन पहलू होते हैं —

लाउडनेस, क्वालिटी और पिच

  1. हर व्यक्ति की आवाज़ की तीव्रता अलग होती है और आवाज़ के आधार पर हम उनकी पहचान कर सकते हैं। हम स्थिति के आधार पर अपनी आवाज़ बदलते हैं। यह ऊंची या नरम हो सकती है।
  2. इसी तरह हमारी आवाज़ की पिच भी ऊंची या नीची हो सकती है। आमतौर पर व्यक्ति इसे अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए बदलता है। पुरुषों में पिच धीमी होती है वहीं बच्चों और महिलाओं की ऊंची पिच होती है।
  3. आवाज़ का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी क्वालिटी यानी कि गुणवत्ता है। आवाज़ में कर्कशता बोलने की अति के कारण हो सकती है। हालांकि कई बार ये समस्या आनुवंशिक भी हो सकती है।

आवाज़ सम्बंधी समस्याएं

आवाज़ का दुरुपयोग समस्या बन सकता है। यह उन लोगों में बहुत सामान्य है जो चिल्लाते हैं। यह कुछ व्यवसायों में भी एक आम समस्या है जिसमें ऊंची आवाज़ का उपयोग रोज़ाना करना पड़ता है जैसे गायक, शिक्षक, राजनेता, प्रस्तोता इत्यादि। अत्यधिक ज़ोर से बोलना स्थायी रूप से कर्कश आवाज़ दे सकता है और गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि नियमित रूप से अपनी आवाज़ का ख़्याल रखें।

उपाय जो सुधार लाएंगे

  • नियमित भाप लें।
  • आवश्यकता न होने पर न चिल्लाएं, न ही ज़ोर लगाकर बात करें।
  • गला ज़्यादा साफ़ न करें।
  • कुछ-कुछ देर में पानी के घूंट पिएं।
  • नियमित अंतराल पर खाना सुनिश्चित करें।
  • मसालेदार या तैलीय भोजन से बचें।
  • कोल्ड ड्रिंक्स या कैफीनयुक्त पेय (चाय/कॉफी) का सेवन कम करें।
  • रात का भोजन सोने से कम से कम 3 घंटे पहले कर लें।
  • शराब/ तंबाकू/ धूम्रपान से बचें।
  • एसिडिटी न हो इस बात का ख़्याल रखें।
  • अपनी आवाज़ का ख़्याल रखने से हम न सिर्फ़ ख़ुद की मदद करते हैं बल्कि आसपास सभी सुनने वालों को अच्छा महसूस कराते हैं। उम्मीद है आप अपनी आवाज़ के महत्व को समझेंगे।

तीखी आवाज़ बाधा न बन जाए

बोलने का तरीक़ा और अच्छी बोली जिस तरह हमारी पहचान बन जाती है, ठीक उसी प्रकार चुभने वाली या तीखी बोली बातचीत में बाधा बन सकती है। हम उत्तेजना, क्रोध, ख़ुशी, शोक आदि को व्यक्त करने के लिए अपने स्वर को बदलते हैं। इस बदलाव की कमी हमारी आवाज़ को समतल या भावहीन बना सकती है।

गति का भी रहे ख़्याल

  • बहुत तेज़ गति से बोलने से भी बात अस्पष्ट सुनाई देती है और आप अपनी बात ठीक तरह से सामने वाले व्यक्ति को समझा नहीं पाते।
  • कुछ लोग सड़क पर चलते हुए फोन पर बहुत ऊंची आवाज़ में बात करते हैं, जिस कारण आसपास के लोग परेशान हो जाते हैं।
  • कई बार तो लोग जल्दी बात ख़त्म करने की कोशिश में लड़खड़ा जाते हैं। इसलिए नरम स्वर में या परिष्कृत तरीक़े से बोलना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ लोग बहुत ज़ोर से बोलते हैं जबकि सामने वाला व्यक्ति क़रीब ही होता है। ऐसे में आवाज़ का चुभना सामान्य है।

कुछ प्रयास मददगार होंगे

  • घर में धीमी आवाज़ में बात करने का अभ्यास करें। बोलकर पढ़ने और परिवार के सदस्यों से बात करने के दौरान ये कोशिश कर सकते हैं।
  • एक-एक शब्द पर ज़ोर देकर धीमी गति में पढ़ने का प्रयास करें। इससे आवाज़ साफ़ होगी और लोग आपकी बात को अच्छी तरह से समझ पाएंगे। इसका नियमित रूप से अभ्यास करें।
  • कुछ लोग इतना कम मुंह खोलकर बोलते हैं कि लगता है जैसे वे बड़बड़ा रहे हैं। अपना मुंह पर्याप्त रूप से खोलना सुनिश्चित करें, ताकि आवाज़ साफ़ समझ में आए।
  • कई लोगों को संबोधित करते समय हमें ज़ोर से बोलना होगा वहीं एक व्यक्ति से बात करते समय धीरे बात करना उचित होगा। बोलते समय इस बात को ध्यान में रखें।
  • हम ख़ुशी, क्रोध, दुख, सामान्य बातचीत या पूछताछ आदि के वक़्त बोलने का लहज़ा बदलते हैं। इसीलिए अपने बोलने के ढंग के साथ ही आवाज़ का भी ख़्याल रखना हमारी ज़िम्मेदारी है।
खबरें और भी हैं...